मैय्या मुझको हबीब गुलाल, रंग भरी पिचकारी दिला दे। होली के अवसर पर मैय्या, मुझे मेरी राधे से मिला दे।। सखाओं संग झुंड बनाकर, होली खेलने जाऊंगा। पहले सखाओं फिर राधे को, रंगों से खूब […]

सात रंग के कलश भरे हैं, अबीर उड़ रहे हैं पवन में l राहें भी रंगीन हुई है, जब से आप बसे हो मन में l सुर्ख पलाश का केसरिया पानी बरसाऊंगी प्रीतम तुम पर, […]

होली में मिलें कई रंग, रंग दो मुझको साॅंवरिया लाल, गुलाबी प्रेम रंग है, हो गई मैं तो बावरिया, रंग दो मुझको साॅंवरिया l हरा रंग खुशहाली का रंग, हरे रंग से खेल मेरे संग […]

सब पायें नवरंग किसी को दुख न मिले भगवान। भरपेट भोजन, वसन ढका तन, आस चढ़े परवान। किसी को दुःख न मिले भगवान। जीवन सबका खुशियों भरा हो सूखे न मन कोई, हरा ही हरा […]

बह रही प्यार की सरिता कहे मन लिख डालूँ एक कविता सारा नेह निचोड़ दूँ इसमें खिल जाये सुन वनिता । डोर हमारी और तुम्हारी मजबूती से बंधी रहे यह गीत उगें बस, नेह भरे […]

होली की धूम मची कान्हा की खातिर राधा सजी बैठी नैन बिछाकर होंठों पर रंग लगाकर श्याम के रंग में रंग जाऊं बन जाऊं मैं चाँद पुष्पों के संग खेलकर कब आएंगे श्याम ? कब […]

फूलों और गुलाल के रंग, लेकर आए बधाई संग l लगा लो रोली, बाॅंध के मौली आने को है रंग बिरंगी होली l रंगभरी एकादशी की, आज सबको है बधाई l अबीर और पिचकारी लेकर, […]

होली में फूल खिला दे हँसी के, होली में फूल खिला दे। प्यारे-प्यारे रंग-बिरंगे फूल ही फूल खिला दे। हँसी के— ढंग-बेढंदी हुई जिंदगानी, होली में ढंग दिला दे। हँसी के होली में फूल खिला […]

छवि तेरी मन भाये सुबह सब ओर मनोहर कोमल सी, बिखर रही है लाल अरुणिमा मिहिका बिखरी मुक्ता सी। जागूँ देखूँ स्वच्छ सुबह को त्याग अवस्था सुप्ता सी। तेरी मन भाये सुबह सब मनोहर कोमल […]

ख़त कोई प्यार भरा लिख देना मशवरा लिखना दुआ लिख देना कोई दीवार-ए-शिकस्ता ही सही उस पे तुम नाम मिरा लिख देना कितना सादा था वो इम्काँ का नशा एक झोंके को हवा लिख देना […]

सुन्दर तेरी रचना अति सुन्दर तेरी रचना विधाता रंग बिरंगी सृष्टि रची, जा में नाना तरह जीवजाति बसी। नाना तरह की, विविध तरह जीवन ज्योति जगी। अति सुन्दर तेरी रचना विधाता, कल-कल करती नदिया-झरने वन-उपवन, […]

मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।2।। ———————————————- मेरे राम इतना तु कर दे मुझ पे एहसान कि तेरा नाम जपूँ मैं बार-बार ।।1।। ———————————————— तेरे […]

गाली न दे मुझे आली नहीं मारी तुझे पिचकारी मैंने मारी नहीं पिचकारी, भर कर रंग, चला कुंज गलियन, मारी नहीं पिचकारी। शायद तुझको भूल हुई है या यह मेरी राह नई है, मगर यही […]

सौ दीप जला लो मंदिरों में चाहे हजारे दीये जल तेरे आँगन में जब तक मन की तम ना होंगे दूर तब-तक है तेरे सारे दीये की रौनक सून ।। ———————————————- एक दीप जलाओ ऐसा […]

पावक उग आ तू मेरे मन में, भस्म करूँ खामियाँ स्वयं की, एक- एक कर खोज -खोज कर दुर्बलताएँ दूर करूँ निज। बहुत हो चुका डगमग डगमग अस्थिर मन अस्थिर तन लेकर भटक रहा जो […]

लब खुलें तो सत्य बोलें अन्यथा पट बन्द हों, ईश ऐसी शक्ति देना, भाव में नव छन्द हों । याचना है ईश तुझसे, काम से मतलब मुझे हो, और राहों और बातों से नहीं मतलब […]

