गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में देश था बिलकुल सड़ गया | तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा, जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया | कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे, […]
गुलामी की धांस में अत्याचारों की बांस में देश था बिलकुल सड़ गया | तब उठ खड़ा हुआ एक अहिंसक योद्धा, जो लाठी लिए फिरंगी से लड़ गया | कुचलता हुआ अंग्रेजी सरकार के इरादे, […]
सितंबर महीने में जुलाई की बारिश, यूं तो मनभावन लगती है बारिश, पर उन लोगों का क्या ! खोया है जिन्होंने अपनों को! क्या है ईश्वर तेरी लीला! पल में चमन था जो पल में […]
सागर किनारे रेत पर फेरी उँगलियाँ, देखा जो गौर से बन गई तस्वीर तेरी। ख्वाब से हकीकत में ले आई मुझे, एक लहर बहा ले गई तक़दीर मेरी।
मेरे बापू गांधी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को […]
गांधी नहीं सिर्फ नाम है, वो देश का मान है नोटों पर देख तस्वीर, ना सोचो खास इंसान है वो हममें से ही आने वाला बिल्कुल आम इंसान है सिर्फ और सिर्फ भारत में ही, […]
कारण जिसके हर हिंदवासी, आजाद हवा में रहता है कारण जिसके आज विदेश में, सर उठा के भारत चलता है उस मां भारत के वीर पुत्र को, श्रद्धा सुमन चढ़ाने आया हूं मै उस आंधी […]
हर साल मेरी पुस्तक (हिंदी)मे, पाठ महात्मा गाँधी का होता है, बापू का व्यक्तित्व याद है पर, असल जिंदगी मे कोई असर नहीं इसका होता आता है | बापू फिर से आकर, देश बचा लो, […]
मेरी कलम , जिससे कुछ ऐसा लिखूँ के शब्दों में छुपे एहसास को कागज़ पे उतार पाऊँ और मरने के बाद भी अपनी कविता से पहचाना जाऊँ मुझे शौक नहीं मशहूर होने का बस इतनी […]
मेरे बापू गांधीजी दयावान मृदु भाषी बापू का स्वभाव था सत्य अहिंसा मेरे बापू का हथियार था राष्ट्रवादी शांतिप्रिय बापू का उपदेश था हिंदुस्तान के मर्यादा का बापू को ज्ञान था गर्व था देशवासियों को […]
प्रेयसी — तुम्हे मै प्यार करू या ना करू, ये है मेरी मर्ज़ी | तुम्हे मुझसे प्यार है तो, सिर्फ लगा सकते हो अर्जी | प्रेमी — सच्चा प्यार करता हूँ तुमसे, नहीं आशिक हूँ […]
तुम्हे हमसे प्यार नहीं, झूठ बोलकर ये दग़ा ना दो | गलतियां सबसे होती है, अलग होने की ये सज़ा ना दो |
दूर कर दोगे हमको खुद से, हमसे दूर खुद हो जाओगे | खुद का चेहरा देखोगे आईने मे, तो हमारा ही अक्स पाओगे |
कांटो से लगे ज़ख्म तो सब भरते चले गए थे ‘ऐ-नीरज’ हैरत तो तब हुई जब इक फूल का स्पर्श नासूर बन गया !!
Kaanto Se Lage Jakhm Toh sab Bharte Chale Gaye The ‘ai-neeraj’ Hairat Toh Tab Huyi Jab Ik Phool Ka Sparsh Nasoor Ban Gaya !!
