सामने बोल भी नहीं पाये आँख हम खोल भी नहीं पाये था वजन बात में भरा कितना उसको हम तोल भी नहीं पाये। आँख चुँधिया गई थी जब अपनी धूल औरों में झोंक कर आये, […]

गरम चाय पीने से ताजगी आती है, तुम्हारे व्यक्तित्व की सादगी भाती है। सवेरा भी जरूर होता है राह दिखाने को अंधेरा भी मिटता है, रात भी जाती है। मेहनत का फल जरूर मिलता है, […]

कैसे जिया जाए यह जीवन नीरस-नीरस लगता जीवन | बह जाती है सांस कहीं तो बह जाती है धड़कन | रूठ जाएं कभी सारे अपने बन जाएं कभी गैर भी अपने | उपजे मन में […]

मैं तुम्हें फिर मिलूंगी किसी टूटे दिल के अनगिनत टुकड़ो में, किसी गरीब की फटी हुई झोली की सच्चाई में, एक कटी पतंग की बेसहारा होती उम्मीदों में मैं तुम्हें फिर मिलूंगी…. कांच के उन […]

विश्वसनीयता *************** आज डायरी के अथाह पन्ने पलटने के बाद मिला मुझे एक ऐसा शब्द जिसके मायने ढूंढने, समझने और समझाने में जमाने गुजर गये विश्वसनीयता’ क्या है ?? किसमें है ?? किस पर है […]

कुछ भ्रांतियां ऐसी जो, हास्यास्पदसी लगती हैं कहावतें भी जीवन का, प्रतिनिधित्व करती हैं ज़मीं पे गिरी मिठाई को, उठाकर नहीं खाना है वो बोले मिट्टी की काया, मिट्टी में मिल जाना है बंदे खाली […]

मुस्कान आपकी खिले फूल जैसी, भुलाने सक्षम है गम हमारे। वाणी में इतना मीठा भरा है, विरोधी भी हो जाते हैं तुम्हारे। चमकता हुआ बल्ब बोलूँ न बोलूँ, मगर इस अंधेरे में हो तुम दुलारे। […]

अब ना ढूंढना कभी मुझे मन के उजालों में अंधकार की ओर बस एक कदम बढ़ा लेना बिखरें हों जहाँ कंटक बेशुमार बस वही पर मेरा निशान मिलेगा… अब ना ढूंढना कभी मोतियों की चादर […]

धर्म आंतरिक जागृति है संवेदना का अहसास है अंतर्मन अगर साफ है मजहब हमेशा पास है शांति संदेश के लिए समूह प्रेम का एकल स्वतंत्र विचार है जीवन सरल सीमित सबका भंडारण के लिए आचार […]

शिशु सुधार की चाह में रहते हर जन खुद चाहे रहा बिकर्षित उनका जीवन ब्यर्थ चिंतित हो उल्झाता जन निज मन धरा अवतरण हेतु सबका अपना कारण स्वभाव अलग हो सबका यह है संभव प्यास […]

कल कल कल कल नदिया बहती है, साफ स्वच्छ है पानी, जी करता है खूब नहा लूँ, मगर डर रही है रानी, मन की रानी का डरना मेरे मन में करता हैरानी। पूछा तो कहती […]

पापा प्लीज फीस जमा करादो छड़ी की मार सहपाठियों में अपमान अब सहन नहीं होता।। मम्मी आज टिफिन में ठंडी रोटी पे नमक-मिर्च पानी लगा मत देना, निरीक्षण है स्कूल में गर्म पंरांठा रख देना।। […]

वही पालकी देश की जनता वही कहार है लोकतन्त्र के नाम पर बदले सिर्फ सवार हैं राज है सिर्फ अंधेरों का उजालों को वनवास है यहाँ तो गांधी के सपनों का उड़ता नित्य उपहास है […]

सत्ता में जाकर जिसे, याद रहे जन दर्द, वही मिटा सकता यहाँ, धूल और सब गर्द, धूल और सब गर्द, पड़ी हो जो विकास में, पहले वो हो साफ, रिआया इसी आस में, कहे लेखनी […]

तुम क्यों कहते हो मुझे कवयित्री हूँ मैं टूटा-फूटा राग हूँ और जोगन हूँ मैं जैसे मीरा लिखती रही भक्ति के पद रोज वैसे मैं लिखती हूँ सदा विरहाग्नि को कर जोड़ विरहाग्नि को कर […]

तू निर्मल है तू निर्भय है , क्या बैठ यहाँ तू सोच रहा। विधि में तेरे लिखा क्या है, तू मानव है कुछ सोच रहा।। ये जीवन है जीते हैं सब, कुछ लोग यहाँ रोते […]

