*संघर्ष*

जीवन रण है संघर्ष भरा,
अनगिनत शूल पथ में बिखरे,
मेहनत परिश्रम अथक प्रयास,
कंटक प्रसून बनकर निखरे।
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महामारी काल संघर्ष पूर्ण,
कितने कुलदीपक काल ग्रास बने,
सांसों की डोर पड़ी कमजोर,
आजीविका संसाधन सब छूटे।
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तिनके से उजड़े घर उपवन,
किलकारियों की जगह सन्नाटा पसरा,
नियम पालन बचाव बने संजीवनी,
सामान्य हुई परिस्थितियां जनजीवन सुधरा।
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बाधाएं विकट चाहे कितनी आएं,
विश्वास दीप ना बुझने दें,
संकट में संबल हो प्रगाढ़,
दृढ़ संकल्प अंतस उजास कर दे।
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धैर्य साहस लगन से लक्ष्य भेदना,
सदा सत्यपथ अग्रसर करना,
त्रिलोक स्वामी बनकर सहारा,
नैया भवसागर पार करा देना।

स्वरचित मौलिक रचना
✍️… अमिता गुप्ता
कानपुर,उत्तर प्रदेश

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  1. तिनके से उजड़े घर उपवन,
    किलकारियों की जगह सन्नाटा पसरा,
    नियम पालन बचाव बने संजीवनी,
    सामान्य हुई परिस्थितियां जनजीवन सुधरा।

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