मगर अभिमान मत करना

जरा सी भी तुम्हें
असली खुशी
गर आज मिल जाये।
पकड़ कर कैद कर लेना
मगर अभिमान मत करना,
उग रहा हो अगर सूरज
तो उगने दो, उगेगा ही,
उसे तुम देख गुस्से से
नयन कमजोर मत करना।


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13 Comments

  1. Piyush Joshi - October 11, 2020, 8:03 am

    वाह वाह सर, बहुत खूब

  2. Deepak Kumar - October 11, 2020, 8:14 am

    बेहतरीन सर👌👍👍

  3. Devi Kamla - October 11, 2020, 9:34 am

    अतिसुन्दर

  4. harish pandey - October 11, 2020, 9:46 am

    बहुत सुंदर लाजवाब👌👌

  5. Geeta kumari - October 11, 2020, 9:56 am

    कवि सतीश जी ने अपनी कविता के माध्यम से बहुत ही सुन्दर सन्देश दिया है कि प्रगति की राह पर चलते चलते ऊंचाइयों पर पहुंचने पर अभिमान नहीं करना है क्योंकि फलों से लदा हुआ वृक्ष हमेशा झुका हुआ ही होता है और सीधे तने हुए तो ठूंठ ही होते हैं । बहुत सुंदर प्रस्तुति ।अभिवादन सर

  6. Rishi Kumar - October 11, 2020, 10:36 am

    🤔❤🙂👌✍✍✍

  7. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - October 11, 2020, 11:45 am

    अतिसुंदर भाव

  8. Pragya Shukla - October 11, 2020, 12:16 pm

    बहुत सुंदर कविता

  9. Harish Joshi - October 11, 2020, 12:43 pm

    बहुत सुंदर।

  10. Chandra Pandey - October 12, 2020, 7:13 am

    Nice, very nice, wow

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