कविता तेरे साथ खड़ी

चिंता त्याग प्रसन्नचित रह
कविता तेरे साथ खड़ी,
पूरी साथ न भी दे पाए
तो भी ताकत बनी खड़ी।

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Responses

  1. कवि जिसे चाह कर भी अपना नहीं बना सके और दूसरा चाह कर भी कवि का न हो सके तो चिंतित संवेदना खुद पर ही हावी होकर जितना साथ निभा सके कविता से ही साथ देने की प्रतिबद्धता है।

  2. साथ ही बेरोजगारी, निराशा से घिरे आम जन को चिंता न करने और कविता के माध्यम से उसकी आवाज उठाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की गई है।

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