सावन बीता जाये।

सावन बीता जाये
प्रियतम तुम न आये।

मस्त पवन संग डोले किसलय
ताल – तलैया, सागर में लय,
बादल नभ पर छाये
प्रियतम तुम न आये।

कलियों पर है छायी लाली
झूमे बेसुध कोमल डाली,
मधुकर तान सुनाये
प्रियतम तुम न आये।

चूमें धरती चंचल – किरणें
महकी हवा लगी मन हरने,
रुत आये रुत जाये
प्रिमतम तुम न आये।

सावन की ये काली रातें
गरजे घटा घोर बरसातें,
विरह बहुत तड़पाये
प्रियतम तुम न आये।

सूना आँगन , सूने झूले
जा परदेश पिया तुम भूले,
कजरा बह- बह जाये
प्रियतम तुम न आये।

अनिल मिश्र प्रहरी।


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16 Comments

  1. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - November 20, 2019, 5:53 pm

    Nice

  2. Poonam singh - November 20, 2019, 6:00 pm

    Sundar

  3. देवेश साखरे 'देव' - November 20, 2019, 6:05 pm

    बहुत सुन्दर

  4. NIMISHA SINGHAL - November 20, 2019, 6:13 pm

    Nice

  5. राही अंजाना - November 20, 2019, 6:59 pm

    वाः

  6. nitu kandera - November 20, 2019, 10:16 pm

    Nice

  7. राही अंजाना - November 21, 2019, 8:24 pm

    2आह

  8. Abhishek kumar - November 23, 2019, 10:22 pm

    वाह

  9. Anil Kumar mishra - November 26, 2019, 2:19 pm

    thanks

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