मैं लिखता हूँ मोहब्त को … मोहब्त की कलम से…. मैं भरता हूँ अपने ज़ख्मो को .. उसकी यादों की मरहम से… कुछ ही महफूज़ बची हैं , सांसे मेरी …. मैं ज़ी रहा हूँ […]
मैं लिखता हूँ मोहब्त को … मोहब्त की कलम से…. मैं भरता हूँ अपने ज़ख्मो को .. उसकी यादों की मरहम से… कुछ ही महफूज़ बची हैं , सांसे मेरी …. मैं ज़ी रहा हूँ […]
बरस ना जाये फिर नैना , तू दिल मे कैद कही वो अब्र कर ले.. तो क्या हुआ , अगर कुछ ख्वाईसे पूरी ना हुई तेरी …. तू अधूरी ख्वाईसों संग पूरा ये सफ़र कर […]
बढे जो मेरे हाथ, खुदा की तरफ़ दुनिया ने मुझे काफ़िर करार दे दिया नहीं समझी दुनिया, न वो खुदा मेरे सजदे को|
मोहब्बत के झरोखे से ये कैसी रोशनी आयी मुद्दत बाद हमनें आज फिर नज़रें उठायीं हैं कि हम तो सोच कर बैठे हि थे अन्जाम क्या होगा कि किसने आज यूं ऐसे हमें हिम्मत दिलायी […]
अकेले होने का यह मरहला मुसलसल है यहां किसी को किसी का ख्याल कब कुछ है
तू जाना नहीं इस दिल को छोड़, मेरी धड़कने बड़ी नक़लची हैं।।।।
इक अधूरापन है जो झांकता रहता है दिल की दरारों से| मचलता रहता है, मुकम्मल होने की ख्वाहिश में| कुछ यादें थी, अधूरी सी भीगना बारिश में कभी कभी| करवा ली है मरम्मत छत […]
ღღ__दरवाज़े की हर आहट पर, चौंक कर उठने वाले; . अक्सर तमाम रातों के, जागे हुए होते हैं !!…….#अक्स
कल खो दिया मैंने वो नायाब रत्न … जिसे पाने को हर इंसान करता है , ना जाने कितने प्रयत्न ….. This Gajal Dedicate to my grandfather ….. रंज की बार – बार दरवाज़े – […]
थोडी सी उदासी जमा कर ली है मुठ्टी भर दर्द को कैद कर रखा है दिल के इक कौने में कभी कभी इसी दर्द को घोलकर स्याही में बिखेर देता हूं उदास कागज़ पर […]
क्यों नहीं कहता जो फ़साना है तेरा ये कैसा बेमान अफसाना है तेरा क्यों बना बैठा है वो बुत जो पूजा जाये ये किसकी परस्ती है की वो छा जाये क्यों नहीं तोड़ता तू ये […]
तुम अपने गिर्द हिसारों का सिलसिला रखना मगर हमारे लिये कोई रास्ता रखना ज्यादा देर तक जुल्म नहीं सह सकता मैं अब अगर आयें कडे दिन तो दिल कडा रखना तुम्हारे साथ सदा रह सकें […]
छु न सके हथियार जिसे, उसे वो नजरो से घायल करते रहे,, हम भी बने हिम्मती इतने,, वो वार करते रहे, हम हलाल होते रहे!! कल तक मिल्कियत की जिसकी मिसाले देता था जमाना, उसे […]
हादसा ऐसा भी उस कूचे में कर जाऊं मैं कोई खिडकी न खुले और गुजर जाऊं मैं सुबह होते ही नया एक जजीरा लिख दूं आज की रात अगर तह में उतर जाऊं मैं मुन्तजिर […]
कभी कभी सोचता हूं कि हमने पत्थर को भगवान बनाया है या भगवान को भी पत्थर बना दिया
कम शब्दों में ज्यादा बात
यह कैसी जिंदगी है जो अपनी होकर भी परायी है भीड तो है चारो तरफ़ फिर भी हर तरफ़ फैली तन्हाई है
उसकी यादों की बारिश से , एक एक पल है यूँ भीगा…… किया है जब से दीदार – ए – रुख़ – ए – रोशन हो गए संजीदा….. क़दम रखा जैसे ही उसने दिल के […]
