“मुलाकात रहने दो”

“मुलाकात रहने दो”

ღღ_आज ना ही आओ मिलने, ये मुलाकात रहने दो;
कुछ देर को मुझको, आज मेरे ही साथ रहने दो!
.
अन्धेरों की, उजालों की, हवाओं की, चिरागों की;
या अपनी ही कोई बात छेड़ो, मेरी बात रहने दो!
.
मैं सोया कि नहीं सोया, मैं रोया कि नहीं रोया;
और भी काम हैं तुमको, ये तहकीकात रहने दो!
.
यूँ तो सैकड़ों रात जागा हूँ, तुम्हारे ही ख्यालों में;
पर सोना चाहता हूँ अब, आज की रात रहने दो!
.
जाते-जाते ‘अक्स’, मेरा इक मशविरा है तुमको;
कि इश्क़ करो तो बे-हद, यूँ एहतियात रहने दो!!…#अक्स
.


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

A CA student by studies, A poet by passion, A teacher by hobby and a guide by nature. Simply I am, what I am !! :- "AkS"

Related Posts

मेरे भय्या

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

लंबी इमारतों से भी बढकर, कचरे की चोटी हो जाती है

तकदीर का क्या, वो कब किसकी सगी हुई है।

2 Comments

  1. प्रतिमा चौधरी - September 2, 2020, 3:34 am

    वाह

Leave a Reply