किसी ने पूछा मुझसे, “सावन” पे लिखती हो, क्या मिल जाता है? मैनें कहा —– मुझे समझने वाले सखा, सखी हैं, समझते हैं, जो रचनाएं मैनें लिखी हैं। उनकी लिखी रचनाओं को भी पढ़ पाती […]

‘समझ में ये नही आता कि आरज़ू क्या है, है दिल भी पास अगर फिर ये जुस्तजू क्या है..? मैंने देखा है आज खून-ए-जिगर भी अपना, मैं सबसे पूछता फिरता था के लहू क्या है..? […]

लॉक डाउन का हम पति घर में रहकर शत-प्रतिशत सम्मान कर रहे हैं बीवी से जो भी मिली है ड्यूटी लिस्ट उसी के मुताबिक सारे काम कर रहे हैं ड्यूटी लिस्ट में खाना बनाना छोड़कर […]

थोड़ी देर और मस्ती करने दो क्योंकि आज रविवार है सपनों की दुनिया में खोने दो क्योंकि आज रविवार है जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुमसे चल रहने दे छोड़ सब क्योंकि आज रविवार है मुझे […]

एक बाबा बरसाने के, प्रतिदिन यमुना में स्नान कर के, दर्शन करते थे राधा – रानी के। जीवन का एक भाग यूं ही बिताया, एक दिन दर्शन करते – करते ,बाबा के मन में विचार […]

कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे, फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से। चैन सा आता है, बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है। ———— फकत मतलब केवल विज्ञान के अनुसार […]

जब मिली रोटी किसी ने नखरा दिखाया जब मिली रोटी किसी ने भूख को मिटाया यह कैसी माया है तेरी भगवान् जब मिली रोटी किसी को तु नज़र आया।

खुले में शौच से मुक्ति का दावा, बिलकुल निराधार घोषित करने से, कार्ययोजना लेती कहाँ आकार ।। स्वच्छ भारत अभियान का सच बताता ग्रामीण सङको के किनारे चलना मुश्किल होता ताजुब हमें तब होता, जब […]

मेरा गाँव ————– गाँव मेरा, हां वही गाँव है जहाँ सर्दी में धूप,गर्मी में शीतलता की छाँव है । अपनेपन का हर जङ चेतन से व्यवहार है हर गली हर टोले में छिपा अब भी […]

‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में, क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं.. कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे, मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’ – प्रयाग मायने : […]

गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है। यानी नारी ही देश की गंगा है।। इनके ही पवित्रता से । हर दिन नया प्रभात उगा है ।।

‘सबसे पहले मैं दुनियाँ में इस रिश्ते को पहचानती हूँ.. मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर, अपने पापा को जानती हूँ.. वो कहते हैं कि जान मेरी, मेरी गुड़िया में बसती है.. मैं कहती हूँ […]

हमने ज़माने से पूछा मैं बदनामी का बहुत बड़ा धब्बा हूँ क्या आपके शहर में पनाह मिलेगा मैं उम्मीद की कश्ती पे सेहरा बांध के आया हूँ ज़माना हंसते हुए कहा —- अरे यार सतयुग […]

पापनाशक भागीरथी को इन्सान ने मैला कर दिया। राम तेरी गंगा मैली’ को हमने कड़ी मेहनत से चरितार्थ कर दिया। धो रही थी अब तक जो हमारे पाप को अपने पुनीत कर्मों से हमनें उसकी […]

गंगाजल की भी अपनी ही महिमा है। तभी बिकने लगा है आजकल जाने किस मिट्टी का है इन्सान यहाँ ! मिट्टी तो छोड़ी नहीं अब गंगाजल भी नहीं छोड़ेगा। बात अच्छी भी है कि अब […]

भारतीय परिधान सजीला पहने जो भी लगे रंगीला। देखी मैने एक सुन्दर बाला हाँथों में चूड़ी, कानों में बाला। जुल्फें जिसकी काली-काली होंठों से टपक रही थी लाली। माथे पर थी नीली बिंदी होंठों पर […]

छोंड़कर बातें पुरानी कविता किया करो। सपनों में नहीं हकीकत में जिया करो। तोड़ दे दिल कोई तो खैर तुम उसकी मनाओ दिल के लिए अच्छा यही है कि पुरानी बातों पर मिट्टी डाल दिया […]

आँखों में घुमड़ते बादल कुछ कुछ कम होने लगे हैं, रास्तों में काई बिछाकर विदाई के निशान छोड़ने लगे हैं। फिसलन बहुत अधिक है, चप्पल का तल अलग से घिसा है, हाँ या ना के […]

कविता कहाँ, मैं झूठ लिखता हूँ मुझे पहचान लो दूसरों पर चोट करता हूँ मुझे पहचान लो। जब कभी कोई कराहे दर्द से फुटपाथ पर, नजरें चुरा लेता हूँ उससे , अब मुझे पहचान लो। […]

एक असुर के घर पर जनमा हरि का भक्त महान, उसने मां के गर्भ में ही ले लिया भक्ति का ज्ञान। आयु में छोटा था,नाम प्रहलाद था, किन्तु हरि पर उसको अटूट विश्वास था। कोई […]

सिद्ध अब यह हो गया है सब तरफ से हैं गलत हम, ठोकरें देते रहे हैं, दूसरों को हर बखत हम। भावनाएं खुद हमारी हैं गलत तुमसे कहें क्या खुद के खुद दोषी बने हैं […]

वक्त के सिकन्दर से पूछो दोस्त कितनी ताक़त है वक्त में । ठोकरें खा के भी वक्त को झुकने नहीं दिया इस ज़माने में।।

‘अब इतनी ऊँची अपनी हैसियत बना डाली, कभी न खत्म हो वो कैफियत बना डाली.. तेरी यादें, तेरी हसरत का वो एहसास जुदा, पुरानी चीज़ें थी बस मिलकियत बना डाली..’ – प्रयाग मायने : कैफियत […]

बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया , सब रिश्तों को बहा ले गया, तंगी कुछ ऐसी हुई कि, हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया, और जनाब!कोरोना तो वैसे ही; हैं बदनाम ;आजकल कोरोना से बुरा […]

हे प्रभु भक्त तेरा हूं, मत दे दुनिया की दौलत मुझको| दे जा मुझको अनमोल खजाना, ना इसके सिवा कुछ चाहत मुझको| कई पीढ़ियों से हाथ है सुना, दादा बाबा परदादा से | लाल दिए […]

तुम्हें नहीं मालूम , मगर मंसूबों को तेरे , मैं जान लेता हूं, रहता हूं परेशान, मगर; फिर भी खुद को हर हाल में , संभाल लेता हूं, और इत्तेफाक से तुम्हारी आंखों और लफ्जों […]

हर माँ शिशु के जीवन को संवारती खुद को खोकर, हर पहलू को निखारती । की कभी वह, स्वपहचान की भी अनदेखी कभी गहरी निद्रा पलकों पे इसकी नहीं देखी एक हल्की सी आहट, थोड़ी-सी […]