ये दुनियाँ बदल रही है, या बस हम बदल रहे हैं ; दौड़ बची है पैसों की, सब, सबसे आगे निकल रहे हैं ! यारियाँ है मतलब की, फर्ज अब हक़ में बदल रहे हैं […]
4 पंक्तियाँ :दिल से …
############################ दिल के बागों मे खुशबुयें ही खुशबुयें रह जायेंगी तूम चले जाओगे तुम्हारी यादें रह जायेंगी रहेगा सदा इन्तजार तेरा इन आंखो को दरवाजे ए दिल पर तुम्हारी दस्तकें रह जायेंगी आना था तुमको […]
VEKH BHAGAT SINGH ! tere supney’n da desh, jagah-jagah te painda, jaat-dharam da kalesh. ditti si jaan tu,taan jo desh azaad ho jaawe, naa ki mulk andr,gareeb-berozgaar pachtaawe, ” faansi da fandha aapne gll […]
जिंदगी एक बार दी है , ख़ुदा ने … फिर क्यों तन्हा रहते हो….. मैं हमराज़ हूँ , तेरे हर राज़ में .. फिर राज़ की बातें , आबो से क्यों कहते हो…… तेरी […]
A trial witrh Awadhi Language
क्या होगा. . . . . .❤ कभी सोचा है, कि जब तुझको, मेरी याद आई तो क्या होगा; ना हम होंगे, ना तुम होगे, और ना तन्हाई तो क्या होगा ! कि आकर […]
घर अँधेरे में अब ना किसी का रहे । चार सू रंग यूँ रौशनी का रहे । जगमगायें यहाँ सब महल झोपड़ी पर्व सबका ये दीपावली का रहे । घर ,मुहल्ले ,शहर खिल उठें […]
बिन माँ और पिता का एक बच्चा इसके सिवा सोचेगा भी तो क्या, कोई बेचे तो मैं हँसी खरीद लूँ खरीद लूँ वो गुड्डे गुड़िया जिनकी बंद आँखे भी हँसी देती है और खरीद लूँ […]
टूटता हूं फिर से जुड जाता हूं मैं पानी का आईना हूं घर से लिये हूं रात का सूरज कहने को मिट्टी का दीया हूं गले गले है पानी लेकिन धान की सूरत लहराता हूं […]
मिलती गर इज़ाज़त, थोड़ी सी मोहलत मांग लेता | पिंजरे की दाल छोड़कर, आसमानों की भांग लेता || चल पड़ता जहाँ बढ़ते कदम, मुड़ता बस नज़र की ओर | उतार देता थैला काँधे से , […]
चले जाओगे तुम ये सोच नहीं था हो जाएगें तनहा हम ये सोचा नहीं था हंसते हंसते बितायी थी जिंदगी हमने गम में ढ़ल जाएगी जिंदगी ये सोचा नहीं था तेरी आंखो के नशे मे […]
2122 1212 22 कुछ दिनों से खफा-खफा सा है । चाँद मेरा छुपा-छुपा सा है ।। कुछ तो जिन्दा है जिस्म के अंदर ; और कुछ तो जुदा-जुदा सा है । जब से’ […]
दीये जलने दो जरा कूछ उजाला हो जाए वैसे तो अंधेरे की आदत है आज कुछ अलग हो जाए जिंदगी गुजरी है सीधी सी आज रोकेट को कुछ टेडा कर के छोड देते है शायद […]
ए – ख़ुदा ….. जरा तू रौनक – ए – बाज़ार देख…. हर इंसान के चेहरे पर ….. मुस्कराहट का कारवाँ सिलसिलेवार देख ….. जरा एक निगाह , फ़लक पर डाल ….. नजारा […]
सुख़ , समृद्धि और ख़ुशहाली संग , माँ लक्ष्मी का पूजन हो … अपनों की , अपनों से , अपनेपन की बढ़ती चले मिठास …. और दूर सभी उलझन हो … जब दिखे […]
