आँखों को खोल दे जो ऐसी ही ताजगी हो तुम तो सुबह की चाय सी मीठी सी ताजगी हो। बाहर निकल के देखा पौधों में ओस सी हो, तुम ही तो जिन्दगी में सचमुच के […]
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आँखों को खोल दे जो ऐसी ही ताजगी हो तुम तो सुबह की चाय सी मीठी सी ताजगी हो। बाहर निकल के देखा पौधों में ओस सी हो, तुम ही तो जिन्दगी में सचमुच के […]
इधर चुनावों की हलचल है और कुर्सियों की टक्कर उधर बुझ रहे माँ के दीपक ,जलते जलते सरहद पर क्या होगा ऐसी कुर्सी का जनता की मातमपुर्सी का सत्ता के इन भूंखे प्यासों को अब […]
मेरे हर प्रश्न का जवाब है मां मेरे हर दर्द का इलाज है मां भीड़ में भी जो पहचान लेती है अपने बच्चों की हर एक आहट ऐसी अनपढ़ी, अनलिखी एक किताब है मां मेरे […]
मन के घाव भी भरने जरूरी हैं तेरे-मेरे नैन भी मिलने जरूरी हैं आकाश से धरती के जो हैं फासले तय हैं बरस कर बूंद तुझमें ऐ जमीं ! मिलना जरूरी है…
बेटी हुई पराई देखो बेटी हुई पराई, यह कैसी ऋतु आई देखो बेटी हुई पराई मेरे आंगन के पौधे की डाली बड़ी ही नाजुक नाजुक सी वह थोड़ी नखरेवाली, मेरे आंगन में जब वह आई […]
मंगलसूत्र को सुहाग का प्रतीक माना जाता है जाने क्यों ऐसा कहा जाता है?? बचपन से यही सोंचती थी मैं पर आज देख भी लिया अपनी आँखों से; एक विधवा स्त्री के सामने आने पर […]
दहेज प्रथा एक अभिशाप ********************** बूढ़ा बाप अपनी पगड़ी तक निकालकर दे देता है और माँ अपने कलेजे का टुकड़ा पर फिर भी नहीं भरता लोभियों का मन जाने क्या लेना चाहे वो ? समझते […]
शत्रु को तोड़ कर लेटा, तिरंगा ओढ़ कर बेटा भारत मां की हर मां का , सीना फटता जाता है जब किसी का लाल तिरंगा , ओढ़ के आता है बूढ़े बाप ने देखा जब, […]
रागिनी गा दे या गाए बिना सुना दे भीतर है जो उबाल उसे बाहर निकलने दे। मन की जुल्फों को उलझने दे दिल की लगी को चारों ओर बिखरने दे। उसकी तपिश से बर्फ पिघलने […]
छोंड़ दो इस बुढ़िया को किसी वृद्धाश्रम में यह सुनकर मुझको थोड़ा गुस्सा आया एक दिन फिर तंग आकर पत्नी से वृद्ध माँ को आश्रम मैं छोंड़ आया रोया बहुत माँ से लिपटकर माँ का […]
जला दिया क्यों मुझको ओ साजन! ऐसी क्या गलती कर बैठी थी मैं तो अपने सास-ससुर की पूजा देवों सम करती थी ननद को अपनी बहन की तरह मानती थी देवर को भैया कहती थी […]
जख्म अपनों ने दिल पे हर बार कर दिये अपने ही शहर के बच्चों ने हम पर पथराव कर दिये दर्द उस दम बढ़ा मेरा ऐ हिन्दुस्तानियों ! जब हमारी कुर्बानी पर भी सियासत के […]
आज तुमने मुस्कुराकर बात की कुछ रोने वाली और कुछ हँसने वाली बात की, अच्छा लगा मुझको तुम्हारा झगड़ा करना भी खुशी इस बात की है कि तुमने हमसे बात की…
किसानों ने ‘अब दिल्ली दूर नहीं’ यह नारा सत्य कर दिखाया है पूरे देश को अपनी व्यथा से रूबरू करवाया है पर कुछ सियासत के घोंड़ो के कान पर जूं नहीं रेंगता है सारा देश […]
संवत् 1526 29 नवंबर 1469 कार्तिक पूर्णिमा के दिन, पंजाब के तलवंडी गांव में गुरु नानक जी ने जन्म लिया जाना गया ये नाम ननकाना साहब नाम से, वर्तमान में है जो पाकिस्तान में सिख […]
हे राम तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! ************************* कहीं जल रहे दीप तो देखो कहीं अंधेरा छाया है हे राम ! तुम्हारी दुनिया में ये कैसा कलयुग आया है…!! तज रहे प्राण […]
