मैं काल हूँ, नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ | ये जो धरती है यहाँ की, महाविहारा कहलाती थी | अब भी मैं ये सोच रहा हूँ, क्यों भाई थी ‘बुद्ध’ को ये धरती, जिसने इसका […]
मैं काल हूँ, नालंदा की आपबीती दुहराता हूँ | ये जो धरती है यहाँ की, महाविहारा कहलाती थी | अब भी मैं ये सोच रहा हूँ, क्यों भाई थी ‘बुद्ध’ को ये धरती, जिसने इसका […]
ღღ__महज़ एक लम्हा ही तो हूँ, गुज़र जाने दे; इस तरह तू जिंदगी अपनी, संवर जाने दे! . ले चलें जिस डगर, दुश्वारियाँ मोहब्बत की; मेरे महबूब अब मुझको, बस उधर जाने दे! . तुझे […]
Bachpan… बचपन भी कितना प्यारा और सच्चा था .. हमारा दिल और दिमाग दोनों बच्चा था.. हर समय होती थी लड़ाई .. मम्मी हमारी करती थी कुटाई .. बचपन का वो दोस्तों के साथ मस्ती […]
खामोश जब मैं हो जाऊंगा। न फिर तुमको नज़र आऊंगा। अब तो कहते हो चले जाओ; यादें मगर ऐसी मैं दे जाऊंगा। बदल जाएगा वक्त और हालात; हर जगह नज़र पर मैं आऊंगा। कैसे कह […]
वो स्कूल का यूनिफार्म, वो काले, और सफ़ेद पीटी के जूते, वो टाईमटेबल के हिसाब से किताबें रखना, वो माँ के हाथों से बनी टिफ़िन, वो पापा से डायरी का छुपाना, वो दोस्तों की शरारतें, […]
मै चंदुलाल का तन हूँ। मैं खुब चंद का मन हूँ। मैं गुरु घांसी का धर्मक्षेत्र हूँ। मैं मिनी माता का कर्म क्षेत्र हूँ।। मैं पहले कुंभ का तर्पन हूँ। मैं राजिम का समर्पन हूँ।। […]
zindagi ka ek ajib khel h… koi hota pass to koi fail h.. iss zindagi ne sikhaya bahut h…. pr… issi zindagi ne rulaya aur hasaya bi bahut h.. zindagi mili h Kisi k kaam […]
वह मुझे बताता है निरीह निर्जन निरवता वासी हूँ जब से मानव मानव न रहा मै बना हुआ वनवासी हूँ | अवतरण हुआ जब कुष्ठमनन कुंठा व्याप्त हुआ जग में तब विलग हो गया मै […]
इक जमाना था, जब हम सब के हुआ करते थे आज हर कोई हमें अपना कहने से कतराता है|
ღღ_कर तो लूँ मैं इन्तजार, मगर कब तक; लौट आएगा बार-बार, मगर कब तक! . उसे चाहने वालों की, कमी नहीं है दुनिया में; याद आएगा मेरा प्यार, मगर कब तक! . प्यार वो जिस्म […]
अब तो आँखो से भी जलन होती हैं मुझे ऐ कान्हा खुली हो तो तलाश तेरी बंद हो तो ख्वाब तेरे आप सभी कृष्ण प्रेमियों को जय श्री राधे राधे जय श्री कृष्ण जय शिव […]
मदहोशी में जीवन कारवाँ, चला जा रहा है, लड़खड़ाते कदम,ठिठक जाते कदम, दिशाहीन मन,बिना पंख, उड़े जा रहे हैं, ख्वाबो के अधीन हम, हैरान हैं, परेशान हैं , मन्तव्य क्या, मन्तव्य क्या, बस यूँ हीं […]
ये कैसी है आस्था, जिसमे समाई नौकरशाही | ये कैसी है व्यथा, जिसे सुन कर मन डगमगाई || ये कैसी है अखंडता, जिसमे धर्मनिरपेक्षता की नींव मरमराई | ये कैसी है अटूटता, जिसमे भ्रमता की […]
Kya khoya kya paaya hamne, Kaise jiya jindagi ko hamane Khote khote rahe khud me him Har roj kaise khud ka katl kiya hamne Kis tarah
“ यादों की यलगार “ नहीं आती याद तुम्हारी ! गोयाकि ; भूला भी नहीं मैं : तुम्हें !! मंडराती रहीं कटी पतंग-सी : तुम ! मेरे मन के आँगन मेँ : गुमसुम !! तुम्हें […]
मेरी मुहब्बत को तुम अल्फाज दे दो! मेरी मंजिलों को तुम आवाज दे दो! कबतलक सह पाऊँगा तेरे सितम को? मेरी जिन्दगी को तुम आगाज दे दो! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