मय में भी नशा है…. लेकिन उस रुख़ – ए – रोशन की ख़ूबसूरती से कम नहीं… हूँ जब आज , मुस्कुराहट के आगोश में …. तो दिल कहे , अब कोई गम नहीं […]
ग़ैरों की बस्ती में , अपना भी एक घर होता.. अपने आप चल पड़ते कदम य़ु तन्हा ना य़े सफर होता…. वक्त बिताने को आवाज देती दीवारे साथ छुटने का ना कोई ड़र होता…. गैरों की बस्ती मे अपना भी एक […]
गायब हर मंजर मेरा ढूढ़े परिंदा घर मेरा जंगल में गुम फ़स्ल मेरी नदी में गुम पत्थर मेरा दुआ मेरी गुम सर सर में भंवर में गुम महवर मेरा नाफ़ में गुम सब ख्वाब मेरे […]
वह रहे कैदे जमां में जो मकीने आम हो लम्हा लम्हा जीने वालों का मक़ां कोई नहीं
ऐसी उठा पटक न देखी कभी, न ही सुने शब्द तीखे तर्रार कभी| ये तो entertainment का जमाना है भैया जो जि सब होत रहत है, वरना पब्लिक तो सब जानती है||
इक लौ थी जो जलती रहती थी करती थी रोशन अंधेरों को इक आफ़ताब आया कहीं से औ निगल गया उसे छोड गया अंधेरे में दुनिया को
*** उसको हमने कल तडपते हुए देखा था शायद उसकी यादें कल लोट आयी थी ***
तेरी सदा का है सदयों से इन्तेजार मुझे तेरे लहू के समंदर जरा पुकार मुझे मैं अपने घर को बुलंदी पे चढ के क्या देखूं उरूजे फन! मेरी देहलीज पर उतार मुझे उबलते देखी है […]
पुरानी जिंदगी कभी कभी जाग उठती है यादें आ जाती है याद बेवजह खारी लकीरें छोडकर रुखसारों पर न जाने कहां खो जाते है जज्बात मेरे लफ़्ज जो कभी जुबां पर आ ना पाये जो […]
KOI LOUTA DE MERE VO DIN JAB ME HANSTI THI POORE MAN SE KHELTI THI, LADTI – JAGADTI THI KABHI KABHI NARAZ HO JAATI THI KHUD SE HI BANATI THI HAR ROJ NAYE DOST […]
वो जो मुह फेर कर गुजर जाए हश्र का भी नशा उतर जाए अब तो ले ले जिन्दगी यारब क्यों ये तोहमत भी अपने सर जाए आज उठी इस तरह निगाहें करम जैसे शबनम से […]
!!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!! Chehre ko nakaab main chupaaye baithe ho khudh ko khudh se hi chipaaye baithe ho kab tak bachaate rahoge sachhai se khud ko ki apne dil main hummi ko […]
!!!!! SAGAR KI KALAM SE !!!!!! aaj bhi raaton ko karahne ki aawaz sunaai dete hai iss dil se jo barso pahle tora diya tha tumne aaj bhi jinda rakhe hue hun iss dil ko […]
एक और इंतजार सर्दियों के दिन कितने मासूम से दिखते हैं छोटे बच्चे की तरह ऊनी कपडे में लिपटे हुए तुम्हारे आने के दिन थे वो मैं देर तक पटरियों पर बैठे इंतज़ार सेंका करती […]
दुश्मनों की दोस्ती है अब अहले वतन के साथ है अब खिजाँ चमन मे नये पैराहन के साथ सर पर हवाए जुल्म चले सौ जतन के साथ अपनी कुलाह कज है उसी बांकपन के साथ […]
गाये जा गीत मिलन के तू अपनी लगन के सजन घर जाना हैं काहे छलके नैनों की गगरी, काहे बरसे जल तुझ बिन सूनी साजन की नगरी, परदेसिया घर चल प्यासे हैं दीप गगन के […]
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