कविता-होगा कोई लोभी ——————————- होगा कोई लोभी, होगा कोई ना समझ, जो तुम्हें खरीदे रुपयों में वरना तुम्हारी कीमत चवन्नी से भी कम है, अरे…. होगा कोई आंख का अंधा, जो तुम्हारी सूरत को ,उगता […]

ममता किसने भर दी मन में गाय को बछड़े से ममता है माँ को बेटे से। ये ममता किसने भर दी मन में। ममता जिसने पैदा की वह ईश्वर सबसे ऊपर है, ममता का गुण […]

किसी की जीत या किसी की हार का बाजार शोक नहीं मनाता। एक व्यापारी का पतन दूसरे व्यापारी के उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, प्रेम इत्यादि की बातें व्यापार में खोटे सिक्के […]

खो गए खेल आज बचपन के, रम गया बालपन मोबाइल में, आँख का सूख रहा पानी है टकटकी आज है मोबाइल में। वक्त है ही नहीं बचा जिससे संस्कारों को सीख लें बच्चे, कुछ रहा […]

कविता – मां और कवि —————————- मां और कवि में , अंतर इतना, सीता और बाल्मिकी में, अंतर जितना, मां सुधा अगर है, कवि पारस पत्थर है, मां सरिता गर है, कवि सागर की गहराई […]

कविता- आलसी तू आलसी है ————————————– आलसी तू आलसी है तू बेरोजगार नही है आलस छोड़ काम कर वरना तेरी खैर नही है, डिग्री हैं डिप्लोमा हैं है पास तेरे कोई हुनर, कुछ नहीं है […]

युद्ध से एक सैनिक घर आया, बिटिया को द्वारे पर पाया। एक हाथ में थैला था उसके, दूजा पीठ पीछे छिपाया। पांच साल की छोटी बिटिया के, चेहरे पर आई मुस्कान। उसने सोचा पापा के […]

नफरत केवल खून सुखाता प्यार उजाला देता है। मेहनत का परिणाम अंततः हमें निवाला देता है। दूजे से ईर्ष्या रखने से नहीं किसी का भला हुआ, अपने ही संघर्ष से साथी सबका अपना भला हुआ। […]

चमक रही है नयी सुबह सूरज की किरणें फैली हैं, बन्द रात भर थी जो आंखें, उनमें नई उमंग खिली है। गमलों के पौधों में देखो, नई ताजगी निखर रही है, फूलों में कलियों में […]

स्टैंड पोस्ट का नल बेचारा खड़ा रहा बस खड़ा रहा, एक बूंद भी टपक न पाई, ऐसा सूखा पड़ा रहा। प्यासों के खाली बर्तन जब देखे उसने रोना चाहा, मगर कहाँ से आते आँसू, ऐसा […]

नही हाथ में उंगलियां पर पेट में हैं दात जितना कमाती है किस्मत उतना खाती आंत उतना खाती आंत करूं क्या मुझे बताओ मेरी हालत पर तुम ना हमदर्दी दिखाओ काम कराओ फिर मुझको दो […]

भोर होती है हर रोज बहुल के लिए आशा की एक किरण लेकर नऐ विचार नई ख्वाहिशें नई चाह नई भूख जो होती है पद-प्रतिष्ठा धन- दौलत वस्तुओं संबंधों को समेटने की… बहुल के होती […]

घड़ी तो घड़ी है साधारण हो या फिर असामान्य। पर समय बड़ा हीं होता जग में सदा से असामान्य।। टिक – टिक करती सूई वाली। अपने हीं चाल में चलने वाली।। डिजिटल घड़ी में अंकों […]

उगते सूर्य की रश्मियाँ, जब-जब पड़ी हरित किसलय पर सुनहरी पत्तियाँ हो गईं, देख सुनहरी आभा उनकी, आली, मैं कहीं खो गई। वृक्षों के बीच-बीच से, रश्मियाँ छन-छन कर आती थीं उषा काल की सुन्दर […]

मेरी बेटी, मेरी है, सिर्फ मेरी है मेरी है, मेरी है, सिर्फ मेरी है, तुम सिर्फ मेरी है, मेरे बिना कोई दूसरा तुम से ज्यादा प्यार नहीं कर सकता मेरी जान, तेरे सिवा किसी ओर […]

हम सब परेशान है ये वक्त ही मुश्किलों से भरा है सब रास्ते है खुले और सड़के भी साफ है एक किनारे पर है चलना दुसरे पर मौत है ज़िंदगी की इस सफर में सब […]

हाथी की तरह दो दांत मत देना मुझे प्रभो कि बाहर अलग, भीतर अलग। दो रूप न दिख पाऊँ। दो राह न चल पाऊँ। जैसा भी दिखूँ एक दिखूँ, नेक रहूँ। न किसी से ठेस […]

