ایک شرارت کرتے ہیں آؤ محبّت کرتے ہیں ہنستی آنکھوں سے کہ دو دریا ہجرت کرتے ہیں کچھ دل ایسے ہیں جن پر ہم بھی حکومت کرتے ہیں کوئی بات تو ہے مجھ میں دشمن […]
ایک شرارت کرتے ہیں آؤ محبّت کرتے ہیں ہنستی آنکھوں سے کہ دو دریا ہجرت کرتے ہیں کچھ دل ایسے ہیں جن پر ہم بھی حکومت کرتے ہیں کوئی بات تو ہے مجھ میں دشمن […]
अब तो संभलो नाजुक लड़कियों ये आशिक इतने नादान नहीं पीकर रस ये उड़ जाते हैं धरना इन पर ध्यान नहीं ढूँढे लड़कियों को गलियों में सब तो आज शिकारी हैं आगे क्या अब लड़कों […]
सावन का महीना आया बादल गरजे डम – डम – डम बिजली कड़की आसमान में पानी बरसा छम – छम – छम मुन्ना की दादी बोली घर में पानी टपक रहा मुन्ना के दादा बोले […]
तुम कविता का विषय बनो और मैं कविता का रचनाकार चलो इस तरह से रच लेते हैं कुछ कविताएँ दो – चार मौन रहें और बोलते रहें हम दोनों के नयन तुम ऐसे मुस्कराओ उसमें […]
जिनको ऊँगली पकड़ कर चलना सिखाया, जिनको देकर सहारा आगे बढ़ना सिखाया, वो सब आज हाथ छुड़ाने लगे, देखो बूढ़ा कह कर वो सताने लगे, जिनको अपना बनाया वो सपना था मेरा, कह कर आज […]
तू समन्दर मैं तेरा किनारा बनूं, तू जो बिखर जाए तेरा सहारा बनूँ, मुझसे टकराये तू, मुझमे मिल जाए तू, तुझमे बस जाऊं मैं, मुझमे बस जाए तू, तू समन्दर मैं तेरा…. ओ समन्दर तू […]
Aye duniya valo tumne bhi kya reet Banyi Q likh dii maa baap se betiyo k hisse mai judayi Q nhi hoti is jag mai ladko ki vedayi…. By RLv gahlot
ღღ_ख़ुद से लेते हुए इन्तक़ाम, देखा नहीं तुमने; अच्छा हुआ मेरा अस्क़ाम, देखा नहीं तुमने! . उतर ही जाता चेहरा मेरा, शर्म से उसी दम; अच्छा हुआ मेरा अन्जाम, देखा नहीं तुमने! . कल रात […]
क्या कहे, क्या लिखे लफ़्ज है ही नही, जो समेट सके जज्बातों को| नहीं कोई जो समझ सके हमारे अजीब से हालातों को |
गलतियाँ तुमसे भी हुई है , गुनाह हमने भी किये है पत्थर तुमने फेंके , गोलियों के जख्म हमने भी दिए है । गोली से मरे या शहीद हुए पत्थर से; नसले-आदम का खून […]
टिप टिप बरसी पानी की बूंदे ऐसी आई लिपटी हुई खुशी की लहर दौड़ाई उन्होंने प्यार कम हो गया था जिन रिश्तों में बरसाती लहर और गरजता आसमान भर सा गया वोह खंडार सा रेगिस्तान […]
अभी थोड़ा कच्चा हूँ, दिल का मैं सच्चा हूँ, कवियों की महफ़िल मैं एक छोटा बच्चा हूँ| लिखे है कई ग्रन्थ कवियों ने दुनिया पर, अब कुछ पंकितियां मैं कवियों पर लिखता […]
तुझे मैं ढूँढता हूँ कहाँ कहाँ पर? कदम यादों के हैं जहाँ जहाँ पर! दर्द की मिनारें हैं मौजूद जिसजगह, जिन्दगी भी दफ्न है वहाँ वहाँ पर! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
कुछ दीवाने थे , कुछ परवाने थे- इस महफ़िल में, शमां को जलाने के लिए सब थे बेताब- इस महफ़िल में . दर्द रक्काशा का कौन समझे यहाँ, उसके हुस्न को ही चाहने वाले थे […]
ღღ_महबूब से मिलने की, हर तारीख़ ग़ज़ल होती है; महफ़िल में उनके हुस्न की, तारीफ़ ग़ज़ल होती है! . ग़ज़ल होती है महबूब की, बोली हुई हर बात; आशिक के हर ख्वाब की, तकदीर ग़ज़ल […]
खोल दो राज दिल का ,राज न रह जाने दो, लबों पे आई बात को, बात न रह जाने दो/ ——- माना नजरो से नजरें मिली है तो क्यॉ.., नजरों से उतीर हमें दिल मे […]
