तुम्हारी सादगी ही तुम्हारी खूबसूरती है, उस पर कुछ लिखना चाहता है मन लेकिन जब तुम सामने होते हो रुक जाती है कलम तुम पर ही टिक जाते हैं नयन।
तुम्हारी सादगी ही तुम्हारी खूबसूरती है, उस पर कुछ लिखना चाहता है मन लेकिन जब तुम सामने होते हो रुक जाती है कलम तुम पर ही टिक जाते हैं नयन।
क्या लिखूं कुछ भी समझ आता नहीं कोई भी अल्फाज दिल को अब भाता नहीं.. लिख तो चुकी हूँ हजार दफा खत तुमको आज क्या लिखूँ खत में तुमको कुछ भी समझ आता नहीं.. सवाल […]
उम्मीदों ने ही किया घायल और उम्मीदों पे ही जिंदा था, इस उम्मीद- ए- जहां का मै एक मासूम परिंदा था।। कूट के भरा था दिल में प्यार प्यार का मै बंदा था, सादगी की […]
‘आज रह-रह के वही शख्स याद आता है, मैं उसे जब भी मनाता था, मान जाता था.. मेरे ज़ाहिर से ग़म भी आज ना दिखे उसको, जो बारिशों में मेरे आँसू जान जाता था..’ – […]
सावन की कमी पूरी हो गई, भादों में वर्षा की झड़ी हो गई। बदरा गरज गरज कर बरस रहे , निर्मल झरने कल कल कर बह रहे। बिजली चम चम कर चमक रही, मयूरी छम […]
आज बहुत उदास है दिल ये मेरा जब से तुम मेरे सामने से आकर गए लगता है कुछ छिन-सा गया है मेरा भूला तो दिया था मैंने कब का तुझे पर आज लगा जैसे गलत […]
‘ठहरे पानी के ही मानिंद अपनी फितरत थी, न जगह छोड़ी और न ही किनारे तोड़े..’ – प्रयाग मायने : मानिंद – तरह/समान
कोई जब जाता है, दूर कहीं, यादें छोड़ जाता है, पास यहीं। उससे कहो अपनी यादों से तो आ के मिल, एक बार ही सही, फिर पहले सा आ के खिल। यूं ही आजा एक […]
यूं ही नहीं चीर रहे हवाओं को जहाज हिंद के पाक की नापाक आंखों की तकरार जांचने बैठे हैं हम चीन की छोटी आंखों की गुस्ताखियां देखना चाहते हैं तभी आज घड़ी के कांटे की […]
मेरे देश पर भ्रष्टाचार की तलवार तो कुछ ऐसे पड़े थाली में भोजन से ज्यादा अब चमचे हिस्सा लेने खड़ी
#एक_लड़की_से_मैने_पुछा:- तुमने यह Artificial Ear #Rings_Locket_aur_Ring क्यों पहनी है। तुम्हारे Branded 👌🥼👕कपड़ो से तो तुम गरीब नहीं लग रही। #लड़की_बोली:- आज कल #असली गहने पहनने का जमाना नहीं, गली गली 🤺🤺चोर घुम रहे है। घरवाले […]
जो भी हो मन में, देखो कुछ भी छिपाना मत । मैं हर भावो को खुद ही समझ जाऊँगा देखो लोचन पे लाना मत । कभी तुमने ही कहा तो था सच बताने गर सच […]
हमें औरों सा ना समझ, आंखों से और बातों से, इरादों को भांप लेते हैं। ये झाड़ पर चढ़ाना, मीठी-मीठी बातें बनाना, यहां नहीं चलेगा, हम स्वार्थ की चाह को, दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच […]
मेरा दिल ही मेरा रक़ीब है, मैं भुलना चाहता हूं, उसे और ये याद करता रहता है।
तुम जाओगे ,कल नहीं; आज चलें जाओ, छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं, मगर काम ज़रा-सा करके जाओ, फिर कभी टोकूंगा नहीं। ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में, ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ, फिर […]
ये गिले -शिकवे कहूं तो मित्रता में लाजमी हैं, प्यार कम होगा नहीं, जो कल दिखे थे आज भी हैं।
‘देनी होगी ताकत अब दरख्तों को ज़िंदा रहने की, वो आज हमारी राख को मिट्टी समझ बैठे हैं..’ – प्रयाग मायने : दरख्तों को – पेड़ों को
अगर मैं गलत निकली तो कुछ भी हार जाऊंगी, लगा लो शर्त मुझसे तुम यकीनन हार जाओगे..
मेरी क्या मजबूरियां हैं कैसे बताऊं तुम्हें! मेरी सखियां भी कहती हैं तुम बात क्यों नहीं करती …
कैसे होगा ऐतबार उन्हें वफा पर मेरी, आजकल बहुत झूठ बोलती हो ! वो कहा करते हैं…
जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो? कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर तो एहसान जताते क्यों हो?
फौज की तादात बढ़ाने से कुछ नहीं होगा चीन जंग जीतने के लिए शेर-सा जिगरा होना चाहिए..
आजकल वह बड़ा बेचैन रहते हैं.. हम जो जरा हँसकर किसी से बोल देते हैं..
मेहनत करने वाले मंजिल को पा जाते हैं और बेचारे कामचोर गाल पीटते रह जाते हैं..
जो नाउम्मीदी की डगर से गुजरते हैं वो ही शक्स पतन की बात करते हैं..
मंजिल पाने के लिए मैंने किसी से खैरात नहीं मांगी.. अपनी मेहनत से बुलंदियां हासिल की हैं..