कैसे बन्धु ? कैसे रिश्ते ? कैसा यह संसार कैसा जीवनसाथी भाई ? स्वार्थ पड़े तब प्यार स्वार्थ पड़े तब प्यार किया है यहाँ सभी ने बैरी भी घूमे बन मीत दिल की प्रेम गली […]

शिवरात्रि का भोर भोर जीवन में लाया भाँग- धतूरा चढ़ा के मैंने शिव को मनाया शिव-शंभू हे नाथ ! अरज मेरी सुन लीजे मेरे श्याम की राधा केवल मुझको कीजे मुझको कीजे नाथ बड़ा उपकार […]

हर ओर सत्यम शिवम सुंदरम, हर हृदय में हर-हर हैं। गरल कंठ में धारण कर, वो सरल भोले शंकर हैं व्याघ्र खाल तन पर लपेटे, भस्म-भभूत ललाट पर लगाए डम-डम डमरू बाजे जिनका, वो गिरीश […]

बहुत हो चुकी नफरत की आग जल रहे हैं दिल के जंगल मुहोब्बत कर चुके हैं खाक, अब नहीं रही वैसी धाक जो एक नजर पर चुरा ले जाती थी दिल, अब तो नजरें मिला […]

स्याह काली रात किस तरह हो सितारों से मतलब की बात, कुंडली में अंकित ग्रह नक्षत्र, दिख रहे आकाश में, मगर भाग्य है अवकाश में, फिर भी हूँ आस में, क्योंकि कोई तो है पास […]

आज सोच रहा था कोई कविता लिखू पर कैसे ये सोच ही रहा था की तुम याद आ गयी नयन अदृश्य कामना में लीन हो गए वो संसय वो समपर्ण वो अभिधान(नाम) सब कुछ तो […]

हो गया है उजाला अब मुझे भान हुआ जब खुली आँख तब सुबह का ज्ञान हुआ। इन चहकते हुए उड़गनों ने बताया, जाग जा अब तो तूने अंधेरा है बिताया, हो गई है सुबह साफ […]

अंधेरे का गीत लिखूं या सुबह की आस लिखूं नींद आ-जा रही है, और कुछ खास लिखूं। स्वप्न हैं पास खड़े इंतजार करते हैं, बन्द आँखों में ही, वे राज करते हैं। बात गम की […]

आंखे तेरी सब कह देती है हाले दिल बयां कर जाती है जो कह नही पाते हो जुबान से वही दर्द वो चुपके से बता जाती है संगी बिन जीना कितना मुश्किल दिल का आर्तनाद […]

पतंगे की कहानी:- ********************** शाम हुई लेकर तम को अपने संग आई, नहीं दिखा कुछ भी मुझको तो माचिस ले आई. जला दिया और गुनगुन करके गीत सुनाया तभी उधर से उड़कर एक पतंगा आया […]

Happy International Women’s Day नारी हर घर की शान होती हैं, आज के युग में तो नारी घर के साथ साथ सभी क्षेत्रों में अपना स्थान बना चुकी हैं। महिला समाज एवं परिवार का मुख्य […]

पानी तूने धो दिये, बड़े बड़ों के दाग, तब भी हो पाया नहीं, मेरा मन बेदाग, मेरा मन बेदाग, नहीं कुछ साफ भाव हैं, जूते भीतर कीच, सने गंदले पांव हैं, कहे लेखनी खूब, रही […]

💞Women’s Day Special poetry💞 ************************************ महिलाओं की बात निराली, माँ, भगिनी हो या घरवाली …. इनसे ही संसार बसा है दिल में प्रेम अपार छुपा है…. सुंदर सबका रूप सजीला परिधान है इनका रंग-रंगीला…. ये […]

संसार द्वारा रचित तुम्हारी महानता के प्रतिमान वास्तव में षड्यंत्र हैं तुम्हारे विरुद्ध…!! तुम सदा उलझी रही स्वयं को उन प्रतिमानों के अनुरूप ढालने में और वंचित रही अपने सुखों से..!! सुनो वनिता! जब तक […]

होली के रंगों सी मुस्कुराए, दीवाली के दीपों सी जगमगाए, बेटी बनकर घर महकाती है, बहन बनकर लुटाती है स्नेह बनकर वनिता और वधू दूजे का घर अपनाती है। प्रयत्न करती है,सबको सुख देने का, […]

माझ्यासाठी तो राब राबतोया , अन् उन्हातात तो खपतोया , काट्याकुट्यात ही झटतोया , असा पदर माझ्या माईचा…. जीव तीचा तुट तुट तुटतोया , आपल्या लेकरासाठी तो रडतोया , स्वताःच्या सुखालेही गाडतोया असा पदर माझ्या […]