मानते हो सब नारी का सम्मान हो, फिर भी, इनका ये हाल क्यों? चढ़ती हैं भेंट हर युग में नारी ही क्यों ? राम ने त्यागा सीता को, हुई चीरहरण द्रौपदी का, अब कलयुग में […]
टूट चूका हूँ , चाह जीने की छोड़ चूका हूँ ! फिर भी ज़िंदा हूँ क्यूँकि साँसे कुछ “नम” अभी बाकी हैं …! ना जाने कितने ही दर्द सह चुका ! ना जाने और कितने […]
कोई शाम ऐसी भी तो हो जब तुम लौट आओ घर को और कोई बहाना बाकी न हो मुदत्तों भागते रहे खुद से जो चाहा तुमने न कहा खुद से तुम्हारी हर फर्माइश पूरी कर […]
ये जिंदगी भी कैसे करवट बदलती है । इस करवट खुशी, दूसरे गम मिलती है। रेत की मानिंद हो गई हसरतें सारी, जितना समेटो, मुठ्ठी से फिसलती है। जमीं छोड़ा आसमां छूने की ख्वाहिश में, […]
खुद की सुनेगा तो पहचान मिलेगी असली दुसरो की सुनेगा तो इंसान बनेगा तू नकली
* सच * अब तो बाज़ारों में बेचारी सच्चाई सिसकियाँ भरती हैं कोई भी ख़रीददार नहीं उनका जो भी आता है बेईमानी , मक्कारी ख़रीद कर ले जाता है हां , कभी कभार भूला भटका […]
नज़्म थी तेरी बरसात वाली अब तोह इंतेज़ार में उसी नज़्म का सहारा है फासले बन गए उन नज़दीकियों में अब तोह याद में उसी का ही सहारा है साद में तेरे मै बरबाद हो […]
तूने चुना है वो रास्ता जो तेरे लिए बना है पर कभी किसी मोड़ मे मुलाकात हो तोह मुस्कुराना तोह बनता है आखिर कभी वादे किए थे की साथ चलना है
कवि तो होते है बदनाम आश्कि की रहो मे भटकते फिरते है| दोष लगता है उनपर कलम से छेड छाड़ का वो तो बस अपना हाल -ए -दिल बयां करते है |
धन का सागर मैंने पाया तब मै अंधकार मे खो गया | जब खुद को खो दिया तब मै ईश्वरमय हो गया |
धन का सागर मैंने पाया तब मै अंधकार मे खो गया | जब खुद को खो दिया तब मै ईश्वरमय हो गया |
खोया समय फिर कब आता है | अन्याय पर ज्ञानी का मौन विनाश लाता है |
भले की बात जरूर कहो चाहे खोटी हो या खरी सही समय पर सही बात कहो पल पल चलती जाये घड़ी
सुनो आज तुम्हे सुनाऊ पानी की कहानी कीमती है पानी कहती थी मेरी नानी | कभी अमृत जैसा मीठा था मेरे गांव का ये पानी अब विषैला होता जा रहा हर घट- घट का पानी […]
तुम अवचेतन मन की चेतना। तुम विरह की मधुर वेदना। तुम इच्छित फल की साधना। तुम ईश्वर की आराधना। तुम सुंदर अदृश्य सपना। तुम साकार मेरी कल्पना। तुम संपूर्ण मेरी कामना। हाथ सदैव ‘देव’ का […]
बेचैनियां ,मदहोशियां आती रही,जाती रही । आवारगी सी इस दिल पर छाती रही, गुनगुनाती रही, हम नशे के पैमाने में….. डूबते- उभरते रहे, यादें….. इस कदर दिल को कभी जख्म कभी मलहम लगाती रही। निमिषा […]
हां इस छोटी सी उम्र में भी तमाम दुनिया देखी है, कुछ बाते बहुत गहराई से सिखी है, अक्सर चाहत करते है हम जिस की भी टुटकर , वो लिखा गया होता है किसी और […]
ऐसे भी रफ़ीक़ जो कयामत ढाते हैं। दावत देकर वो अदावत निभाते हैं। जान बनाकर जान लेने की कोशिश की, ज़ख्मों का सेज देकर अयादत आते हैं। ज़ुल्म करने से सहने वाला गुनहगार, यही सोच […]
राह तकती है तेरी,नजरें मेरी, तेरे बगैर सुना सुना है जहां मेरा, तुझे पास बुलाती है निगाहें मेरी, इस कदर तुम चले गए जिंदगी से मेरी, तेरे बिना यह दुनिया है विरान मेरी, जिगर को […]
राह तकती है तेरी नजरें मेरी, तेरे बगैर सुना सुना है जहां मेरा, तुझे पास बुलाती है निगाहें मेरी, इस कदर तुम चले गए जिंदगी से मेरी, तेरे बिना यह दुनिया है विरान मेरी, जिगर […]
मेरी रचना व मेरी मेरी शब्द अब रहे नहीं सिर्फ मुझ तक अब इन में बसा आपका प्यार और आशीर्वाद के मैं जो भी लिखती हूँ आप बना देते हैं उसे खास
