विपक्ष की राजनीति

विपक्ष की गंदी राजनीति, हक से बेशक करो।
सैन्य बल कि शौर्यता पर, नाहक ना शक करो।

जो तुम निशस्त्र वीरों को ज्ञान बाँट रहे।
तुम्हारे पूर्वजों का बोया ही वह काट रहे।
हाथ अब बंधे नहीं, आदेश की प्रतीक्षा नहीं,
विजय तिलक से सजता अब ललाट रहे।
वीरों की वीरता पर प्रश्न खड़े करने वालों को,
उत्तर मिल जाए, विध्वंस इतना विनाशक करो।
सैन्य बल कि शौर्यता पर, नाहक ना शक करो।
विपक्ष की गंदी राजनीति, हक से बेशक करो।

तुम्हारी कथनी-करनी मेल नहीं खाती है।
झूठ और बस झूठ ही तुम्हारी थाती है।
ज्ञात हमें, इसमें दोष कुछ तुम्हारा नहीं,
शिशु वही सीखता, जो माँ उसे सिखाती है।
इस विकट परिस्थिति में, पक्ष-विपक्ष भूलाकर,
सेना का मनोबल बढ़े, बात ऐसी उद्देशक करो।
सैन्य बल कि शौर्यता पर, नाहक ना शक करो।
विपक्ष की गंदी राजनीति, हक से बेशक करो।

वीरों की शहादत पर सियासत, कुछ तो शर्म करो।
स्वयं पर गर्व हो, देशहित में कुछ ऐसा कर्म करो।।

देवेश साखरे ‘देव’

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Responses

  1. ताली एक हाथ से नहीं बजती।और हम भी आपकी बात से सहमत हैं

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