जिन्दगी आज क्यु इस कदर वे-परवां हो गई, थी जो सपने साथ वो भी आज खफा हो गई/ बहारो ने भी रुख बदल लिये अब हमसे, गीत लिखना भी चाहुँ तो कैसे शब्द जुदा हो गई/ अरमॉ मचलते रहे दिल ही दिल मे योगी, सारी उम्र की चाहत आज रफा दफा हो गई/ खुदा से पुछू की यै खुदा ये जिन्दगी क्यु दी, जो साथ थी हमारी वो भी बेवफा हो गई / योगेन्द्र कुमार निषाद घरघोड़ा जिला-रायगढ़ (छ.ग.) ९४०६२२०६८३
किनारे पर भी रहूँ तो लहर डुबाने को आ जाती है, बीच समन्दर में जाने का हौंसला हर बार तोड़ जाती है, दिखाने को बढ़ता हूँ जब भी तैरने का हुनर, समन्दर की फिर एक […]
ना तन्हाई की समझ है ना काफिले में चलने का सलीका मुझे, मगर ठहरकर कभी मन्ज़िल मिलती नहीं, सो अक्सर राहों पर बढ़ता रहता हूँ मैं, ना चुप्पी की समझ है ना शोरो गुल में […]
ღღ_मैं भी लिक्खूँगा किसी रोज़, दास्तान अपनी; मैं भी किसी रोज़, तुझपे इक ग़ज़ल लिक्खूँगा! . लिक्खूँगा कोई शख्स, तो परियों-सा लिक्खूँगा; ग़र गुलों का ज़िक्र आया तो, कमल लिक्खूँगा! . बात ग़र इश्क़ की […]
मैं काल हूँ, नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ | ये जो धरती है यहाँ की, महाविहारा कहलाती थी | अब भी मैं ये सोच रहा हूँ, क्यों भाई थी ‘बुद्ध’ को ये धरती, जिसने इसका […]
ღღ__महज़ एक लम्हा ही तो हूँ, गुज़र जाने दे; इस तरह तू जिंदगी अपनी, संवर जाने दे! . ले चलें जिस डगर, दुश्वारियाँ मोहब्बत की; मेरे महबूब अब मुझको, बस उधर जाने दे! . तुझे […]
Bachpan… बचपन भी कितना प्यारा और सच्चा था .. हमारा दिल और दिमाग दोनों बच्चा था.. हर समय होती थी लड़ाई .. मम्मी हमारी करती थी कुटाई .. बचपन का वो दोस्तों के साथ मस्ती […]
खामोश जब मैं हो जाऊंगा। न फिर तुमको नज़र आऊंगा। अब तो कहते हो चले जाओ; यादें मगर ऐसी मैं दे जाऊंगा। बदल जाएगा वक्त और हालात; हर जगह नज़र पर मैं आऊंगा। कैसे कह […]
वो स्कूल का यूनिफार्म, वो काले, और सफ़ेद पीटी के जूते, वो टाईमटेबल के हिसाब से किताबें रखना, वो माँ के हाथों से बनी टिफ़िन, वो पापा से डायरी का छुपाना, वो दोस्तों की शरारतें, […]
मै चंदुलाल का तन हूँ। मैं खुब चंद का मन हूँ। मैं गुरु घांसी का धर्मक्षेत्र हूँ। मैं मिनी माता का कर्म क्षेत्र हूँ।। मैं पहले कुंभ का तर्पन हूँ। मैं राजिम का समर्पन हूँ।। […]
zindagi ka ek ajib khel h… koi hota pass to koi fail h.. iss zindagi ne sikhaya bahut h…. pr… issi zindagi ne rulaya aur hasaya bi bahut h.. zindagi mili h Kisi k kaam […]
वह मुझे बताता है निरीह निर्जन निरवता वासी हूँ जब से मानव मानव न रहा मै बना हुआ वनवासी हूँ | अवतरण हुआ जब कुष्ठमनन कुंठा व्याप्त हुआ जग में तब विलग हो गया मै […]
इक जमाना था, जब हम सब के हुआ करते थे आज हर कोई हमें अपना कहने से कतराता है|
ღღ_कर तो लूँ मैं इन्तजार, मगर कब तक; लौट आएगा बार-बार, मगर कब तक! . उसे चाहने वालों की, कमी नहीं है दुनिया में; याद आएगा मेरा प्यार, मगर कब तक! . प्यार वो जिस्म […]
अब तो आँखो से भी जलन होती हैं मुझे ऐ कान्हा खुली हो तो तलाश तेरी बंद हो तो ख्वाब तेरे आप सभी कृष्ण प्रेमियों को जय श्री राधे राधे जय श्री कृष्ण जय शिव […]
मदहोशी में जीवन कारवाँ, चला जा रहा है, लड़खड़ाते कदम,ठिठक जाते कदम, दिशाहीन मन,बिना पंख, उड़े जा रहे हैं, ख्वाबो के अधीन हम, हैरान हैं, परेशान हैं , मन्तव्य क्या, मन्तव्य क्या, बस यूँ हीं […]
