Category: हिन्दी-उर्दू कविता
स्वार्थ के हर रंग मेें रंग गया है दिल…..देखो और मुस्कुराकर कह रहें हैं— ये दुनियाँ कितनी रंगीन है……!! “मतलब” के रस्से से अब बँध गया है तन…….देखो प्यार के वो कच्चे धागे मिल नहीं […]
————————————————- Imaan ka daawaa kar sakte nhi Beimaano ki mehfil mei Lakh chaho mumkin nhi taraqqi Gandagi gr man mei-kapat dil mei Har surat ab dikhaawey ka– Seerat bhi dhumil ho gayi hai Saboot-saboot ke […]
शाम गुजार देते हैं लोग गुजरती नहीं, बरसात से कभी किसी राही की प्यास बुझती नहीं, कहे ना कहे कोई बुलाये ना बुलाये खुद ही चली आती हैं यादें, जिस तरह सोते हैं हम तो […]
आज ओढ़ ली थकान की चादर कुछ इस तरह, के हफ़्तों बाद मिली हो किसी को फुरसत जिस तरह, जागता ही रहा हो सफर में ज़िन्दगी के कोई जिस तरह, आज सोया हूँ ऐसे के […]
जाने किस कश्मकश में, जिंदगी गुजरती जा रही है, न जाने मैं अपना न पाई या, जिंदगी मुझे आजमाती रही, बहुत हीं कच्ची डोर में, ये पतंग फँसी हुई है, न जाने किस गुमाँ में, […]
2.01(63) मैं ! तुझे छू कर; ‘गु…ला…ब’ कर दूँगा ! ज़िस्म के जाम में, ख़ालिस शराब भर दूँगा !! तू; मेरे आगोश में, इक बार सही; आ तो ज़रा ! ख़ुशबू—सा बिखर जाएगी, सारा हिसाब […]
tum nazaroon main,hazaroon main, bas ak hi hoon, tum..meri tishnagi meri bandagi main tum hi toh ho, meri maushiki,meri asqui, ka karar tum ho, meri abru meri justaju main, tum hi toh ho tujhe kya […]
मैं जीना चाहती हूँ.. बावजूद इसके.. कि व्यर्थ हो गयी मेरी चीखें.. खुद को बचाने की हर कोशिश.. हर प्रार्थना हर उम्मीद.. जीत गया दानवी पौरुष.. और हार गया मेरा शरीर.. मेरे शरीर का हर […]
मेघों में फंसे सूरज, तुम हो कहाँ? सोये से अलसाए से, रश्मी को समेटे हुए, तुम हो कहाँ ? मेरे उजालों से पूछों – मेरी तपिश से पूंछो- सूरज हूँ पर सूरज सा दीखता नहीं […]
तेरी आदत सी मुझे जब होने लगी, तेरी परछाईं मुझमें ही खोने लगी, तू जो रूठे तो शाम होने लगी, मेरे ख़्वाबों में तू आके सोने लगी, धूप सी मेरे चेहरे पे खिलने लगी, तू […]
उनकी गली से जो गुजरे वो दीवाना हो जाता है भटक जाता है वो, मजनू हो जाता है हम भी गुजरे थे इक दफ़ा उनकी गली से आज तक भटक रहे है, न उनकी खबर […]
ख़ुशी जिसे कहते हैं, वो चीज ढूंढता हूँ गैरों की इस दुनिया में अपनों को ढूंढता हूँ अकेला तो न था पहले कभी इतना साथ चले थे जो उन क़दमों को ढूंढता हूँ ख़ुशी जिसे […]
क्या हुआ अगर मैं खामोश हूँ! तेरी तमन्ना में मदहोश हूँ! यादें चीखती हैं जेहन में, जिन्दगी में खानाबदोश हूँ! #महादेव की कविताऐं
कब तक जियोगे, समझौते भरी ज़िंदगी तेरी आंखें बताती है, नहीं इसमें तेरी रजामंदी अरे खुद से पूछ तो सही, तुझे क्या चाहिए ? उम्मीद जमाने से ना कर, खुद बदल जाईये आँखों में कोई […]
मैने माना, ओ रे कान्हा, दुनिया पल का आना- जाना, पर है ठाना, दूँगी ताना, अब फिर जो तूने न माना, तूने राधा के संग बाँधा, हो आधा पर प्रेम को साधा, बोल, ये जो […]
