आओ कुछ बेहतर करते हैं..

‘आओ कुछ बेहतर करते हैं..
कुछ बाहर जग की परिधि में,
कुछ अपने भीतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..

ये विकट समय की बेला है,
दरकार नही साधारण की..
है वक्त यही, है यही घड़ी,
हर विपदा के संधारण की..
कुछ तेज़ हवाओं से अब हम,
उत्तर-प्रत्युत्तर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..

मन इक उपजाऊ भूमि है,
सब इसमे बढ़ता जाता है..
जितना भी इसमे उठता है,
उतना ही गढ़ता जाता है..
अपने अंतर की सीमा से,
नफरत को कमतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..

कितना पैसा कितना जीवन,
कितनी इस स्वार्थ की सरहद है..
जिस हद की दुहाई अब तक दी,
लो टूट चुकी वो हर हद है..
क्या सही-गलत का पैमाना,
अब उसमें अंतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..
आओ कुछ बेहतर करते हैं..

– प्रयाग

मायने :
दरकार – आवश्यकता
संधारण – सहन करना
कमतर – कम करना

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