‘मैं खुद को ना पहचान सकी, ऐसी दुनियाँ में धकेल दिया.. उसमें नफरत भी बेहद थी, तेज़ाब जो तुमने उड़ेल दिया.. तुमने जो छीनी है मुझसे, मेरी पहचान वो थी लेकिन, मेरे भीतर जो सरलता […]

❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ _______________ बेइन्तहां मोहब्बत थी उनसे हमें एक छींक पर भी जान निकलती थी हमारी…. ना जाने क्यूँ उन्हें हमसे मोहब्बत ना हुई! इसमें भी शायद खता थी हमारी.. जब वो […]

नारी हूँ मैं मुझे इस बात का गर्व है… नारी का जीवन बसंत का पर्व है… अपने सुगंधित पुष्पों से नारी महकाती है घर-गगन हरियाली खुशियों की फैलाकर…. नित्य पल्लवित करती है सुमन… नहीं है […]

‘कुछ घुला था दर्द मुझमे, कुछ थे आँसू आ मिले, अब समझ आया कि क्यूँ मेरा लहू गाढ़ा हुआ.. वो पनप सकता था क्या अपनी ज़मीं को छोड़कर, जो दरख्तों की तरह था, जड़ से […]

मेरे प्रिय बापू रंग गोरा काला कहकर रंग भेद की आग जलती हैं,तबतब इस चिगांरी बुझाने को मसीहा तेरी कमी खलती हैं।तब तब आगे बढ़ने को प्रिय बापू आप मुझे प्रेरित करते हैं।। उँच नीच […]

तेरे प्यार का दर्पण हूं, मुझे पर रखना छोड़ दे| कब तक सताएगी तू मुझे, अब मुझे परखना छोड़ दे|(1) इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं| आ गले लगा […]

जिन राहों पर चैन नहीं उन राहों पर चलना ही क्यों। जो बातें ठेस लगाती हों उन बातों को करना ही क्यों। अपने पथ पर चलते जाना सबसे स्नेह करते जाना, पल पल मुस्काना, खुश […]

बादशाह बनने के लिए, कितने झूठ बोलोगे| जमाना आपका भक्त होगा, पर मेरी कलम की धार से रोओगे| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ मेरी कमी बताने का कष्ट करें

फालतू की योजनाओं में पैसा मत बहाओ साहब, ये गूल चार वर्ष पहले बन चुकी थी कागजों में, अब असली में मत बनाओ साहब। पाइपलाइन नप चुकी है एक बार रास्ता बन चुका है चार […]

या दहेज की मांग रखो या मेरी चाह रखो, दोनों में से एक चुनो धर्मपत्नी या सामान चुनो। सामान दहेज का कब तक खाओगे या भोगोगे, मैं तो जीवन भर साथ रहूँगी मरते दम तक […]

जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के भी उसके लिए शेर नहीं लिख पाया अब कोई उनसे […]

दुनिया पर आ पड़ी है विपदा भारी, चारो ओर से घेरे हुए है भीषण महामारी। चारो और संकटकाल का दौर है, सुपरपावर भी बिल्कुल मजबूर है। अर्थव्यवस्था का हाल बिल्कुल नीचे है, जैसे कछुआ गाड़ी […]

तेज़ बारिश से पूरी तरह तर होने के बावजूद मैं अपनी बाईक लेकर अपने ऑफिस से घर जा रहा था । सड़क पर गहरे हो चुके गड्ढों से जैसे ही मुलाकात हुई तो ऐसा लगा […]

जब मैं कली बन मुस्कुराई अली तब ही प्रियतम बन आए अली… घेरा मुझको बाहुपाश में डूब गई मैं प्रेमपाश में… प्रिय चले गए वनवास अली जब बिछोह की हवा चली… नित क्रंदन, रुदन करूं […]

अलगाव, अवसाद से निकलने को , तैयार हो अपनी सोंच बदलने को । खुद को आकने, अंतर्मन में झांकने को , नये हुनर सीख तैयार, बेहतर करने को । भविष्य की अनिश्चितता हमेशा से कायम […]

‘अब फकत एक ही चारा है बस दवा के सिवा, कोई सुनता, न सुनेगा यहाँ खुदा के सिवा.. खुदा के मुल्क में इक बस इसी की कीमत है, कोई सिक्का नही चलता वहाँ दुआ के […]

आज फ़िर मेघा बरसे, रिमझिम – रिमझिम, मन – मयूर नृत्य कर उठा, छ्मछम – छमछम। ठंडी – ठंडी पवन चली है, खिल उठे सारे वन – उपवन। वृक्ष भी नाचें ,झूम – झूमकर, लिपटी […]

हम दो जिस्म एक जान हो कर भी ज़माने को हम कहाँ झुका पाए आज फिर ज़माना मुहब्बत पे भारी पड़ी आखिरी बार भी तुम्हें कहाँ गले लगा पाए।

