सच्चा साथी

सच्चा साथी वही है,
जो दुःख में भी साथ दे।
हृदय में हो जब संताप,
हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
अमावस सी काली रातों को,
जो बना दे चाॅंद रात।
ह्रदय में जब शूल चुभें,
वो फूल खिला दे मन..
“मैं हूँ ना” कहकर,
मिटा दे सारे ग़म।
____✍गीता


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11 Comments

  1. Chandra Pandey - April 7, 2021, 9:32 am

    अति सुंदर रचना

    • Geeta kumari - April 7, 2021, 1:51 pm

      बहुत-बहुत धन्यवाद चंद्रा जी हार्दिक आभार मैम

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 7, 2021, 3:24 pm

    बहुत खूब

  3. Seema Chaudhary - April 7, 2021, 9:41 pm

    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।
    **
    वाह बहुत खूब ,गीता जी की बहुत सुंदर कविता

    • Geeta kumari - April 8, 2021, 12:58 pm

      उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद सीमा जी

  4. Satish Pandey - April 7, 2021, 10:05 pm

    ह्रदय में जब शूल चुभें,
    वो फूल खिला दे मन..
    “मैं हूँ ना” कहकर,
    मिटा दे सारे ग़म।
    — वाह अतिसुन्दर रचना। बहुत खूब

    • Geeta kumari - April 8, 2021, 12:59 pm

      उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत बहुत धन्यवाद सतीश जी अभिवादन सर

  5. Pragya Shukla - April 7, 2021, 10:37 pm

    सच्चा साथी वही है,
    जो दुःख में भी साथ दे।
    हृदय में हो जब संताप,
    हाथ बढ़ाकर हाथ दे।
    अमावस सी काली रातों को,
    जो बना दे चाॅंद रात।

    सच्ची मित्रता को परिभाषित करती रचना

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