बस यादों में रह जाते हैं

जाने कहाँ विलीन
हो जाते हैं,
कल तक जो बोलते थे,
मुस्कुराते थे
अपनी भावना को व्यक्त
करते थे वे,
जाने क्यों माटी हो जाते हैं।
शून्य हो जाते हैं।
न कोई अहसास
न कोई वेदना,
बस निर्जीव हो जाते हैं।
पंचतत्व में मिल जाते हैं,
धुंए में उड़ जाते हैं,
जल में मिल जाते हैं
बस यादों में रह जाते हैं।
जाने कहाँ चले जाते हैं।


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10 Comments

  1. Praduman Amit - December 19, 2020, 7:16 pm

    बहुत ही सुन्दर रचना प्रस्तुत किया है आपने। आपको मेरी ओर से बहुत धन्यवाद।

  2. Chandra Pandey - December 19, 2020, 7:36 pm

    बहुत ही खूबसूरत कविता लिखी है आपने सर

  3. Devi Kamla - December 19, 2020, 8:00 pm

    अत्यंत गहरी कविता

  4. Geeta kumari - December 19, 2020, 8:23 pm

    इस दुनियां से जाने के बाद आए जब अपनों की याद तो यही एहसास होता है ।बहुत ही संजीदा रचना

    • Satish Pandey - December 28, 2020, 10:15 pm

      सुन्दर समीक्षा हेतु सादर आभार

  5. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - December 20, 2020, 8:13 am

    अतिसुंदर भाव

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