3 Comments

  1. सरिता की धार जैसी,
    पृथ्वी के धैर्य जैसा
    मेरा पहचान हो ऐसी
    ऐसा मुझे वरदान दो,
    वरदान दो….
    ___बहुत सुन्दर पंक्तियां हैं कवि ऋषि जी की , सम्पूर्ण कविता ही बहुत उत्कृष्ट भाव लिए हुए है । प्रभु से वरदान मांगती हुई बहुत बहुत उम्दा रचना । वरदान अवश्य मिलेगा, बहुत लाजवाब प्रस्तुति

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