दिल रोंक लेता है

रोज सोचते यही है उनसे
तोड़ देंगे सारे नाते

याद में उनकी नहीं कटेगी
रो-रोकर मेरी रातें

फ़ैसला जब करते हैं
हम दिल रोक लेता है

मेरी आँखों से बहे समंदर
घुटती हूं अंदर ही अंदर

दर्द है जब हद से बढ़ जाता
दिल रोक लेता है

Comments

13 responses to “दिल रोंक लेता है”

  1. मार्मिक रचना

    1. Priya Choudhary

      Good

  2. मार्मिक अभिव्यक्ति की

  3. ह्रदयस्पर्शी

  4. Pratima chaudhary

    हृदय को छू लेने वाली पंक्तियां

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