पावस बहती आंखों में तुम नीर-सा बनकर आए अविरल बहते रहे हृदय में कितने छाले उभर आए किंकर्तव्यविमूढ़ बने हम तेरा साथ पाकर के जो बन पाने को आतुर थे वह ना हम बन पाए […]

खोजता मन है खिलौना आसमां छत धरा बिछोना गेहूं की बाली सी कोमल और स्वर्ण सी जटाएं बोलती मिश्री हैं मन में काली-काली ये फिजाएं धुंध छाए आसमां पर कौंध बिजली की उठी लिपटकर स्वर्ण […]

आ बैठ पास मेरे ओ याद! भूली बिसरी, आ अश्रु! नैन में आ या मुँह में आ जा मिश्री। बीते पलों की खुशबू तू उड़ कहाँ गई है, ओ मन की लालसा तू धुल कहाँ […]

मन बना पाहन न कारण है पता, तोय के धोए से केवल धुल गया। फिर मरुत से भाप बनकर उड़ गया, राज भीतर का वो भीतर रह गया। यामिनी भीतर ही बैठी रह गयी, दामिनी […]

आजकल सो पा रहा है वह जरा फुटपाथ पर, ठंड कम लगने लगी ठिठुरन हुई कम आजकल। बीते दिन जाड़ों में रोया रात भर सिकुड़ा सा सोया बच गया बस जैसे-तैसे सोच मन में खूब […]

खूब बातें हो गई हैं, अब लगो उत्थान में, देश आशा में लगा है, मत चलो अवसान में। खूब दूजे पर उछाला कीच अब रहने भी दो, एक दूजे को समन्वित बात तुम रखने भी […]

जल, ढूंढते रह जाऐंगे प्यासा कौवा जुगाड़ से, पानी ऊपर ला रहा। जल की कीमत मूक पक्षी, वास्तव में पहचान रहा।। हम मनुष्य दिमाग वाले, व्यर्थ जल बहा रहे। लापरवाही की हद, से भी ऊपर […]

भोजपुरी पूर्वी होली गीत- कान्हा मारे पिचकरिया | कान्हा मारे पिचकरिया ये सखिया बदनवा भिंजेला मोर कन्हईया जी खेले ले होरिया चुनरिया रंगी देले मोर | आवा आवा सब सखिया सुना सब बतिया मोर घेरी […]

इतना मजबूर सा कोई हो तो कैसे आईने शक्ल बदले हर रोज जैसे शायद उम्र का नया सा पड़ाव हो या फिर बीते पल का हिसाब हो नहीं तो राजनीति का झुकाव हो वरना दमदार […]

तुम मेरी भावनाओं का अनुवाद हो तुम मेरी आकांक्षाओं का आकार हो साकार होगा हर स्वप्न मेरा गर तुम जो मेरे साथ हो तुम्हारे स्वप्न मेरे स्वप्नों के बिम्ब हैं तुम हमारे हम तुम्हारे प्रतिबिम्ब […]

असम्भव है तुम्हें परिभाषा के दायरे में बांधना.. तुम हो वो सागर, जिसमें विलीन होता है व्याकुलता का दरिया.. या निष्प्राण मन के भीतर बसी नीरवता को चीर के उपजी स्नेहमय अनुगूँज..!! एक बजंर हृदय […]

फ़ागुन में एक गीत सुनाऊँ, आओ तुम्हे मन-मीत सुनाऊँ। दिल में है जो प्रीत सुनाऊँ साँझ हो चली दीप जलाऊँ। चादर ओढ़े लालिमा की, साँझ सुहानी जाने लगी है। दीपक की रौशन लौ से, एक […]

आज की नारी, सीमित नहीं है घर की चार दिवारी तक। तन से कोमल मन से सशक्त है नारी … निभाए दोहरी ज़िम्मेदारी। शिक्षा, चिकित्सा का क्षेत्र हो, या हो फिर विज्ञान। आज की नारी […]

प्री बोर्ड की परीक्षा का, परिणाम जब आया उसने अपेक्षा से कम ही अंकों को पाया। “क्यों अंक अच्छे नहीं आए हैं तेरे” वह खाता था डाँट पिता से साँझ और सवेरे। रोज़-रोज़ की डाँट […]

सब कुछ सिखा देगा इंटरनेट मगर संस्कार तो घर से ही सीखने होंगे, छोटे बच्चों को खेल लगाना, उनकी चाहत को पहचानना, उनकी भूख-प्यास का अहसास ये सब तो सीखने ही होंगे। बुजुर्गों का अदब, […]

खिल गई है सुबह जाग जा अब पथिक हाथ-मुँह धो ले, न कर आलस अधिक। काम पर लग गई है दुनिया चींटीं से लेकर हाथी तक अपना चुके हैं, मेहनत का पथ। उड़गन भी नित्यकर्म […]

