मुक्तक

तेरा ख्वाब पलकों में पुराना नहीं होता!

तेरे बगैर मेरा मुस्कुराना नहीं होता!

मिल जाती मंजूरे-नजर मुझको जो तेरी,

दर्द का यूँ जिन्दगी में आना न होता!

 

Composed by महादेव

 

Related Articles

नज़र ..

प्रेम  होता  दिलों  से  है फंसती  नज़र , एक तुम्हारी नज़र , एक हमारी नज़र, जब तुम आई नज़र , जब मैं आया नज़र, फिर…

बारिश

बारिश से कहो यूं न आया करे मुझे तेरा उनके बगैर आना अच्छा नहीं लगता तूने आने से पहले दस्तक तो दी थी सर्द मौसम…

Responses

New Report

Close