“आओ मनाएं हिंदी दिवस”

हिंदी दिवस:-

चौदह दिसंबर को हर वर्ष
हिंदी दिवस मनाया जाता है
उसी दिन क्यों हिंदी को
सम्मान दिलाया जाता है
हिंदी तो ऐसे ही वाणी है
जो भारतीय परंपरा पर चलती है
देशी हो या विदेशी
हर भाषा को आत्मसात करती है
देवनागरी लिपि की शोभा
हिंदी ही बढ़ाती है
भारत माता के माथे की स्वर्णिम
बिंदी मानी जाती है
यह कवियों की निज वाणी है
इसे समझता भारत का हर प्राणी है
भारत के संविधान में राजभाषा
से सम्मानित है
फिर क्यों नव युवकों द्वारा
यह इतनी अपमानित है
इसे बोलने में आखिर कुछ लोग
क्यों सकुचाते हैं
छब्बीस आखर वाली भाषा बोलकर
इतना क्यों इतराते हैं
हर भाषा को सम्मान दिया है
हमारी प्यारी हिंदी ने
क्षेत्रीय बोलियों को भी मान दिया है
हमारी न्यारी हिंदी ने
तो आओ मनाए हिंदी दिवस
बनाएं हिंदी को जीवन का सार
इसकी गौरव गाथा गाये हर प्राणी
सात समुंदर पार।।

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Responses

  1. हिन्दी दिवस पर बेहतरीन अभिव्यक्ति। कविता में भाषा की सहजता, लय की परिपूर्णता औऱ ,
    ”इसकी गौरव गाथा गाये हर प्राणी
    सात समुंदर पार।।” में आनुप्रासिक छटा विराजमान है।
    बहुत खूब

  2. हिंदी एक गौरवशाली भाषा है।।
    आपकी रचनाओं की एक खासियत यह है प्रज्ञा जी की
    कविता तुकान्त वाली हो या अतुकांत परंतु उसमें एक धुन, लय हमेशा होती है गेयता रख पाना तथा कविता को अलंकृत करना और एक बेस में लिखना सफल रचनाकार की निशानी होती है
    ऐड्वेंचर मिलता है आपकी कविता में हमेशा।
    दोनो कविता बेहतरीन हैं
    👌👌👌👏👏👏

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