बेटी की फ़रियाद

सारा घर दे देना पापा
कोना एक बचाए रखना।
हाथों को हाथ सौंपने देना
उंगली एक छिपाए रखना

यादों की बगिया में घर की
एक छोटा फूल नाम का मेरे
पानी देना- ना देना
थोड़ी धूप दिखाए रखना
सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना

माना परिवर्तन होगा भईया
हो जाए तो होने देना
हां मेरे हिस्से का प्यार सदा
दराजों में बनाए रखना।

जाएंगे सब आगे बढ़कर
मुझको भी तो जाना होगा
बीते शामों की झालर में
दीपक एक सजाए रखना।

सारा घर दे देना पापा कोना एक बचाए रखना

Published in हिन्दी-उर्दू कविता

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