मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं।

मैं तेरी मुस्कान चाहती हूं,
तेरा हर अरमान चाहती हूं।
तू उड़ सके आजाद,
यह पैगाम चाहती हूं।
फिरे तू हर उन गलियों से,
जो गुजरती हो बुलंद नगरों से।
बीच में तू रुके ना तू,
कभी झुके ना तू ,
बस तेरी जीत हो ,
ये एहसास चाहती हूं।
मैं बस तेरी मुस्कान चाहती हूं।

Related Articles

जंगे आज़ादी (आजादी की ७०वी वर्षगाँठ के शुभ अवसर पर राष्ट्र को समर्पित)

वर्ष सैकड़ों बीत गये, आज़ादी हमको मिली नहीं लाखों शहीद कुर्बान हुए, आज़ादी हमको मिली नहीं भारत जननी स्वर्ण भूमि पर, बर्बर अत्याचार हुये माता…

Responses

  1. एक मां के अपनी बेटी के प्रति प्रेम भावना और अभिलाषा को बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया गया है बहुत उम्दा

New Report

Close