मेरी एक सखी चली ससुराल, आशीष लेकर बुजुर्गों का। गले मिलकर सखियों के, भावी जीवन के सपने लेकर अपनी अंखियों में सखी चली ससुराल। सखियों की भी दुआएँ, लेती जाना तुम। साजन सॅंग मिलकर, नव-सॅंसार […]

कर्म के लिए कहां कोई करार बैठे हैं बेकार आलस की कतार बेजार की पगार सरकार की बुखार तंत्र में अरसे से सुधार की दरकार सुरक्षा की दीवार में है दरार अधिकारी दे रहे भ्रष्टों […]

कल अचानक ही तुम्हारी तस्वीर पर आकर ठहर गईं मेरी निगाहें… और मैं उलझकर रह गयी तुम्हारी आँखों के तिलिस्म में ..!! गहरी ख़ामोशी समेटे हुए सागर सी ये तुम्हारी आँखे, साक्षी हैं ज़िन्दगी के […]

बिल्ली की पूंछ ——————- रुकी कलम अगर भूत भविष्य बिखर जाएगा रखो न हाथ गिरवी, जमाना भूखे बच्चों को- व्रती बता जाएगा, जिन्हें शुद्ध पानी नसीब नहीं, उन्हें बोतल का- पानी पीने की सलाह दे […]

जुबान से मेरी किसी का दिल न दुखे न कभी लेखनी यह, ठेस के भाव लिखे। न निशाना हो मेरा कहीं पर व्यक्तिगत सा न कोई बात बोलूं दिखूँ जो व्यक्तिगत सा। चाह इतनी रखूं […]

गुनगुनाते गीत मेरे जीवन से जुड़े लफ़्ज़ों में बुजुर्गों की दुआओं में, प्रेम की निगाहों में । ममता के अश्कों में, उमड़ते भावों में भर रहे घावों में टूटती चाहों में दर्द में आहों में। […]

जीवन में उत्साह हो मन नाचे बनकर मोर हे युवा ! तू परिश्रम कर सफलता मिलेगी घनघोर अभी तो तूने जीवन की बस एक दोपहरी देखी है अभी तो तूने सावन की बस पहली बारिश […]

हमारे परिपक्व बंधन पर था घोर अंधेरा छाया एक भंवरे ने आकर के तेरा हाल बताया तेरी बेचैनी पर मेरी आँख भर आई तेरी नादानी पर मुझको हँसी खूब है आई ये कैसा अल्हण पन […]

आशा भी न थी कि मिल पायेंगे बचपन के कई साल गुजारे साथ दशकों तक सिर्फ याद बन जायेंगे मीठे ख्वाब फिर कहीं गुम जाएगें बहस में पड़ने वाले कई होंगे सामंजस्य बिठाने वाले थोड़े […]

मेरे अश्क जो गिरे धरा पर, वो चमकीले ओस बने। मुस्कुरा दिए वो दूर से देखकर, मैं मोम सी पिघलती रही.. वो पाहन सम ठोस बने। मेरी सिसकियों में उनको, ठॅंडी पवन का एहसास हुआ […]

साहित्य है सबके लिए, यही समाज का है दर्शन। रुचिकर भी हो पढ़ने में, हो उस काल का दर्पण। जीवन की समस्याओं पर भी करे विचार, ऐसा हो साहित्यकार। कठिनाइयों पर विजय पाने की, नैराश्य […]

21 मार्च के बाद, प्रथम पूर्णिमा के पश्चात आने वाले पहले रविवार ईस्टर संडे मनाया जाता है। गुड फ्राइडे के बाद, आने वाला प्रथम रविवार ईस्टर संडे कहलाता है। उषा काल में महिलाओं द्वारा, की […]

मित्रता में राम हो मित्रता में श्याम हो बस अंगुली पकड़ के चलने दो दिल में अपने रहने दो, सत्य वचन, सत्य के प्रेमी, ना बड़बोला, हक है इतना सब कुछ कहना, स्व हित परहित, […]

सावन तुमसे माफी है माफी दिनकर कालिदास के बच्चों से है, काफी दिन मै दूर रहा दूर कारण- फोन मेरा चोरी हुआ था, अभी फोन लिया नही पर सावन तुमसे दूर हुआ नही, कहां गए […]

अक्सर मंदिर के पुजारी व्यक्ति को जीवन के आसक्ति के प्रति पश्चताप का भाव रख कर ईश्वर से क्षमा प्रार्थी होने की सलाह देते हैं। इनके अनुसार यदि वासना के प्रति निरासक्त होकर ईश्वर से क्षमा याचना […]

मनुष्य सोचता है मंजिल दिखे तो , तब मैं मेहनत करूँ। मंजिल सोचती है मेहनत करे तो उसे झलक दे सकूँ। ऐसे में जिसने कर्मपथ को अपना कदम है बढ़ाया, उसी ने हमेशा मंजिल को […]

