आस पलती रही

वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही।
तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही।
फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे।
खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

14 Comments

  1. Sulekha yadav - September 1, 2020, 8:22 pm

    Nice Lines

  2. Satish Pandey - September 1, 2020, 8:24 pm

    वाह, कितनी जबरदस्त प्रतिभा है, अतिसुंदर पंक्तियाँ

  3. Geeta kumari - September 1, 2020, 8:30 pm

    अरे, सतीश जी …. बहुत बहुत आभार सर 🙏
    आपकी समीक्षा सकारात्मकता की और ही ले जाती है।

    • Isha Pandey - September 1, 2020, 8:47 pm

      आपकी कलम से बहुत अच्छा साहित्य सृजन हो रहा है। बहुत बढ़िया लिखती हैं आप

  4. Geeta kumari - September 1, 2020, 8:55 pm

    बहुत बहुत धन्यवाद ईशा जी।
    आप की सुन्दर समीक्षा के लिए हार्दिक आभार

  5. Priya Choudhary - September 1, 2020, 10:18 pm

    बहुत खूब 👏👏

  6. मोहन सिंह मानुष - September 1, 2020, 10:32 pm

    बहुत सुंदर

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 2, 2020, 1:38 pm

    Sunder

  8. Devi Kamla - September 23, 2020, 5:08 pm

    बहुत खूब

  9. Piyush Joshi - September 23, 2020, 5:17 pm

    कमाल की लेखनी

Leave a Reply