शर्म आ रही है ना उस समाज को जिसने उसके जन्म पर खुल के जश्न नहीं मनाया शर्म आ रही है ना उस पिता को उसके होने पर जिसने एक दिया कम जलाया शर्म आ […]
सुबह की धुप होकर गुज़री हो, जैसे, तेरी आँखों से। चेहरे पर गिरे तेरे बाल, पत्तों ने मुहब्बत सी कर ली हो जैसे शाखों से। रोशनियों ने कभी जैसे अंगड़ाई ली हो तेरे हाथों में […]
दुनिया हमारे दम से है …..! बदले हज़ार बार ज़माना तो गम नहीं, दुनिया हमारे दम से है, दुनिया से हम नहीं …..! क्यूँ फ़िक्र है तुम्हे मेरे यारों बेकार की, मंजिल मिलेगी आ के […]
कुछ रिश्ते खास होते है दूर होते है, फिर भी पास होते है कैसे करे बयां, इन अहसासो को लफ़्ज कहां इतने खास होते है
सारा जीवन खो आया हूँ तब आया हूँ पाप पुण्य सब ढो आया हूँ तब आया हूँ तुम पावन हो देवतुल्य, मैं तुम्हें समर्पित कलुष हृदय का धो आया हूँ तब आया हूँ आहुति देकर […]
Kya baat hui, kuch khabar nahi mujhe Me to bas, kho gay tha unki aankho me kahin.
इन परों में वो आसमान, मैं कहॉ से लाऊं इस कफ़स में वो उडान, मैं कहॉ से लाऊं (कफ़स = cage) हो गये पेड सूने इस पतझड के शागिर्द में अब इन पर नये […]
**के जब तुम लौट कर आओ::स्मृति** हौसला टूट चुका है, अब उम्मीद कहीं जख्मी बेजान मिले शायद, जब तुम लौट कर आओ तो सब वीरान मिले शायदll वो बरगद का पेड़ जहां […]
तू कहाँ छुप गया है, ना कोई खबर ना पता है, ज़िन्दगी भी वहीं ठहर गई , मेरी दुनिया भी तभी सिमटकर रह गई, लफ़्ज़ ठिठुर रहे हैं, अहसास सर्द पङे हैं, जज़्बातों में जमी […]
ख्वाबों के जहाँन हमेशा नहीं रहते! जख्मों के निशान हमेशा नहीं रहते! रुकते नहीं हैं रास्ते मंजिल के कभी, दर्द़ के तूफान हमेशा नहीं रहते! रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
कुछ ख्याल आ गए ऐसे ही , कुछ शब्द लहरा गए ऐसे ही. अपनों को जब देखा बदलते हुए परायों में, कुछ दर्द हिला गए दिल को ऐसे ही. कल शाम अचानक उनका ख्याल आ […]
दोपहर के समय चिलचिलाती धूप में चिथडे पहने नंगे पाँव घुमती नन्ही सी जान भुख से बिलखती पेट की आग के लिए कई दुख सहकर भी कई कई दिन भुखी रहती है इस उम्र में […]
एक बेकस इंसान समाज का जो अंग है समाज से विभंग है समाज से वो दूर है बेबसी से मजबूर है चाहता है वो भी सामाजिक बनना पर बन नही पाता है इस पूंजी वादी […]
२१२२ १२१२ २२ अपने ही क़ौल से मुकर जाऊँ । इससे बेहतर है खुद में (खुद ही) मर जाऊँ ।। तू मेरी रूह की हिफ़ाजत है ; बिन तेरे जाऊँ तो किधर जाऊँ । तेरी […]
क्यों है तेरी बेरुखी क्यों तुम बदल गये हो? बेबसी के कदमों से मुझको कुचल गये हो! सूरतें उम्मीदों की अब आती नहीं नजर, मजबूरी के साँचे में क्यों तुम ढल गये हो? रचनाकार- मिथिलेश राय #महादेव’
अब तक सुलग रहा है उठ रहा है धुंआ धुंआ सा इक रिश्ता जलते जलते रह गया है जरा जरा सा कुछ बीज मुहब्बत के सींचे थे घर के आंगन बिन खाद पानी पौधा दिखता […]
आजादी चंद सिरफिरे ही थे जो लेकर आये थे उसे फिर उनसे हाथ छुड़ा जाने कहां खिसक गई अब सुनते हैं कि ठहरी है रसूखदारो के यहाँ जो आ रही थी मुल्क में रास्ता भटक […]
समेटता हूँ बिखरते ख्वाब को सजाता हूँ रोज तकदीर को लिखता हूँ और मिटाता हूँ | जो मद में चूर हो भूले है अपने ओहदे को आईना देकर उन्हे उनकी जगह दिखाता हूँ || हवा […]
फिरे तो सरफिरे है आग ही लगा देंगे पाक नापाक का नामो निशां मिटा देंगे | हमें ना खौफ कोई तोप या संगीनों का लडे तो ईंट से फिर ईंट ही बजा देंगे || भारत […]
