विनती

हे घनश्याम गोपाल मुरारी।
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

दीनबंधु करुणा के सागर।
भगतबच्छल प्रभु आरतहर।।
जगतपति जगतारनहारी,
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी।।

तेरी कृपा बरस रही निश-दिन।
बाहर-भीतर किनमिन किनमिन।।
दो बूंद का चातक ‘विनयबिहारी’,
मेरी सुधि लो गिरिवरधारी ।।

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10 Comments

  1. NIMISHA SINGHAL - October 20, 2019, 9:14 pm

    Shri Krishna Govind hare Murari hai naath Narayan Vasudev

    • Astrology class - October 21, 2019, 7:33 am

      सुत पितु बन्धु सखा हमारे हे नाथ नारायण वासुदेव

  2. देवेश साखरे 'देव' - October 21, 2019, 12:55 am

    बहुत सुन्दर

  3. Kumari Raushani - October 21, 2019, 4:27 am

    राधे राधे

  4. राम नरेशपुरवाला - October 21, 2019, 8:03 am

    Jai radha krishna

  5. nitu kandera - October 21, 2019, 4:15 pm

    Good

  6. Poonam singh - October 21, 2019, 10:12 pm

    Good

  7. महेश गुप्ता जौनपुरी - October 25, 2019, 5:16 pm

    वाह बहुत सुंदर

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