*ज़िन्दगी का काफिला*

ज़िन्दगी की राहों पर,
काफिला चलता गया
जो ठहर गया बिछड़ता गया
सूरज उगता रहा ढलता गया,
मन में कोई ख्वाब पलता गया
किसी की कामयाबी देखकर,
कोई खुश हुआ, कोई जलता गया
बहाने बनाते रहे आप सदा,
काम ज़रूरी था, टलता गया
किसी का साथ दिया वक्त ने,
किसी को वक्त छलता गया

*****✍️गीता


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10 Comments

  1. Anu Singla - November 21, 2020, 12:16 pm

    NICE

  2. Rishi Kumar - November 21, 2020, 12:35 pm

    Very good👍

  3. Pragya Shukla - November 22, 2020, 5:29 pm

    बहुत सुंदर रचना👌👌👌👏👏👏👏👏👏👏

  4. Satish Pandey - November 22, 2020, 9:33 pm

    बहुत खूब, कवि गीता जी की कलम से निकली उम्दा रचना

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 25, 2020, 8:00 am

    अतिसुंदर भाव

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