मानवता नि:शब्द

आज कुदरत भी शर्माया होगा,
मानव रूपी दानव जो बनाया l
विनायकी नहीं, मानवता ने दम तोड़ा l
मानवता का रूह सिहर उठा,
मानव द्वारा मानवता का चीर हरण हुआ l
मासूमों पर क्रूरता प्रमाण हुआ,
मानवता नि:शब्द…..
दोबारा निर्भया जैसी क्रूरता रची गई,
बहरुपी मानव की नींव हिलाई l
खाने में भयंकर पीड़ा परोसी,
नन्हे जान की भी नहीं सोची l
इस बर्बरता ने मानव चरित्र दर्शायी,
कुदरत सहम उठी l
मानवता नि:शब्द…..


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4 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - June 5, 2020, 11:55 am

    मार्मिक चित्रण

  2. Pragya Shukla - June 5, 2020, 1:38 pm

    👏👏

  3. Panna - June 6, 2020, 12:44 pm

    nice

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