आज बहुत व्यथित थी बार-बार निगाहें दरवाज़े तक जाकर लौट आ रही थीं…. ना जाने कहाँ रह गए वो! मेरा बेचैन मन मुझे अधीर कर रहा था…. कहा तो था जल्दी ही आ जाऊंगा ना […]

भेदभाव की बातें छोड़ो भारत देश सजाओ ऐसे जिसमें सभी समान रूप से गुँथे हुए हों माला जैसे। जाति-धर्म के भेद हमारी एका को कमजोर कर रहे, वो छोटा मैं बड़ा कह रहे नफरत व्यापार […]

प्रेम विरह क्या सही है ,क्या गलत , ना जानू । पर आंखें  टपक- टपक नयन-जल बौछार में ; भीगा तनबदन, क्या करूं? क्या ना करूं ? ना जानू। नाराज़ हूं ;मैं खुद से पर […]

स्वप्नों के बीज पर ही कर्म फल लगते हैं स्वप्न सीढ़ियों पर चढ लक्ष्य के फल चखते हैं । बगैर स्वप्न देखे कहाँ हम आगे बढ़ते हैं बगैर इसके कहाँ उपलब्धियाँ हासिल करते हैं । […]

जिसके थोड़े से दर्द को देखकर बेचैन हो उठता है यह मन वही तो हो तुम, मेरे प्रियतम। जिसके थोड़े से आँसू देखकर पसीना पसीना हो जाता है तन वही तो हो तुम मेरे प्रियतम। […]

नई भोर है सूर्य का स्वागत करेंगे हम… खिड़कियों से पर्दे हटा किरणों से नहाएगे हम.. तितलियों के पंख से चुरा लेंगे तमाम रंग फीके आसमां पे जा नित नवीन चित्रकारी करेंगे हम.. सागर की […]

अभिमन्यु वध से व्याकुल अर्जुन जयद्रथ की कायरता  सुनकर के क्रोध से जल उठा। जल रही प्रतिशोध की आग को शांत करने चीखकर प्रतिज्ञा कर उठा । या तो सायंकाल तक जयद्रथ का मस्तक – […]

चल दिये क्यों फेर कर मुँह राह में हम भी खड़े थे, आपसे मिल लेंगे दो पल चाह में हम भी खड़े थे। मुस्कुराकर आपने गैरों में खुशियों को लुटाया, हम रहे तन्हा, गमों में […]

जीवनदायिनी चीजें ही तो अक्सर प्रचूरता में जिंदगानी ले लेती है अग्नि नित सब का चूल्हा चलाती भोजन को कितना मधुर बनाती अधिकता में स्वाद को ही मिटाती अनजाने में घर तक भी जलाती जल […]

ये राजनीति बड़ा ही मीठा जहर, मानवता पर बड़ा ढहाती कहर , होते दंगे ,बिखर जाती लाशें, फिर मिडिया हमारी, दिखाती दलाली, हाए! हिन्दू मर गया , हाए! मुस्लिम मर गया, पर कौन बताए? और […]

क्या तुम कभी यह भूल पाओगे क्या फिर कभी वापस आ पाओगे शायद तुम्हे आना पड़े, मजबूरी में मजबूरी बहुत कुछ करवाती है यह ही इन्सान को भटकाती है कैसे भूलोगे तुम, इस मीलों के […]

तुम कुछ बोलो ना बोलो, पर मुद्दे सारे सुलझ गए, सुनो देश के ग़द्दारों तुम गलत जगह पर उलझ गए । है तकलीफ तुम्हे ये के ‘अर्णब’ ने चिट्ठा खोल दिया, जो दूजा ना कह […]

‘बुझा गया है कोई, मैं चिराग था पहले, जो जगह आज बंज़र है, बाग था पहले.. बदल ली करवट कुछ इस कदर तकदीर ने, डरता हूँ आज धुएँ से, मैं आग था पहले..’ – प्रयाग

कठिन पथ पे चलकर, फतह हासिल करने की तू प्रतीक बन जा ! स्वमेहनत से कुछ ऐसा कर, सभी के मन की तू मुरीद बन जा ! अनेक रंगों से सजे, संग- संग गुजारे खट्टे- […]

बस अब और नहीं, गये अब दिन तुम्हारे हैं हमने हंस हंस के, जो अपनाये अंगारे हैं ये अंधेरे में सने पूनम की जो रातें हैं दिये तुमने, पर यही अब संग हमारे हैं । […]

एक छोटा सा सपना पूरा हुआ जब मेरा बेटा आर्यन आया तोतली सी बोली से जब तुमने मुझे पापा बुलाया दिल के सारे दर्द दूर हुए जब नन्हा चेहरा मुस्कुराया तू मेरा लाडला राजकुमार मेरा […]

‘उन्वान-ए-किताब-ए-ज़िन्दगी था रखा कुछ और, लिखा कुछ और, छपा कुछ और, दिखा कुछ और, पढ़ा कुछ और..’ – प्रयाग मायने : उन्वान ए किताब ए ज़िन्दगी – ज़िन्दगी की किताब का शीर्षक