कैसे जिया जाए जीवन ??

कैसे जिया जाए यह जीवन
नीरस-नीरस लगता जीवन |

बह जाती है सांस कहीं तो
बह जाती है धड़कन |

रूठ जाएं कभी सारे अपने
बन जाएं कभी गैर भी अपने |

उपजे मन में बछोह के बादल
बरसे आंसू बन नैनन |

कैसे जिया जाए जीवन??
कैसे हो जीवन पावन ??

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Responses

  1. बहुत ही मार्मिक लेखन है
    आपकी कलम सत्य उगलती है तो
    कभी पाठक को इमोशनल कर देती है
    आप विषय के अनुरूप पाठक का
    मस्तिष्क बना देती हैं..

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