गुजारिश

बीते लम्हों की बारिश है ,
इन आंखों से गुजारिश है ,
यह खुली किताब ना बन जाए ,
मुझको रुसवा ना कर जाए
निमिषा सिंघल

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10 Comments

  1. राम नरेशपुरवाला - September 19, 2019, 10:45 am

    Good

  2. देवेश साखरे 'देव' - September 19, 2019, 10:52 am

    Good one

  3. Poonam singh - September 19, 2019, 11:13 am

    Good

  4. NIMISHA SINGHAL - September 29, 2019, 3:06 pm

    धन्यवाद

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