मंद आदत त्याग दो

चाँद देखो, चाँद की
शीतल छटा का लाभ लो।
दाग-धब्बे खोजने की
मंद आदत त्याग दो।
इंसान में कमियां भी होंगी
और अच्छाई भी होगी
बस कमी ही खोजने की
मंद आदत त्याग दो।
हो सके तो गोंद बन
टूटे दिलों को जोड़ दो,
टूटे हुए को तोड़ने की
मंद आदत त्याग दो।
राह में कोई मुसाफिर
यदि पड़ा हो कष्ट में
दो उसे थोड़ी मदद
नजरें चुराना त्याग दो।
चाँद देखो, चाँद की
शीतल छटा का लाभ लो।
दाग-धब्बे खोजने की
मंद आदत त्याग दो।


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8 Comments

  1. Devi Kamla - October 4, 2020, 8:17 am

    वाह पाण्डेय जी, बहुत खूब

  2. Ramesh Joshi - October 4, 2020, 8:23 am

    वाह वाह क्या बात है सर

  3. Geeta kumari - October 4, 2020, 8:53 am

    अच्छाई और कमियां तो सभी में ही होती है। इस बात को दर्शाने की सुंदर प्रस्तुति. बहुत सुंदर भाव..

  4. Harish Joshi - October 4, 2020, 11:23 am

    बहुत ही सुन्दर पंक्तियां, सुंदर सलाह।

  5. MS Lohaghat - October 4, 2020, 12:44 pm

    बेहतरीन कविता, बहुत बढ़िया

  6. Pragya Shukla - October 4, 2020, 12:46 pm

    अच्छे शब्दों का प्रयोग

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 4, 2020, 1:32 pm

    अतिसुंदर भाव

  8. Saurav Tiwari - October 6, 2020, 9:35 pm

    Bhot khub chacha ji🖤

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