नारी तू कमजोर नहीं, तुझमें अलोकिक शक्ति है, भूमण्डल पर तुमसे ही, जीवों की होती उत्पत्ति है। प्रकृति की अनमोल मूरत, तू देवी जैसी लगती है, परिवार तुझी से है नारी, तू दिलमें ममता रखती […]

चुप रहना आता नहीं, बोलूँ कैसे बात, चावल पककर बन गया, गीला गीला भात, गीला गीला भात, हर तरफ पानी पानी, सूखे सूखे होंठ, और मन में नादानी, कहे लेखनी बात समझ मन तू जा […]

स्वर्णिम किरणों के रेशमी तार मन सबके मनके जैसे वो हार कितना उसको है मुझसे लाड़ सुर संगीत लिए आता सबके द्वार सुनते हैं ऊज्ज्वलता का श्रोत वहीं श्रृष्टि की सुन्दरता का‌ वो ही रथी […]

यूं ही नहीं मिलता किसी का साथ ये तो जन्मों जन्मों की अधूरी आश खेल कूद कर संगी साथी के संग खबर न हुई कब बड़े हो गए कीमती उनकी यादों के तार ने सूने […]

*एक अंश तुम्हारा मुझमें है, तुम शायद जान नही पाए। हर पल मैं तुममे दिखता हूँ, तुम शायद मान नहीं पाए।।* अब कैसे मैं तुमको दिखलाऊं ये सपना नहीं हकीकत है जीवन का हर एक […]

सुंदरता के प्रति हमारा उन्माद इतना अधिक रहा है कि हमनें तकनीकों का सहारा लेकर हर वस्तु को सुंदर बनाने का भरसक प्रयास किया…!! जबकि हमें बदलनी चाहिए थी अपनी दृष्टि जो रचती है भेद […]

प्रिय 2020 तेरी विदाई में अब क्या शब्द कहूं, हंगामेदार मौजूदगी की बातें किस मुंह से कहूं। कभी सुना और सोचा भी नहीं वो सब घट गया, तेरे काल में कोरोना का भारी आतंक मच […]

हद में रह ज्यादा न बोल फट जाए कहीं जैसे कोई ढोल बड़ा या छोटा समझ तो रख तूं है क्या निज को परख पिता हैं तेरे आंखें न‌ दिखा पुत्र तैयार खड़ा तेरा लौटाने […]

बड़े का नाम बहुत ही है दुनियां में छोटी चीजें पर खुशी का‌ है कारण नन्हीं नन्हीं चिड़िया जमी पर फुदकती हुई कितनों के मन को करती थी हरण आज उनके बिना सुबह सूनी लगती […]

अप्रमेय तथ्य है सदा से ही अविकल्प जीवन में शांति उन्हीं से पर है कायम प्रमाण सदन तो कुंठा से ही भरे हुए जीवन अवसाद का जो सदा बने कारण न्याय नाम से मची है […]

घर आया है रात का पंछी करने लाख सवाल होठों पर अनुपम हिंदी हाथों में है गुलाल। रंग डालेगा शायद मुझको मनसा उसकी लगती है गीली-गीली उसकी आंखें थोड़ा मुझको लगती है। बैठ गया है […]

मेरी नन्ही सी गुड़िया खिलौनों से खेलते खेलते न जाने कब बड़ी हो गई! आज जब देखी उसकी हाथों में चूड़ियां सिर पर लाल चुनर तो समझ में आया। जो आंगन में फुदकती रहती थी, […]

मनु मनु तू दौड़ता रह निरंतर गलत, सही का कर अंतर ठोकरें मिलेंगी अनन्तर गिर, उठ फिर चल निरंतर मनु तू कौशिश कर निरंतर हार जीत में ना कर अंतर मौक़े और मिलेंगे अनन्तर हिम्मत […]

कुछ एहसास हैं जो आकर ठहर गये हैं ज़बान की नोंक पर… होंठो की सीमाएँ लाँघने को आतुर, बस उमड़ पड़ना चाहते हैं एक अंतर्नाद करते हुए…!! मगर उन एहसासों के पैर बंधे हुए हैं […]

आर्यन सिंह की रचना से कुछ चुनिंदा शायरी एंड पक्तियाँ निकाली है जिनसे साफ पता चलता है कि आर्यन का दिल इश्क के समुंदर मे हिलोरें ले रहा है ना जाने कौन हैं आर्यन की […]

मैं दौड़ती ही जा रही थी, ज़िन्दगी की दौड़ में। कुछ अपने छूट गए इसी होड़ में। मैं मिली जब कुछ सपनों से, बिछड़ गई कुछ अपनों से। दौड़ती जा रही थी मैं, किसी मंज़िल […]