जीवन सफर

खुशियां कई तरह की
गम भी कई तरह के
जीवन सफर निराला
साथी कई तरह के।
चलते चली है गाड़ी
कोई तो चढ़ रहा है
कोई उतर रहा है
राही कई तरह के।
कोई स्नेह करता
कोई बनाता दूरी
जीवन सफर में दोनों
जीने को हैं जरूरी।
सुई भी काम आती
सब्बल भी जरूरी
सारे महत्त्व के हैं
जीवन में हैं जरूरी ।


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18 Comments

  1. Piyush Joshi - September 27, 2020, 8:26 pm

    बहुत खूब, अतिसुन्दर

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - September 27, 2020, 8:36 pm

    अतिसुंदर

  3. Devi Kamla - September 27, 2020, 8:42 pm

    सुमधुर पंक्तियाँ

  4. Anu Somayajula - September 27, 2020, 10:10 pm

    यही ज़िंदगी की सच्चाई है सतीशजी। सुंदर अभिव्यक्ति।

    सतीशजी बताना चाहूंगी कि मेरा पहला कविता संग्रह नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है। आपकी प्रतिक्रिया और प्रोत्साहन वांछित है।

    https://shop.storymirror.com/%20diary-ke-panne/p/16se70l75kbi4dpyh

    • Satish Pandey - September 27, 2020, 10:19 pm

      स्वागत, सादर नमस्कार। प्रथम काव्य संग्रह की तहे दिल से हार्दिक शुभकामनाएं। आपकी काव्य प्रतिभा निरंतर ऊंचाइयों को छुए यह दुआ करता हूँ।

  5. Geeta kumari - September 28, 2020, 7:16 am

    वाह सर,”कोई तो चढ़ रहा है,कोई उतर रहा है….कोई स्नेह करता कोई बनाता दूरी” जीवन रूपी गाड़ी में चढ़ना ,उतरना और मन में चढ़ना , मन से उतरना दोनों ही अर्थ बहुत ख़ूबसूरती से बताए गए हैं।इतनी सुन्दर कविता आपकी लेखनी की विलक्षण प्रतिभा को दर्शाती है। अद्भुत लेखन

    • Satish Pandey - September 29, 2020, 10:23 pm

      इस सुंदर समीक्षा हेतु आपको हार्दिक धन्यवाद। यह समीक्षा प्रेरक और उत्साहवर्धक है। सादर अभिवादन।

  6. Ramesh Joshi - September 28, 2020, 5:54 pm

    वाह वाह बहुत खूब

  7. Kamal Pandey - September 28, 2020, 10:02 pm

    बुहत ही शानदार …………

  8. MS Lohaghat - September 30, 2020, 8:06 am

    बहुत बढ़िया

  9. Ramesh Joshi - September 30, 2020, 8:15 am

    बहुत खूब सर

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