शांति की ओर .. प्रकृति में खो जाओ, मंत्रमुग्ध से हो जाओ । कुछ पल डूबे रहो जल में , बैरागी से बन जाओ। तृष्णा त्यागो , चलो प्रेम की ओर । मन के कानों […]
Kya likhu tuzpe, Tu to wo chand hain jiska noor mere Dil ki jamin par Charo or chhaya hain, Kitna Kismat vala hoga wo bhi jisne tuze sato janam k liye paya hain, Fir bhi….. […]
ख़्वाब टूटते हैं मग़र यादें रह जातीं हैं। चाहतों की दिल में फ़रियादें रह जातीं हैं। देख़तीं रहतीं हैं आँखें राहें मंज़िल की- वस्ल की भटकी हुई मुरादें रह जातीं हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
गलतियाँ बहुत कर लीं चलो एक दो सुधारी जाएँ, रस्मों रिवाजों की चादर सर से पूरी उतारी जाएँ, जाये कहाँ, अब है कौन हमारा इस नए ज़माने में, चलो यादें पुरानी उकेर कर रखी थीं […]
अपने दिल को दिमाग से लड़ाना ज़रूरी था, उसने बुलाया था उसके पास जाना जरूरी था, रौशनदान बहुत थे चाहरदिवारी में पर फिरभी, मुझको अंधरे से भी तो काम कराना ज़रूरी था, थक हार कर […]
मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]
काश ! देश का शासन कलम चलती, निर्दोष को न्याय दिलाती, और दोषी पर कहर बरसाती, काश !देश का शासन कलम चलाती | अन्याय का नाम ना होता, भ्रष्टाचार का काम ना होता, दुष्ट नेताओं […]
फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव , नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव , रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव , मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव […]
मां बाबा की दुलारी वो थी, नन्हे कदम जब पडे थे उसके. आंगन में खुशियां छाई थी, किलकारियां घर में गूंजी थी, पायल की घुघरू की खनखन से, सारा घर आंगन गुंजा था, देखते ही […]
जब रूबरू हों। तो गुफ्तगु हो। एक मैं रहूँ, और एक तू हो। कुछ अनकही बातें, आँखों से सुन लूं। फोन पर बातें मुझे भाती नहीं, बगैर देखे बातें समझ आती नहीं। होंठ से तेरे, […]
कोई कहे कैसे उसको ग़म नहीं है? जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है। तुम हर तरफ़ ढूँढ़ लो इलाज़े-मर्ज़ को- इस दर्द का कोई भी मरहम नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय
जब से इश्क़ का विषपान किया मैं पूर्ण खुद को पाती हूँ कितना भी कड़वा हो ये विष इसे पी कर मैं श्री शंकर सी मलंग रहना चाहती हूँ मैं बस तेरा ध्यान लगाए हुए […]
आजाद भारत के तुम हो मसीहा, गांधी तेरी यही पहचान, सत्य अहिंसा और धर्म का. तूने बनाई एक मिसाल. सादा जीवन उच्च विचार का, दुनिया को सिखलाया पाठ, नतमस्तक होकर अंग्रेज भी, छोड़ कर चले […]
भीड़ बहुत है भागदौड़ भी बहुत इस ज़माने में, बस यही वो डर है मैं उसे आप सबसे छुपाता हूँ, हर तरफ शोर मचा है सबको रौशनी से परहेज है, इसी एतराज़ के चलते मैं […]
मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीर मैं सुनाने को अपनी मनोवेदना हूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीर जब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से , मैं थी धवल, मैं थी निश्चल मुझे […]
Please confirm you want to block this member.
You will no longer be able to:
Please note: This action will also remove this member from your connections and send a report to the site admin. Please allow a few minutes for this process to complete.