तू टिमटिमा मत चमकते तारे बिना रुके रोशनी दिखा दे, अंधेरा घनघोर सा घिरे जब तू कर उजाला मुझे सिखा दे। चलूँगा कैसे अंधेरी राहें, मुझे तू सारी कला सिखा दे, मनाने प्रीतम को क्या […]

ये गुनगुनाहट कहाँ हुई है जो लेखनी ने बयान की है, जो ध्वनि सुनी थी कभी मुहोब्बत की आज फिर से सुनाई दी है। निगाहों से मिलने को निगाहें पलक झपकते मिला ही दी हैं। […]

पता नहीं कहाँ खो गई, वह छोटी सी प्यारी सी चिरैया। फिर से खेलने, फुदकने को, आँगन में आओ प्यारी गौरैया। किस की बुरी नजर है तुम पर, यह हमको बतलाओ। चीं-चीं चूँ-चूँ करने को, […]

गौरैया, जाने कहाँ उड़ गई तुम अपने मखमली परों में बाँध के वो सुबहें, जो शुरू होती थी तुम्हारी चहचहाहटों के साथ और वो शामें, जब आकाश आच्छादित होता था तुम्हारे घोसलों में लौटने की […]

बाजार में प्रविष्ट करते ही छोटे-छोटे बच्चे पीछे लग जाते थे, बाबू जी दे दो, माताजी दे दो, भैया जी दे दो, दीदी जी दे दो। स्कूल का समय होता लेकिन वे माँग रहे होते। […]

अभिलाषा और ईर्श्या में, रात-दिन सा अंतर जानो तुम। अभिलाषा मजबूत रखो, ईर्श्या से दिल ना जलाओ तुम।। चादर जितने पांव पसारो, पांव अपने ना कटाओ तुम।। अपनी मेहनत से चांद पकड़ो, उसे नीचे ना […]

बिम्ब बनाना चाहता हूँ तेरा आकाश, मगर कहाँ से शुरू करूँ सोच रहा विश्वास। सोच रहा विश्वास, इस कदर विस्तृत है तू आदि अंत का नहीं पता बस विस्तृत है तू। कहे लेखनी भानु, चमकता […]

ख़ामोशी की तह में, छिपा कर रखते हैं हम, अपने सारे ग़म। क्योंकि कर के कोलाहल, दिखाकर दुःख दर्द अपने नहीं मिटेंगे अन्धेरे ज़िन्दगी के। पीना ही पड़ता है, ख़ामोशी का हलाहल ज़िन्दगी के कुछ […]

वो दिन भर मेहनत करते हैं, रात को सड़कों पर शयन करते हैं। ऊपर से पाला पड़ता है, नीचे से शीत लगती है, मेहनतकश की जिंदगी, कठिन गीत लिखती है। सपने में गुनगुनाता है, रोकर […]

जीवन यापन के लिए बहुधा व्यक्ति को वो सब कुछ करना पड़ता है , जिसे उसकी आत्मा सही नहीं समझती, सही नहीं मानती । फिर भी भौतिक प्रगति की दौड़ में स्वयं के विरुद्ध अनैतिक […]

ऐसी सुना दे पंक्तियाँ जो मधुर रस सींच दें, रंग के त्यौहार में रंगीनियों को सींच दें। अश्क सारे सूख जायें होंठ गीले से रहें, नैन में काजल लगा हो खूब नीले से लगें। गाल […]

करो परिश्रम कठिनाई से, जब तक पास तुम्हारे तन है । लहरों से तुम हार मत मानो, ये बात सीखो त जब मँक्षियारा नाव चलाता, विचलित नहीं होता वह विपरित धाराओं से । लाख सुनामी […]

ज़िन्दगी की राहें, सदा कुछ सिखाती ही जाएँ। कुछ लोग हाथ पकड़ कर, काम निकाल, छोड़ दें झटक कर। पकड़ कर राह सच्चाई की, कुछ निभाएँ साथ भी। रंग-बिरंगी दुनिया है यह, रंग सभी दिखलाते […]

कठपुतली तो देखी होगी ना…. हाँ, वही काठ की गुड़िया। जिसकी डोर रहती है सूत्रधार के हाथों में, वह अपनी उँगलियों से जैसे चाहे, उसे नचाता है…. दर्शकों को भी आनन्द आता है। लगता है […]

भोजपुरी देशभक्ति होली गीत – पिया तू फगुनवा मे | काहे नाही आईला पिया तू फगुनवा मे | मनवा लागे नाही ना पिया मोर फगुनवा मे | तू त हउआ फौजी सिमवा ललकारेला | देश […]