फ़िर से दिल में हमारे कोई और घर करके गया।
इश्क़ जिंदगी बर्बाद करने का ज़रिया था करके गया।
हांफते नहीं तो क्या करते हम।
इस कदर दौड़े कि ज़िस्म ख़ुद पैरों से डर गया।
तलाशा मगर आज तक मिला नहीं।
पता नहीं परिंदा घोंसला छोड़कर किधर गया।
और मन तो था जिधर से तुम गुजरो उस रास्ते पर लेट जाए।
मगर मंजिल अलग थी तुम्हारें दिल की वह उधर गया।
तुम जिंदा को जिंदा कहोगे तो पाप लगेगा तुम्हें।
कोई पूछे तो कहना कुछ सालों पहले वह मर गया।
तुम्हारे तो सिर्फ़ हाथों की मेहंदी ही छूटी है बिछड़ने के बाद।
हमारा तो चेहरे का रंग भी उतर गया।
एक लाइलाज बीमारी हो गई थी हमें कुछ सालों से।
जिसने भी सुना उसकी आँखों में पानी भर गया।
और बेहतर तो हम भी थे हजार फरिश्तों से।
मग़र लोग कहते है कोई सदमा हमें पागल कर गया।
समन्दर नहीं आया था किसी से कुछ मांगने।
ये तो नदियों का पानी ही उस तरफ बहकर गया।
और कौन सा हम उसके जहां थे जो हमसे कुछ लेकर गया।
बस मुसाफ़िर था दिल ए आशियाने का कुछ दिन रह कर गया।
और खुश रहो तुम इस जहां के आख़िरी मुक़ाम तक।
एक फ़कीर आया था कल यहीं दुआ देकर गया।
#आजादख़्याल किरण
फ़िर से दिल में हमारे कोई और घर करके गया।

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