शुक्रवार का ही दिवस था, यीशु के बलिदान का दिन, सूली पर चढ़ गए, उस महान इन्सान की याद का दिन। शत्-शत् नमन है ईसा मसीह को मसीहा था जो इन्सानियत का एक पवित्र आत्मा […]

क्यूं ना थोड़ा सा, अलग बनें। खुश रहने की सलाह, बहुत दी.. अब खुश रहने की वजह बनें। मिटा कर किसी के, ह्रदय का संताप फिर अपने ह्रदय की खुशी को माप। खिलाकर किसी गरीब […]

ऊपर वाला बिना वस्त्रों के भेजता है, जन्म के वक्त निःवस्त्र भेजता है। ताकि आप ढक सको नेकी के वस्त्रों से अपना तन, प्रेम से आच्छादित कर सको अपना मन। नेकी जरूरी है, नेकी से […]

भोजपुरी चईता – हरी हरी बलिया | हरी हरी डलिया मे भरी भरी फलिया ये रामा , खेतवा मे डोले ले गेंहुया के बलिया ये रामा खेतवा मे | चढले चइत के जबसे मस्त महीनवा […]

मेरे लिखे से उजाला हो जाये कुछ भी नहीं तो उठें चिंगारिया, किसी को जिन्दगी का रास्ता मिल जाये। अंधेरे में भटकता अगर मन हो किसी का मेरी दो पंक्ति उसको रास्ता दे आये। तभी […]

अहो पत्थर! नदी से घिस- घिस रेत बनते हो, धूल बह जाती है, तुम ही तुम शेष रहते हो। नदी की नीलिमा में तुम बहुत ही श्वेत लगते हो। भवन निर्माण में तुम्हीं मजबूत बनते […]

ईंट फेंकेगा आप पर कोई आप उस ईंट को संभाल कर रखना, कभी भवन बनाओगे या कुछ सृजन करोगे, काम आयेंगी वे ईंट और पत्थर। आंख में रेत झौंके आपके अगर कोई, सच का चश्मा […]

ईश ऐसा वर मुझे दे ईर्ष्या से दूर बैठूँ, पंक्तियाँ लिख दूँ वहाँ जिस ओर थोड़ा दर्द देखूँ। देख अनदेखा नहीं कर पाऊँ पीड़ा दूसरे की, बल्कि खुद महसूस कर पाऊँ मैं पीड़ा दूसरे की। […]

किन्नर होना अभिशाप है !! यह जाना जन्म पाकर जहां भी जाऊं माहौल बन जाता है हास्यास्पद मैं तो गौरी शंकर का रूप हूं हां मैं अर्धनारीश्वर हूं क्यों नहीं समझते दुनिया वाले मुझको अपने […]

कई माह बीत गये बारिश नहीं हुई। सूखी धरा के अधर ताकते हैं नभ को। प्राणी हैं व्याकुल जल की कमी से, सब तरफ है सूखा प्यास आज सबको। पौधे झुलस कर मुरझा गए हैं, […]

जाग इंसान उनकी मदद कर है सहारे की जिनको जरूरत, भूख से जो बिलखता है बचपन आगे रहकर तू उसकी मदद कर। क्या करेगा कमा करके इतना क्या करेगा जमा करके इतना, तू कमा खूब […]

“बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” ———————————- एक बेटी को शिक्षित करने से दो कुल शिक्षित हो जाते हैं। फिर भी ना जाने क्यों लोग अपनी बेटियों को नहीं पढ़ाते हैं । जल्दी शादी करने की जाने […]

किये पे रोना ही पड़ेगा मायूस मन नीचे गिरायेगा ही, झूठ का साथ देना है आसान पर मुश्किल घड़ी में सच ही आयेगा काम ।।1।। ——————————————————— क्यूँ करते हो गलत काम जब सच ही आयेंगे […]

नशा नहीं, जिन्दगी बचाओ त्यौहारों के समय इस तरह मत जीवन पर दांव लगाओ। नशा स्वयं से दूर भगाओ। झगड़े और फसादों की जड़ मद्यपान विवादों की जड़, अपनी हानि नशे से होती, इज्जत सबके […]

दुनियाॅं के रंगमंच पर, हम सभी आते हैं अपना-अपना किरदार निभाने, किरदार निभाते-निभाते भूल ही जाते हैं.. कि एक दिन इस रंगमंच से, जाना है एक दूसरी दुनियाँ में, यहां रहकर जो मिला है किरदार, […]

रंग नही हैं अब क्या जमाने में कि लोग बेरंग हो गये जहां में ———————————- हाँ रंग ही नही, सब कुछ है जहां में फिर क्यूँ लोग भटक रहे है, मन के अँधियारों में ————————————————- […]