कुछ गलतफहमियाँ है, तेरे मेरे दरमियाँ, चल मिटा लें फासले, कुछ गुफ़्तगू कर लें, रूठी रहोगी, आखिर कब तलक, मै इधर तड़पता हूँ, और तु उधर, मेरी मौजूदगी को यूँ, नजरअंदाज ना कर, चिर जाती […]
ईश्वर की अनूठी रचना हूँ मै हाँ ! नारी हूँ मैं ……… कभी जन्मी कभी अजन्मी हूँ मैं , कभी ख़ुशी कभी मातम हूँ मैं . कभी छाँव कभी धूप हूँ मैं, कभी एक में […]
तुम्हें न देखा न स्पर्श किया, नाही सुना है अब तक पर तुम कितने खास बन गए हो, तुम्हारे आने की जब से हुई है दस्तक ! तुम्हारे आने का इन्तजार है अब तुम्हे पाने […]
देखता हूँ अक्सर खिड़की से, कुछ कोयल दाना चुगती हैं फुदक फुदक कर चुगते चुगते फिर वो सब उड़जाती हैं काश मैं भी उड़पाता, रंग आसमान के देखपाता आज़ादी क्या होती है काश मैं भी […]
मेरी जिन्द़गी तुम्हारी सूरत है! मेरी हर मंजिल तुम्हारी मूरत है! डूबा हूँ तेरे प्यार के भंवर में, मुझे हरपल तुम्हारी जरूरत है! रचनाकार #महादेव’
कहां थे फ़ासले तेरे मेरे दरम्या इक वक्त था जो जम गया था हमारे बीच
पढ़ना नहीं जानती फिर भी चाट जाती हैं दीमकें जाने कैसे सारी किताबों को, रौशनी क्या है नहीं जानते फिर भी कर देते हैं जाने कैसे रौशन जुगनू सारे ज़माने को, नहीं जानते जिद्दी हवाओं […]
**तुम होते तो शायद और बात होती** सहर तो अब भी होती है, सूरज अब भी निकलता है फलक़ पर, मगर मैं सोचता हूं कि तुम होते तो शायद और बात होती, दिन तो अब […]
मुझको तेरी आहट़ आहों में नजर आती है! तेरी मुस्कराहट निगाहों में नजर आती है! तेरी ओर खींचती हैं मेरी मंजिलें मुझको, जिन्दगी भी दर्द की बाँहों में नजर आती है! #महादेव की कविताऐं
तेरे गीत प्यार के हैं सुख मेरा …..! (गीत) मै तो पहले गाता न था, गीत क्या है ये न जानता, तुझसे प्यार क्या हुआ, दिल मेरा चहक उठा, अब तेरे ही गीत गा रहा, […]
गणपति बप्पा मोरया, पुड्च्या वर्षी लौकरया मोरया रे, बप्पा मोरया रे \-४ गणपति अपने गाँव चले, कैसे हमको चैन पड़े जिसने जो माँगा उसने वो पाया, रस्ते पे हैं सब लोग खड़े गणपति बप्पा दुख […]
कोई भी कमी कोई भी शिकायत नहीं छोड़ती, अपने बच्चे की परवरिश में वो माँ कोई खामी नहीं छोड़ती, खुद रह भी ले भूखी पर वो माँ किसी दिन भी बच्चे को भूखा नहीं छोड़ती, […]
You taught me the meaning of love and You taught me the meaning of life Whenever I fall you taught me How to stand and look forward to win Sometimes during the class and Sometimes […]
सर को कैसे याद पहाड़े ? सर को कैसे याद गणित ? यह सोचती है दीपाली यही सोचता है सुमित सर को याद पूरी भूगोल कैसे पता कि पृथ्वी गोल ? मोटी किताबें वे पढ़ […]
नजर के सामने कभी होते हैं मंजर जैसे! जिगर में चुभता हुआ हो कोई खंजर जैसे! पलक में होती है यादों की रफ्तार इसतरह, लहर फैली हुयी हो रग रग में समन्द़र जैसे! #महादेव की […]
नीले आसमान में कहीं अपना नाम लिख दूं ख्वाहिश है हर चीज को नीलम कर दूं वक्त कभी हमारा भी आयेगा ऐ दोस्त दुनिया मे में मैं अपना रंग भर दूं
तुम धरती हो, तुम आसमान हो और तुम ही ये जाहां हो सूरज सा तेज और चाँद की चांदनी की तरह ही तो तुम ही हम सब की शान हो मुश्क़िलों जैसी चीज़ों का ना […]
