जग दो दिन का डेरा

यह जग दो दिन का फेरा है,
भगवान का घर ही डेरा है।
आज तुम हो यहां कल जाने कहां,
यह जग तो जीवन मरण का मेला है।
भगवान् को भज ले प्राणी,
कुछ नेक कर्म कर प्राणी।
मन में ना सोच बेईमानी,
वरना कुछ भी ना पाएगा।
मरकर सुकून भी ना पाएगा,
अच्छे कर्मों के साथ गया,
तू मोक्षधाम को जाएगा।
बुरे कर्मों का बुरा नतीजा,
वरना कर्मों के फल पाएगा।
निमिषा सिंघल

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10 Comments

  1. Poonam singh - October 31, 2019, 3:50 pm

    Nice one

  2. Kumari Raushani - October 31, 2019, 6:05 pm

    Nice

  3. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 3, 2019, 8:42 pm

    वाह बहुत सुंदर

  4. nitu kandera - November 8, 2019, 10:33 am

    Nice

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