नज़्म थी तेरी बरसात वाली अब तोह इंतेज़ार में उसी नज़्म का सहारा है फासले बन गए उन नज़दीकियों में अब तोह याद में उसी का ही सहारा है साद में तेरे मै बरबाद हो […]

तूने चुना है वो रास्ता जो तेरे लिए बना है पर कभी किसी मोड़ मे मुलाकात हो तोह मुस्कुराना तोह बनता है आखिर कभी वादे किए थे की साथ चलना है

सुनो आज तुम्हे सुनाऊ पानी की कहानी कीमती है पानी कहती थी मेरी नानी | कभी अमृत जैसा मीठा था मेरे गांव का ये पानी अब विषैला होता जा रहा हर घट- घट का पानी […]

तुम अवचेतन मन की चेतना। तुम विरह की मधुर वेदना। तुम इच्छित फल की साधना। तुम ईश्वर की आराधना। तुम सुंदर अदृश्य सपना। तुम साकार मेरी कल्पना। तुम संपूर्ण मेरी कामना। हाथ सदैव ‘देव’ का […]

बेचैनियां ,मदहोशियां आती रही,जाती रही । आवारगी सी इस दिल पर छाती रही, गुनगुनाती रही, हम नशे के पैमाने में….. डूबते- उभरते रहे, यादें….. इस कदर दिल को कभी जख्म कभी मलहम लगाती रही। निमिषा […]

हां इस छोटी सी उम्र में भी तमाम दुनिया देखी है, कुछ बाते बहुत गहराई से सिखी है, अक्सर चाहत करते है हम जिस की भी टुटकर , वो लिखा गया होता है किसी और […]

ऐसे भी रफ़ीक़ जो कयामत ढाते हैं। दावत देकर वो अदावत निभाते हैं। जान बनाकर जान लेने की कोशिश की, ज़ख्मों का सेज देकर अयादत आते हैं। ज़ुल्म करने से सहने वाला गुनहगार, यही सोच […]

राह तकती है तेरी,नजरें मेरी, तेरे बगैर सुना सुना है जहां मेरा, तुझे पास बुलाती है निगाहें मेरी, इस कदर तुम चले गए जिंदगी से मेरी, तेरे बिना यह दुनिया है विरान मेरी, जिगर को […]

राह तकती है तेरी नजरें मेरी, तेरे बगैर सुना सुना है जहां मेरा, तुझे पास बुलाती है निगाहें मेरी, इस कदर तुम चले गए जिंदगी से मेरी, तेरे बिना यह दुनिया है विरान मेरी, जिगर […]

शांति की ओर .. प्रकृति में खो जाओ, मंत्रमुग्ध से हो जाओ । कुछ पल डूबे रहो जल में , बैरागी से बन जाओ। तृष्णा त्यागो , चलो प्रेम की ओर । मन के कानों […]

ख़्वाब टूटते हैं मग़र यादें रह जातीं हैं। चाहतों की दिल में फ़रियादें रह जातीं हैं। देख़तीं रहतीं हैं आँखें राहें मंज़िल की- वस्ल की भटकी हुई मुरादें रह जातीं हैं। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

गलतियाँ बहुत कर लीं चलो एक दो सुधारी जाएँ, रस्मों रिवाजों की चादर सर से पूरी उतारी जाएँ, जाये कहाँ, अब है कौन हमारा इस नए ज़माने में, चलो यादें पुरानी उकेर कर रखी थीं […]

अपने दिल को दिमाग से लड़ाना ज़रूरी था, उसने बुलाया था उसके पास जाना जरूरी था, रौशनदान बहुत थे चाहरदिवारी में पर फिरभी, मुझको अंधरे से भी तो काम कराना ज़रूरी था, थक हार कर […]

मेरी छाँव मे जो भी पथिक आया थोडी देर ठहरा और सुस्ताया मेरा मन पुलकित हुआ हर्षाया मैं उसकी आवभगत में झूम झूम लहराया मिला जो चैन उसको दो पल मेरी पनाहो में उसे देख […]

काश ! देश का शासन कलम चलती, निर्दोष को न्याय दिलाती, और दोषी पर कहर बरसाती, काश !देश का शासन कलम चलाती | अन्याय का नाम ना होता, भ्रष्टाचार का काम ना होता, दुष्ट नेताओं […]

फूल लताओं को समेट कर रखता मेरा गांव , नल कूप को सहेज कर रखता मेरा गांव , रिस्ते को मदमस्त खुशहाल रखता मेरा गांव , मिट्टी की खुशबू को सहेज कर रखता मेरा गांव […]

मां बाबा की दुलारी वो थी, नन्हे कदम जब पडे थे उसके. आंगन में खुशियां छाई थी, किलकारियां घर में गूंजी थी, पायल की घुघरू की खनखन से, सारा घर आंगन गुंजा था, देखते ही […]

जब रूबरू हों। तो गुफ्तगु हो। एक मैं रहूँ, और एक तू हो। कुछ अनकही बातें, आँखों से सुन लूं। फोन पर बातें मुझे भाती नहीं, बगैर देखे बातें समझ आती नहीं। होंठ से तेरे, […]

