श्राद्ध का अर्थ

श्रद्धा से जो किया अर्पण,
सम्मान से खिलाया।
सच्चे अर्थों में वह ही,
श्राद्ध कर्म कहलाया
जीते जी ही दो मान,
पूरा दो उन्हे सम्मान
इच्छाएं पूरी कर दो,
खुशियों से दामन भर दो।
बाद मरने किसने खाया,
सिर्फ मन को था समझाया।
सोच सोच कर वह सब बनाया,
क्या-क्या था उनको पसंद!!
वह पंडित जी को खिलाया।
निमिषा सिंघल

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12 Comments

  1. Kumari Raushani - October 31, 2019, 5:15 am

    सत्य

  2. nitu kandera - October 31, 2019, 7:17 am

    Wah

  3. देवेश साखरे 'देव' - October 31, 2019, 8:18 am

    सत्य कहा

  4. Poonam singh - October 31, 2019, 3:54 pm

    Sahi kaha

  5. महेश गुप्ता जौनपुरी - November 3, 2019, 8:42 pm

    वाह बहुत सुंदर

  6. nitu kandera - November 8, 2019, 10:33 am

    Nice

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