कर्म कर तू कर्म कर

कर्म कर
तू कर्म कर
कर्म पथ से ना तू भटक
दिशाएं भले विपरीत हों
बोये पथ में शूल हों
ना तू डर और ना हिचक
कर्म कर तू कर्म कर |

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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