जब छूटेंगे हम तीरों से

कितने भी जुल्म तुम कर लो,
बांध दो कितनी ही जंजीरो से
मिटा देंगे तेरी हस्ती पल भर में
जब छूटेंगे हम तीरों से


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7 Comments

  1. Ajay Amitabh Suman - March 22, 2019, 1:16 pm

    छोटी पर अच्छी रचना

  2. राही अंजाना - March 22, 2019, 1:36 pm

    Wah

  3. देवेश साखरे 'देव' - March 23, 2019, 6:00 pm

    बहुत खूब

  4. महेश गुप्ता जौनपुरी - September 9, 2019, 7:17 pm

    वाह बहुत सुंदर रचना

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