किसी ने पूछा मुझसे, “सावन” पे लिखती हो, क्या मिल जाता है? मैनें कहा —– मुझे समझने वाले सखा, सखी हैं, समझते हैं, जो रचनाएं मैनें लिखी हैं। उनकी लिखी रचनाओं को भी पढ़ पाती […]
बड़ी बदनामियां उठाने के बाद आज मैं फिर मुस्कुराई… एक अर्से के बाद जब मेरी जान लौट आई…
‘समझ में ये नही आता कि आरज़ू क्या है, है दिल भी पास अगर फिर ये जुस्तजू क्या है..? मैंने देखा है आज खून-ए-जिगर भी अपना, मैं सबसे पूछता फिरता था के लहू क्या है..? […]
लॉक डाउन का हम पति घर में रहकर शत-प्रतिशत सम्मान कर रहे हैं बीवी से जो भी मिली है ड्यूटी लिस्ट उसी के मुताबिक सारे काम कर रहे हैं ड्यूटी लिस्ट में खाना बनाना छोड़कर […]
मैं नारी हूँ , मैंने ऐसे महापुरुष देखे हैं नारी के सम्मान में खुद को युधिष्ठिर और दूसरों को दुःसाशन दिखाते देखें हैं।
थोड़ी देर और मस्ती करने दो क्योंकि आज रविवार है सपनों की दुनिया में खोने दो क्योंकि आज रविवार है जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुमसे चल रहने दे छोड़ सब क्योंकि आज रविवार है मुझे […]
एक बाबा बरसाने के, प्रतिदिन यमुना में स्नान कर के, दर्शन करते थे राधा – रानी के। जीवन का एक भाग यूं ही बिताया, एक दिन दर्शन करते – करते ,बाबा के मन में विचार […]
हम तो आपकी चाहत में , फ़लक से सितारे तोड़ कर लाए है । जरा चाँद से हो गई है नाराजगी, बस यही आपसे कहने आए है ।।
नाउम्मीदी से अश्क का गहरा रिश्ता है। तभी तो बने है वो आज का फरिश्ता।।
पत्थर समझ के ए ज़माना, मुझे ठोकर पे ठोकर न मार। कभी कभार पत्थर भी बन जाता है तलवार की धार।।
🌹🌹आते रहा करो हुकुम है हजूर का🌹🌹 अब कैसे कहें मिलने को हम खुद भी तरसते रहते हैं
कभी नाउम्मीद हो जाती हूं जब उनसे, फकत दो बूंद गिरती हैं मेरी आंख से। चैन सा आता है, बहुत पानी है बॉडी में ,मेरा क्या जाता है। ———— फकत मतलब केवल विज्ञान के अनुसार […]
जब मिली रोटी किसी ने नखरा दिखाया जब मिली रोटी किसी ने भूख को मिटाया यह कैसी माया है तेरी भगवान् जब मिली रोटी किसी को तु नज़र आया।
खुले में शौच से मुक्ति का दावा, बिलकुल निराधार घोषित करने से, कार्ययोजना लेती कहाँ आकार ।। स्वच्छ भारत अभियान का सच बताता ग्रामीण सङको के किनारे चलना मुश्किल होता ताजुब हमें तब होता, जब […]
मेरा गाँव ————– गाँव मेरा, हां वही गाँव है जहाँ सर्दी में धूप,गर्मी में शीतलता की छाँव है । अपनेपन का हर जङ चेतन से व्यवहार है हर गली हर टोले में छिपा अब भी […]
‘हैं जबकि और भी कितने ही दर ज़माने में, क्यूँ फकत मेरे ठिकाने को चली आती हैं.. कितने मौजूद मददगार हैं यहाँ तेरे, मुश्किलें बस ये दिखाने को चली आती हैं..’ – प्रयाग मायने : […]
आपको सपने में देखा क्या गलत देखा बताओ, दूर हमसे से हो गए हो, स्वप्न ही तो बन गए हो।
गंगा स्वच्छ है तो देश स्वच्छ है। यानी नारी ही देश की गंगा है।। इनके ही पवित्रता से । हर दिन नया प्रभात उगा है ।।
‘सबसे पहले मैं दुनियाँ में इस रिश्ते को पहचानती हूँ.. मैं खुद से भी ज़्यादा बेहतर, अपने पापा को जानती हूँ.. वो कहते हैं कि जान मेरी, मेरी गुड़िया में बसती है.. मैं कहती हूँ […]
हमने ज़माने से पूछा मैं बदनामी का बहुत बड़ा धब्बा हूँ क्या आपके शहर में पनाह मिलेगा मैं उम्मीद की कश्ती पे सेहरा बांध के आया हूँ ज़माना हंसते हुए कहा —- अरे यार सतयुग […]
पापनाशक भागीरथी को इन्सान ने मैला कर दिया। राम तेरी गंगा मैली’ को हमने कड़ी मेहनत से चरितार्थ कर दिया। धो रही थी अब तक जो हमारे पाप को अपने पुनीत कर्मों से हमनें उसकी […]
गंगाजल की भी अपनी ही महिमा है। तभी बिकने लगा है आजकल जाने किस मिट्टी का है इन्सान यहाँ ! मिट्टी तो छोड़ी नहीं अब गंगाजल भी नहीं छोड़ेगा। बात अच्छी भी है कि अब […]
भारतीय परिधान सजीला पहने जो भी लगे रंगीला। देखी मैने एक सुन्दर बाला हाँथों में चूड़ी, कानों में बाला। जुल्फें जिसकी काली-काली होंठों से टपक रही थी लाली। माथे पर थी नीली बिंदी होंठों पर […]
‘ दिल पर जो गुज़री थी उसे कुछ और ही रंग दे दिया मैंने, आजकल बहुत खुश हूँ किसी ने पूछा तो कह दिया मैंने..’ – प्रयाग
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