अधूरी नज्म

पुरानी सी डायरी के फ़टे पन्ने पर लिखी
अधूरी नज्म हूं मैं
जिसकी खूशबू बरकरार है अभी भी
कई मौसम गुजर जाने के बाद


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8 Comments

  1. Pragya Shukla - September 9, 2020, 3:21 pm

    क्या बात बहुत खूब अंजली
    आती रहा करो आपके आने से सावन हरा-भरा प्रतीत होता है

  2. Geeta kumari - September 9, 2020, 4:17 pm

    बहुत ख़ूब

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 9, 2020, 4:43 pm

    सुंदर

  4. Satish Pandey - September 9, 2020, 11:33 pm

    वाह वाह, भावपूर्ण रचना, काबिलेतारीफ

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