आपको नींद आ गई आधी

आपको नींद आ गई आधी
और हम गीत लिख रहे हैं अब
क्या करें यह कलम भी चंचल है
जागती तब है, सो गए जब सब।
स्वप्न में भी मनुष्य की पीड़ा
भाव को शिल्प को जगाती है
तन अगर चाहता है सोना भी
ये कलम खुद ब खुद लिखाती है।
कुछ न कुछ बात उठा जीवन की
लेखनी नींद उड़ा देती है,
आपके स्वप्न में भी आकर यह
हंसाती और रुला देती है।


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3 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - January 14, 2021, 7:49 am

    वाह वाह बहुत सुंदर

  2. Piyush Joshi - January 14, 2021, 8:21 am

    बहुत खूबसूरत कविता

  3. Geeta kumari - January 14, 2021, 11:38 am

    कवि की कविता लिखने की आदत होती है , कविता लिखे बिना वह रह ही नहीं सकता है। यही भावनाएं प्रस्तुत करी हैं कवि सतीश जी ने अपनी इस रचना में”तन अगर चाहता है सोना भी ये कलम खुद ब खुद लिखाती है।” एक कवि की कवि पर ही आधारित बहुत सुंदर कविता, लाजवाब अभिव्यक्ति

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