ये कैसी है आस्था, जिसमे समाई नौकरशाही | ये कैसी है व्यथा, जिसे सुन कर मन डगमगाई || ये कैसी है अखंडता, जिसमे धर्मनिरपेक्षता की नींव मरमराई | ये कैसी है अटूटता, जिसमे भ्रमता की […]
Kya khoya kya paaya hamne, Kaise jiya jindagi ko hamane Khote khote rahe khud me him Har roj kaise khud ka katl kiya hamne Kis tarah
“ यादों की यलगार “ नहीं आती याद तुम्हारी ! गोयाकि ; भूला भी नहीं मैं : तुम्हें !! मंडराती रहीं कटी पतंग-सी : तुम ! मेरे मन के आँगन मेँ : गुमसुम !! तुम्हें […]
मेरी मुहब्बत को तुम अल्फाज दे दो! मेरी मंजिलों को तुम आवाज दे दो! कबतलक सह पाऊँगा तेरे सितम को? मेरी जिन्दगी को तुम आगाज दे दो! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
शर्म आ रही है ना उस समाज को जिसने उसके जन्म पर खुल के जश्न नहीं मनाया शर्म आ रही है ना उस पिता को उसके होने पर जिसने एक दिया कम जलाया शर्म आ […]
सुबह की धुप होकर गुज़री हो, जैसे, तेरी आँखों से। चेहरे पर गिरे तेरे बाल, पत्तों ने मुहब्बत सी कर ली हो जैसे शाखों से। रोशनियों ने कभी जैसे अंगड़ाई ली हो तेरे हाथों में […]
दुनिया हमारे दम से है …..! बदले हज़ार बार ज़माना तो गम नहीं, दुनिया हमारे दम से है, दुनिया से हम नहीं …..! क्यूँ फ़िक्र है तुम्हे मेरे यारों बेकार की, मंजिल मिलेगी आ के […]
कुछ रिश्ते खास होते है दूर होते है, फिर भी पास होते है कैसे करे बयां, इन अहसासो को लफ़्ज कहां इतने खास होते है
सारा जीवन खो आया हूँ तब आया हूँ पाप पुण्य सब ढो आया हूँ तब आया हूँ तुम पावन हो देवतुल्य, मैं तुम्हें समर्पित कलुष हृदय का धो आया हूँ तब आया हूँ आहुति देकर […]
Kya baat hui, kuch khabar nahi mujhe Me to bas, kho gay tha unki aankho me kahin.
इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं (कफ़स = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये […]
**के जब तुम लौट कर आओ::स्मृति** हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद, जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायदll वो बरगद का पेड़ जहां […]
तू कहाँ छुप गया है, ना कोई खबर ना पता है, ज़िन्दगी भी वहीं ठहर गई , मेरी दुनिया भी तभी सिमटकर रह गई, लफ़्ज़ ठिठुर रहे हैं, अहसास सर्द पङे हैं, जज़्बातों में जमी […]
ख्वाबों के जहाँन हमेशा नहीं रहते! जख्मों के निशान हमेशा नहीं रहते! रुकते नहीं हैं रास्ते मंजिल के कभी, दर्द़ के तूफान हमेशा नहीं रहते! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
कुछ ख्याल आ गए ऐसे ही , कुछ शब्द लहरा गए ऐसे ही. अपनों को जब देखा बदलते हुए परायों में, कुछ दर्द हिला गए दिल को ऐसे ही. कल शाम अचानक उनका ख्याल आ […]
दोपहर के समय चिलचिलाती धूप में चिथडे पहने नंगे पाँव घुमती नन्ही सी जान भुख से बिलखती पेट की आग के लिए कई दुख सहकर भी कई कई दिन भुखी रहती है इस उम्र में […]
एक बेकस इंसान समाज का जो अंग है समाज से विभंग है समाज से वो दूर है बेबसी से मजबूर है चाहता है वो भी सामाजिक बनना पर बन नही पाता है इस पूंजी वादी […]
२१२२ १२१२ २२ अपने ही क़ौल से मुकर जाऊँ । इससे बेहतर है खुद में (खुद ही) मर जाऊँ ।। तू मेरी रूह की हिफ़ाजत है ; बिन तेरे जाऊँ तो किधर जाऊँ । तेरी […]
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