मुस्कान आपकी
खिले फूल जैसी,
भुलाने सक्षम है
गम हमारे।
वाणी में इतना
मीठा भरा है,
विरोधी भी हो
जाते हैं तुम्हारे।
चमकता हुआ बल्ब
बोलूँ न बोलूँ,
मगर इस अंधेरे में
हो तुम दुलारे।
निराशा के कुएं में
पड़ने लगे थे
मगर तुमने आकर
किये नौ सहारे।
मुस्कान आपकी
Comments
8 responses to “मुस्कान आपकी”
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बहुत बढ़िया वाह
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बहुत सुंदर रचना
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वाह
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अति उत्तम रचना
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मुस्कान आपकी
खिले फूल जैसी,
भुलाने सक्षम है
गम हमारे।
______कवि की कोमल भावनाओं की खूबसूरत प्रस्तुति, सुन्दर शिल्प और भाव लिए हुए बहुत सुंदर कविता -

बहुत ख़ूब, अति उत्तम
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JAY ram jee ki
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Beautifully craft
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