मेरे देश के किसान ! मत हो परेशान यह बुरा वक्त भी टल जाएगा… जिसने जो बोया है वो वैसा ही फल पायेगा सुना तो होगा तुमने भी; बुरा वक्त सिर्फ हमारे सब्र का इंतेहान […]
*कसम से* अब आप बिन रहा नहीं जाता किसी से कुछ कहा भी नहीं जाता हर पल आपकी कमी महसूस होती है हर दम अधूरी जमीं महसूस होती है कितनी भी मसरूफ़ रहूं, एक आहट […]
ऐ जाते हुए लम्हों ! मुझको भी साथ में ले लो तुम संग मैं भी मिल लूंगा अतीत के मीठे सपनों से खो जाऊंगा मैं फिर से बिखरी-बिखरी जुल्फों में उन खुशबू वाली सांसों में […]
गिरी इमारत कौन मर गया टूट गया पुल जाने कौन तर गया हक़ मार कर किसी का ये बताओ कौन बन गया जिहादी विचारों से ईश्वर कैसे खुश हो गया धर्म परिवर्तन करने से ये […]
वृक्ष कहे रोकर पृथ्वी से हे वसुधा ! मैं हूँ भयभीत बोया मुझको प्रेम से किसी ने रोपा और दिया आशीष पर जाने कब चले कटारी मेरे चौंड़े वक्षस्थल पर आज मैं देता हूँ छाया […]
हमें मालूम होता अगर उनकी आदत है रूठ जाने की तो हम कभी परवाह ना करते इस जमाने की । तोड़कर दुनिया की सारी रस्में कसमें चले आते तेरे पहलू में दिल अपना रखने । […]
तन्हाई के आलम में घुट-घुटकर जब दर्द जवां होता है चाहत में खिले फूलों का पत्थर पर निशां होता है । टूट कर बिखरने से पहले यूं बाहों में समेट लेते हैं जैसे धरती को […]
सोनू एक प्यारा बच्चा था, मन का बिल्कुल सच्चा था चॉकलेट खाने का मन करता था सोनू का पर मम्मी से वो डरता था इसीलिए सोनू चॉकलेट की, विंडो शॉपिंग करता था । दूर-दूर से […]
क्यों दिल्ली आज हिल रही क्यों इतना डर रही वो ह़क लेने आ रहे जान की बाजी लगा रहे राह में कितने रोड़े अटकाओगे अब रोक नहीं पाओगे जितनी बंदिशे लगाओगे संघर्ष का उग्र रूप […]
क्या खराबी है कि मियां शराबी है । शराबी की बीबी हूँ इसमें भी नवाबी है।। रोज पकौरे और सलाद दिखते घर में हो आबाद नल में पानी हो न बेशक़ मेज सजा शर्बते गुलाबी […]
यादों के पंख फैलाकर सुनहरी रात है आई उन्हें भी प्यार है हमसे सुनने में ये बात है आई पैर धरती पे ना लगते उड़ गई आसमां में मैं जीते जी प्रज्ञा’ देखो स्वर्ग में […]
थक गई हूँ अब रोते-रोते, तन्हा राहों पर चलते-चलते इन बिखरी साँसों की अरज बस है यही तुमसे मिलन जब भी हमारा हो ना कोई गिला-शिकवा हो ‘प्रेम के उपनिषद्’ पर बस नाम अंकित तुम्हारा […]
आज अन्नदाता किसान, राहों पर है परेशान देश को अन्न देता जो, भारत माँ की जो है शान क्यूं आना पड़ा उसे राहों पर, ये बात कर रही है हैरान अपने एक हक़ की खातिर, […]
पति की गलती पुत्र की गलती गलती करे चाहे भाई-बाप। हर गलती पर रोए नारी आखिर ये है कैसा संताप।। अपराध नहीं करती कोई एक अपराधी की बन रहती। बस यही एक अपराध सदा अँखियाँ […]
यह न कहो अवरोध खड़े हैं, कैसे मंजिल को पाऊँ मैं, जहां-तहां बाधाएं बैठी कैसे कदम उठाऊँ मैं। यही निराशा खुद बाधा है जो आगे बढ़ने से पहले डगमग कर देती है पग को चाहे […]
अनाथ आश्रम ★★★★★★★ मेरे माँ-बाप कैसे होंगे यही सवाल अक्सर मस्तिष्क में गूंजता रहता है अक्सर मुझे वो काकी याद आ जाती हैं जिन्होंने मेरी परवरिश बचपन में की थी उस अनाथ आश्रम में बहुत […]
अतीत के फफोले *************** जीवन मेरा उलझा-उलझा सुलझी लट बालों की मैंने ना देखा सुंदर उपवन ना देखी प्रेम की सरिता निर्मल भूलवश मैं पड़ गई प्रेम के मायाजाल में सोंचा था मिलेगा सुख और […]
