चुभ रहा हूँ दोस्तो

टूट कर चारों तरफ बिखरा हुआ हूँ दोस्तो।
काँच सा तीखा, दिलों में, चुभ रहा हूँ दोस्तो।
फर्क इतना है कि मैं टूटा नहीं हूं खुद ब खुद।
मार कर पत्थर बड़े, रौंधा गया हूँ दोस्तो।


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

20 Comments

  1. Devi Kamla - September 11, 2020, 7:00 pm

    वाह जी वाह पाण्डेय जी

  2. tiwari brother - September 11, 2020, 7:36 pm

    Nice poem

  3. RAVI TIWARI - September 11, 2020, 7:38 pm

    Nice poem

  4. RAVI TIWARI - September 11, 2020, 7:45 pm

    बहुत अछि लगी

  5. Shraddha Forest - September 11, 2020, 8:34 pm

    ह्रदयस्पर्शी..

  6. Geeta kumari - September 11, 2020, 8:40 pm

    एक परेशान व्यक्ति की व्यथा का सटीक चित्रण।
    हृदय स्पर्शी रचना….

    • Satish Pandey - September 11, 2020, 9:28 pm

      इस सुन्दर समीक्षा हेतु बहुत बहुत धन्यवाद।

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 11, 2020, 9:04 pm

    सुंदर

  8. Rishi Kumar - September 11, 2020, 9:08 pm

    🙏✍👌✍👌

  9. Pragya Shukla - September 11, 2020, 10:05 pm

    बहुत सुंदर रचना है

  10. Suman Kumari - September 12, 2020, 6:21 am

    सुन्दर

  11. Subh Tiwari - September 13, 2020, 8:38 am

    बहुत सुन्दर 💐💐💐💐

Leave a Reply