“साहित्य है समाज का दर्पण”

स्वयं को निखारना पड़ेगा
अभी और अग्नि में तपना पड़ेगा
ऐ लेखनी ! अभी तो तुझे
दूर तक जाना है
पाठक के हृदय में उतरना पड़ेगा
इस जिन्दगी के सफर में
कोई तो हो आधार
जिसको अपनी माला में
पिरोना पड़ेगा
साहित्य है समाज का दर्पण’
इसे तो पारदर्शी करना पड़ेगा….


लगातार अपडेट रहने के लिए सावन से फ़ेसबुक, ट्विटर, इन्स्टाग्राम, पिन्टरेस्ट पर जुड़े| 

यदि आपको सावन पर किसी भी प्रकार की समस्या आती है तो हमें हमारे फ़ेसबुक पेज पर सूचित करें|

15 Comments

  1. Geeta kumari - April 5, 2021, 8:45 pm

    साहित्य है समाज का दर्पण’
    इसे तो पारदर्शी करना पड़ेगा….
    _____बेशक साहित्य समाज का दर्पण ही है, कवि प्रज्ञा जी की अति उत्तम प्रस्तुति

  2. Pt, vinay shastri 'vinaychand' - April 6, 2021, 8:27 am

    वाह वाह बहुत सुंदर अभिव्यक्ति

  3. vivek singhal - April 6, 2021, 11:06 am

    स्वयं को निखारना पड़ेगा
    अभी और अग्नि में तपना पड़ेगा
    ऐ लेखनी ! अभी तो तुझे
    दूर तक जाना है
    पाठक के हृदय में उतरना पड़ेगा
    इस जिन्दगी के सफर में
    कोई तो हो आधार
    जिसको अपनी माला में
    पिरोना पड़ेगा…

    स्वयं की कमियों को दूरकर और निखारने तथा उच्चकोटि का साहित्य लिखने को प्रेरित करती हुई रचना

  4. Rj sid - April 6, 2021, 11:23 am

    साहित्य को समर्पित कवि प्रज्ञा जी की बहुत सुंदर रचना

  5. neelam singh - April 6, 2021, 11:30 am

    वाह बहुत खूब

  6. jeet rastogi - April 6, 2021, 9:09 pm

    साहित्य है समाज का दर्पण

    वाह सच कहा
    बहुत खूब

  7. Ajay Shukla - April 9, 2021, 9:59 am

    बहुत खूब लिखा है आपने

Leave a Reply