कोई भी कमी कोई भी शिकायत नहीं छोड़ती, अपने बच्चे की परवरिश में वो माँ कोई खामी नहीं छोड़ती, खुद रह भी ले भूखी पर वो माँ किसी दिन भी बच्चे को भूखा नहीं छोड़ती, […]
तू मेरे जिस्म मेरी जान जैसा है, कभी दिल की जुबां तो खुदा की अज़ान जैसा है, कभी हर प्रश्न का उत्तर तो कभी गणित के सवाल जैसा है, तू मेरी आँखों का ख़्वाब तो […]
कोई डरा कर किसी का मन बदल देता है, कोई डर कर अपना शहर बदल देता है, कोई सब कहकर कुछ बदल नहीं पाता, तो कोई खामोश रहकर भी बहुत कुछ बदल देता है, कोई […]
बचपन साथ बहारें देखें बड़े हुए बंटवारें देखें फिर आँगन में धुप ना आयी आँखे अब दीवारें देखें चल फिर रेत के महल बनायें और नदियों की धारें देखें मंदिर में तो मिला नहीं रब […]
हम उस शख्श से वफ़ा की उम्मीद कर बैठे जिसने हर पल हमारी बर्बादियों की दुआ मांगी थी
आ जाओ कहाँ हो तुम, कहाँ हो तुम,कहाँ हो तुम . तुम्हारी गफलत के अफ़साने, करते फिरते है दीवानें, ए परवानों तुम्हे क्या खबर है- बुझ रही है शमां – कहाँ हो तुम . तूफानों […]
Dil aye bekarari thi labo per trana tha Unki yado ka humare dil mai afsana tha Mohobate lachar the hum or unki Dewangi ka ek alag hi fsana tha Mager aj bhi in labo per dil […]
Dur hoker bhi pass rheta Teri yado ka her pal eshas rheta hai Teri yado mai tanhaiya thi Mager kya karu in tanhaiyo Mai mera koi apna khas rheta hai Dur hoker bhi vo pass rheta hai Dil […]
ज़िंदगी को इस—–तरह से जी लिया । एक प्याला-–फिर; ज़हर का पी लिया ॥ वक़्त के सारे ‘थ…पे…ड़े’ सह लिए । गम जो बरपा, इन लबों को सी लिया ॥ अब अगर कुन्दन—सा दीखता….मैं दमकता […]
मेरा ख्वाब पलकों में डरा हुआ सा रहता है! मेरा दर्द़ जिस्म में ठहरा हुआ सा रहता है! नाकामियों से टूटी है यूँ जिन्द़गी मेरी, मेरा दिल ख्वाहिशों से भरा हुआ सा रहता है! #महादेव […]
जो समझते नहीं कीमत खुद अपनी, अक्सर बिक जाते हैं वो सस्ते में बाज़ारों में, कहीं लगते हैं ऊँचे दाम किसी की काबलियत के, तो कहीं बेमोल खरीद लिए जाते हैं शख्स यहाँ ज़माने में, […]
देख कर ही मेरे घर की टूटी हुई खिड़की, जो फेर लिया मुँह तो अच्छा ही किया तुमने, छोड़ दिया साथ जब इतनी सी ही बात पर, अच्छा ही किया मेरा टूटा हुआ मकाँ देखा […]
हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं, देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं, पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर, हर सिगरट के साथ वो रोज […]
हर एक कश के साथ धुंए में अपनी ज़िन्दगी उड़ाते हैं, देखो आजकल के मनचले कैसे अपने कदम भटकाते हैं, पाते हैं कितने ही संस्कार अपने घरों से मगर, हर सिगरट के साथ वो रोज […]
तोड़नी है खरगोश की तरह छलाँगें मारते हजार- हजार प्रपातों को कोख में दबाये खड़ी चट्टान गर्वीली !अनुर्वरा !! तोड़नी हैं जेवरा की धारियों सी सड़कों पर पसरी गतिरोधक रेखाएँ अनसुलझे प्रश्नों का जाम […]
मैं वहीं हूँ जहाँ तुम आए थे चमरौला जूता ठीक कराने ‘छुट्टे पैसे नही हैं‘ कह कर चले गए थे —पचास साल पहले | आज चमचमाते जूतों पर पॉलिश कराने आए हो — पचास […]