कोई कहे कैसे उसको ग़म नहीं है? जो कुछ मिल गया है उसको कम नहीं है। तुम हर तरफ़ ढूँढ़ लो इलाज़े-मर्ज़ को- इस दर्द का कोई भी मरहम नहीं है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय

जब से इश्क़ का विषपान किया मैं पूर्ण खुद को पाती हूँ कितना भी कड़वा हो ये विष इसे पी कर मैं श्री शंकर सी मलंग रहना चाहती हूँ मैं बस तेरा ध्यान लगाए हुए […]

आजाद भारत के तुम हो मसीहा, गांधी तेरी यही पहचान, सत्य अहिंसा और धर्म का. तूने बनाई एक मिसाल. सादा जीवन उच्च विचार का, दुनिया को सिखलाया पाठ, नतमस्तक होकर अंग्रेज भी, छोड़ कर चले […]

भीड़ बहुत है भागदौड़ भी बहुत इस ज़माने में, बस यही वो डर है मैं उसे आप सबसे छुपाता हूँ, हर तरफ शोर मचा है सबको रौशनी से परहेज है, इसी एतराज़ के चलते मैं […]

मैं हूँ नीर, आज की समस्या गंभीर मैं सुनाने को अपनी मनोवेदना हूँ बहुत अधीर , मैं हूँ नीर जब मैं निकली श्री शिव की जटाओं से , मैं थी धवल, मैं थी निश्चल मुझे […]

रुह जिसकी बिक चुकी है, दिल के जज्बात वो क्या जाने। इंसानियत भी जो बेच चुका, गम की बात वो क्या जाने। खुशियों का लुटेरा है जो, खुशियों की सौगात वो क्या जाने। दूसरों के […]

बेटियां रोशन हर घर जहां जन्म लेती हैं बेटियां 👩‍🎓 🧑होती हैं दो कुलों की रक्षक यह बेटियां 👩‍🔬 घर-भर की रौनक ये खिलखिलाती बेटियां👩‍🚒 भाई पर लुटाती जान भी ये बेटियां🧒👧 दो परिवारों के […]

गुनाह साबित भी न हुआ, गुनहगार कहलाया गया मैं। सीने से लगाया भी गया, फिर बार बार ठुकराया गया मैं। कई बार तोड़ा फिर जोड़ा गया, फिर जोड़ कर बनाया गया मैं। कभी जुगुनू आँखों […]

बहुत बुलाया मगर वो मेरी कही सुनी सब टाल गया, प्रेमपत्र जो पढ़े लिखे थे वो आँगन में सब डाल गया, कौन घड़ी में जाने कब आके घर में दीपक बाल गया, सूनी मन पुस्तक […]

ये जिस्म है, ये जिस्म ही न पिघल जाये कहीं, किसी चराग की शरारत से न जल जाये कहीं, मैं चमकता रहा हूँ उसीकी गर्म रौशनी से यारों, मुझको मेरा ही ये भरम न निगल […]

इस बार घट स्थापना वो ही करे जिसने कोई बेटी रुलायी न हो वरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश […]

मां ओ मां, तुझ से प्यारा, तुझ से न्यारा , होगा कोई न और दूजा, भोली भाली सूरत तेरी, ममता तेरी आंखों से झड़ती, शीतल पवन सा तेरा प्यार, तेरी गोद है जन्नत का द्वार […]

बेशक दौलत बेशुमार नहीं कमाया है। मगर मेरे सर पर, बुजुर्गों का साया है। ज़हां की दौलत कम है, मेरे खजाने से, दुआओं का खजाना, मेरा सरमाया है। हादसा सर से गुजर गया, मैं बच […]

माँ बाप की क्या इच्छा होती है अपने बच्चों से थोड़ा सा प्यार थोड़ी सी इज्जत चाहते है उन गढ़े पक्के रिश्तो से दुख के दिनों मे तुम साथ दो ना दो तुम्हारे साथ सुख […]

मां क्या-क्या दुख सहती है, हर फरमाइश पूरी करती है । हर हुकुम बजाती रहती है, खुद से बेपरवाह रहती। बच्चों की चिंता करती है , अलार्म क्लॉक सी जगती है अपने सपनों को छोड़ […]

पाषाण युग दिखावे की संस्कृति , दिखावे का प्यार। प्रचार पाने को , हर कोई तैयार। कैसा यह संसार ! बदलता बातें पल पल सच बन जाता झुठ यहां हर कदम कदम पर पत्थर से […]

इश्क आंखों में डूबा रहता है, रोम- रोम में रहता है। लबों को छूकर जाता है , जग में तन्हा कर जाता है। सरगोशी सी कर जाता है, गुपचुप सी हंसी दिलाता है। जाने क्या […]

कर्म ही पूजा और न दूजा , किस्मत का दरवाजा। किया कर्म तो सोई किस्मत का खुल जाए ताला। भाग्य बदल कर रख दो अपना , कर्म करो और साथ लो अपना। रेखाओं पर गर […]

मेरे दर्द को तेरा अफ़साना याद है। मेरे ज़ख़्म को तेरा ठुक़राना याद है। ख़ींच लेती है तलब मुझको पैमाने की- हर शाम साक़ी को मेरा आना याद है। मुक्तककार- #मिथिलेश_राय