मैं अपनी याद ..

‘मैं अपनी याद तेरे दामन से समेट लूँ तो मगर,
तेरे हिस्से की कोई खुशी न साथ आ जाए..’

– प्रयाग

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ठान लूँ गर

ठान लूँ गर मैं तो कुछ भी कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं तो असंभव भी संभव कर सकती हूँ ठान लूँ गर मैं…

Responses

    1. जी दोनो हो सकते हैं लेकिन दरअसल ये मेरी एक ग़ज़ल का शेर है जिसका मीटर ‘समेट लूँ तो मगर’ पर आकर राइम होता है इसलिए वही का वही यहाँ पोस्ट किया है ।

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