बरसों पहले बंटी थी मरकज से गणतंत्र के नाम पर कोई आजादी जैसी चीज चंद गिने-चुने रसूखदारो के बीच ये सिलसिला फिर यूँ ही साल दर साल चलता रहा झोपडी का वो स्वराज डरा सहमा […]
इस मंच से जुड़े सभी काबिल रचनाकारों के नाम- ****उड़ान भरने दो**** अपनी आगोश में ये आसमान भरने दो, ये नये परिन्दे हैं,इन्हें उड़ान भरने दो l ये जिन्दगी जीने का हुनर सीख जायेंगे, ज़रा […]
There was a time Totally Different form today Where people were slaves made to work all day It was 69 years ago They got out of this nightmare Carrying the tricoloured flag Freedom they […]
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये। गुलामी में भी हमारे दिल में देश की शान काफी थी, तोड़ देते थे होंसला अंग्रेजो का हममे जान काफी थी, पहनते थे कुर्ता और पाजामा खादी की पहचान काफी थी, […]
देख तिरंगे की लाचारी कैसे हर्शाएं हम आजादी पर कैसे नांचे कैसे झूमे गायें हम भारत माँ का झंडा जब पैरों के नीचे आता है और जहाँ अफ्जालों पर मार्च निकाला जाता है जिस […]
ऐक हजारों धरती माता, ऐक ही आसमान, मजहब के झगड़ों में क्यूँ उलझ रहा इंसान, यही मैं सोच -सोचकर हैरान, यही मेै सोच-सोचकर हैरान, भारी -भारी पत्थर लेकर मंदिर रोज बनाते हैं, उस पत्थर में […]
पाकिस्तान की औखात को देखकर ये भाव उठे, कोई गलती हो तो क्षमा करना — जल जला उठा वो सैनिक, जिसमें जान बाकी है, लहु से श्रंगार कर दुंगा, बस यही अहसान बाकी है, काफूर […]
मैं आर देख रहा था, मैं पार देख रहा था, बंद लतीफों की खड़े -खड़े मल्हार देख रहा था, सोचा था तंग आकर लिखूंगा ये सब,मगर ये क्या, कागज के टुकडों में दफन विचार देख […]
तिरंगा। वस्त्र का टुकडा़नहीं, अस्मिता का मान है। ये तिरंगा विश्व में निज गर्व की पहचान है। केसरी ये रंग पराक्रम शौर्य है स्वाभिमान है। श्वेत वर्णी शान्ति की ये साधना का ध्यान है। ये […]
आजादी की शान तिरंगा। तोड़ तिलस्म अंग्रेजों की , लेकर आया नवविहान तिरंगा। शमां ए वतन की लौ पर कुर्बान तिरंगा । हर हिन्दूस्तानी की जान तिरंगा। आजादी के इस पावन पर्व पर आओ मिल […]
यहाँ जिस्म ढकने की जद्दोजहद में… मरते हैं लाखों..कफ़न सीते सीते… जरा गौर से उनके चेहरों को देखो… हँसते हैं कैसे जहर पीते पीते… वो अपने हक से मुखातिब नहीं हैं… नहीं बात ऐसी जरा […]
लहू लुहान जिस्म रक्त आँख में चड़ा हुआ.. गिरा मगर झुका नहीं..पकड़ ध्वजा खड़ा हुआ.. वो सिंह सा दहाड़ता.. वो पर्वतें उखाड़ता.. जो बढ़ रहा है देख तू वो हिन्द का सपूत है.. वो दुश्मनों […]
लहू के हरेक बूँद से लिखी हुई कहानी है I मेरे हिन्द की आजादी की गाथा जरा निराली है II विश्वास की नदियाँ यहा, निश्छल सा प्यार था कभी रहते खुशी से सब यहा, न […]
कुर्बानी के दम पे मिली है आजादी •~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~•~• उनसे ज्यादा है किसी का कोई तो सम्मान बोलो जिसके आगे झुक गया है सारा हिन्दूस्तान बोलो मुक्ति के जो मार्ग पर निकले थे ले अरमान बोलो […]
नहीं तिरंगा मात्र ध्वजा ये जय का उदघोष भी है अमर शहीदों का प्रतीक बिस्मिल,भगत,बोस भी है उत्साह रगों में भरता यह क़ुरबानी को तत्पर करता हर देशभक्त हर राष्ट्रभक्त इस पर जीता इस पर […]
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