आज तूफानों से कह दो

आज तूफानों से कह दो
आप भी पीछे रहो मत,
धूल तो उड़ ही रही है,
आप यूँ शरमाओ मत।
हम हवा के हल्के झोकों
से नहीं घबराते हैं,
यदि स्वयं तूफान आये
तब भी हम भिड़ जाते हैं।
नींद में भी होश रखते हैं,
संभल जाते हैं हम,
आप तूफानों से कह दो,
इस समय जागे हैं हम।


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5 Comments

  1. Chandra Pandey - October 23, 2020, 8:09 pm

    Very very nice poem

  2. Geeta kumari - October 23, 2020, 9:08 pm

    कवि सतीश जी की तूफ़ानों से सामना करने की बहुत ही सुन्दर कविता , परेशानियों में उत्साह वर्धन करती हुई वीर रस से सुसज्जित
    बहुत सुंदर प्रस्तुति

  3. Pragya Shukla - October 23, 2020, 10:16 pm

    Beautiful poem

  4. Piyush Joshi - October 24, 2020, 7:28 am

    बहुत ही सुंदर कविता

  5. MS Lohaghat - October 24, 2020, 7:29 am

    बहुत ही बढ़िया कविता

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