भुला न पाओगे

भुला के देख लो
चुनौतियां हैं तुम्हें,
न भुला पाओगे,
करोगे याद, अच्छाई से
या बुराई से,
मगर भुला न पाओगे।
करोगे याद नफरत से
या मुहोब्बत से,
याद तो आयेंगे हम
आयें भले ही जिस तरह से।
फेर के देख लो
नजरों को हमसे दूर तुम
मगर फिर फिर हमारी ओर
देखोगे न तुम रह पाओगे।
भुला के देख लो
चुनौतियां हैं तुम्हें,
न भुला पाओगे,
करोगे याद, अच्छाई से
या बुराई से,
मगर भुला न पाओगे।

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Responses

  1. कवि सतीश जी की ये कविता बहुत ही सुंदर भावभिव्यंजना लिए हुए है ।किसी को किसी के ना भुलाने और हमेशा ही याद आने की बात कही गई है । जो कि कवि के कोमल हृदय की भावनाओं को दर्शाती है सुंदर शिल्प और सुन्दर लय बद्ध शैली कविता के प्रस्तुतीकरण में चार चांद लगा रही हैं बहुत उम्दा रचना ।

    1. आपकी समीक्षा शक्ति अद्भुत है, यह बेहतरीन टिप्पणी प्रेरणादायी और मार्गदर्शक है। बहुत बहुत आभार गीता जी।

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