सदा मस्तक रहे ऊँचा

उठो जागो उठो जागो
करो इस मुल्क को रोशन
जगा लो देश का यौवन,
लगा दो आज निज तन मन।
सदा मस्तक रहे ऊंचा,
नहीं हो देखना नीचा,
हमारा देश यह भारत,
रहे ऊंचा सदा ऊंचा।
अहित कुछ भी न कर पायें
हमारा देश के दुश्मन
उठा लें अब खड़क को हम
मसल दें दुश्मनों को हम।
करें प्रयास सारे मिल,
बुराई दूर कर दें सब,
हर तरफ हो सुहाना कल,
सुहाना कल सुहाने पल।


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7 Comments

  1. Devi Kamla - April 7, 2021, 10:56 pm

    वाह सर, बहुत सुंदर काव्य सौंदर्य है। ” मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन” वाचिक भार युक्त ‘विजात छन्द’ की अद्भुत रचना है सर। आपकी लेखनी कमाल है।

  2. Rishi Kumar - April 7, 2021, 11:30 pm

    सुन्दर रचना

  3. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 8, 2021, 9:21 am

    वाह वाह बहुत सुंदर भाव

  4. Deepa Sharma - April 8, 2021, 12:20 pm

    देशभक्ति पर कवि सतीश पाण्डेय जी की बहुत सुन्दर कविता

  5. Geeta kumari - April 8, 2021, 4:17 pm

    उठा लें अब खड़क को हम
    मसल दें दुश्मनों को हम।
    करें प्रयास सारे मिल,
    बुराई दूर कर दें सब,
    हर तरफ हो सुहाना कल,
    सुहाना कल सुहाने पल।
    _____________ देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत और वीर रस से सुसज्जित कवि सतीश जी की बेहद शानदार रचना । कमाल का लेखन “विजात छंद” में एक अनुपम रचना, वाह!

  6. Arvind Kumar - April 8, 2021, 7:06 pm

    देशभक्ति पर कवि पाण्डेय जी की बहुत सुंदर कविता, जय हिंद

  7. Pragya Shukla - April 8, 2021, 11:01 pm

    ATI Sundar

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