लावारिस बचपन ************** सड़कों पर भटक-भटक कर है कैसे बचपन बीता, और नहीं खाने को है एक निवाला मिलता… जाने कहाँ हैं मेरे माँ-बाप नहीं मैं जानू, मैं तो झुग्गी बस्ती को ही अपना घर-बर […]
मुहौब्बत अगर आप सच में करें तो मुहौब्बत में ईश्वर की छाया दिखेगी, दिखावा नहीं माँगती है मुहौब्बत, मुहौब्बत में सच की कहानी मिलेगी। सच्ची मुहौब्बत में धोखा करे जो, इंसान कहने के काबिल नहीं […]
कार्तिक मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी आई है ये प्रबोधिनी एकादशी भी कहलाई है हर्षोल्लास साथ में लाई है आषाढ़ मास की, शुक्ल पक्ष की एकादशी को चार मास के लिए […]
लड़की है तो क्या हुआ हम भी लिख पढ़ ले अगर दुनिया के दरवाजे खुलेंगे मिलेगी हमको भी डगर विद्या में है ताकत कितनी बात समझ में आ गई दुनिया के हर क्षेत्र में नारी […]
आषाण की एकादशी को सभी देव सो जाते हैं… और कार्तिक की एकादशी को सभी देव जग जाते हैं… इसीलिए इस दिन को देवोत्थान एकादशी कहते हैं… आज के दिन विष्णु जी चारमास के बाद […]
उस माँ का दर्द कौन जाने ! जो अपने फर्ज के लिए अपने दुधमुहे बच्चे को घर छोंड़कर जाती है.. वो पुलिसकर्मी है अपनी ड्यूटी खूब निभाती है… कभी छोंड़ती मायके में कभी ससुराल में […]
राहें हमारी मिलने के आसार नहीं हैं! कैसे कहूँ तुम्हारा इंतजार नहीं है!! मेरी हर दलील को ठुकरा चुका है ये! इस दिल पे मेरा कोई इख्तियार नही है!! ख़्वाबों में तुमसे रोज़ मुलाक़ात है […]
पसीना बहाना जरूरी है तेरा, तभी तो कदम लक्ष्य चूमेगा तेरा। सजग हो स्वयं को लगा श्रम पथ पर, सवेरा है जग जा, आलस्य मत कर। तेरी राह देखे खड़ी है बुलंदी कर ले तू […]
बात अपनी बोल देना, बात में डरना नहीं। धर्म की ही बात करना, धर्म से डिगना नहीं। तू अगर है सत्य पथ पर, झूठ से डरना नहीं। भूल कर भी बस गलत की तू मदद […]
गजल- सोचा न था | ठुकरा देगा मुझे इस तरह कभी सोचा न था | दगा देगा मुझे इस तरह कभी सोचा न था | खुद से भी जियादा एतवार था मुझे उसपर | दफा […]
जहाँ सबसे पहले सूरज निकले वहाँ खौफ का मरघट क्यों जहाँ काबा -काशी एक धरा पर उस माटी में दलदल क्यों खून के आंसू रो रहे हैं क्रांतिवीर बलिदानी क्यों नेताओं की लोलुपता पर सबको […]
भरा दर्द है सब तरफ याद रखना सभी दर्द में हैं मगर याद रखना, भुला कर गमों को खुशी खोजना बस, तभी जिन्दगी में मिलेगा मधुर रस। न चिन्ता में रहना अधिक आप ऐसे, सदा […]
गज़ल -वो ठहरता नही है | बातो मे करता प्यार मगर दिल से वो करता नहीं है | वादे लाखो किए मगर जरूरत पर वो ठहरता नहीं है | बुला पास मुझे करना गैरो कहकसा […]
बाबू जी की टूटी कुर्सी चरमर-चरमर करती है जब बैठो उस कुर्सी पर डाल की तरह लचकती है बाबू जी उस कुर्सी पर बैठ के पेपर पढ़ते हैं और साथ में बाबू जी चाय की […]
कविता- दर्जी ——————- फटी पैंट मेरी, ले दर्जी जी के घर जाता हूं, टूटी फूटी मशीन के संग, बैठा बुजुर्ग दर्जी हैं, देख मुझे मुस्कुराया वह, ढलती शाम तक में जो, 20 रुपए कमाया वह, […]
ठंडक की आहट से उठ रही एक डर, कैसे कटेगा ये जाड़ा मिला न कम्बल गर। सिर पर छत नहीं, तन ढकने को नहीं, खुला आसमान है, जीवन है सड़क पर। सिकुड़-सिकुड़ कर रात काटी […]
आज बहुत उदास होकर उसने मुझे पुकारा, मैं पास गई और उसे प्यार से सहलाया… उसने मुझसे कहा तुम मुझसे नाराज हो क्या ? या जिन्दगी की उलझनों से हताश हो क्या ? मैंने मुस्कुराते […]
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