छोंड़कर बातें पुरानी कविता किया करो। सपनों में नहीं हकीकत में जिया करो। तोड़ दे दिल कोई तो खैर तुम उसकी मनाओ दिल के लिए अच्छा यही है कि पुरानी बातों पर मिट्टी डाल दिया […]

आँखों में घुमड़ते बादल कुछ कुछ कम होने लगे हैं, रास्तों में काई बिछाकर विदाई के निशान छोड़ने लगे हैं। फिसलन बहुत अधिक है, चप्पल का तल अलग से घिसा है, हाँ या ना के […]

कविता कहाँ, मैं झूठ लिखता हूँ मुझे पहचान लो दूसरों पर चोट करता हूँ मुझे पहचान लो। जब कभी कोई कराहे दर्द से फुटपाथ पर, नजरें चुरा लेता हूँ उससे , अब मुझे पहचान लो। […]

एक असुर के घर पर जनमा हरि का भक्त महान, उसने मां के गर्भ में ही ले लिया भक्ति का ज्ञान। आयु में छोटा था,नाम प्रहलाद था, किन्तु हरि पर उसको अटूट विश्वास था। कोई […]

सिद्ध अब यह हो गया है सब तरफ से हैं गलत हम, ठोकरें देते रहे हैं, दूसरों को हर बखत हम। भावनाएं खुद हमारी हैं गलत तुमसे कहें क्या खुद के खुद दोषी बने हैं […]

वक्त के सिकन्दर से पूछो दोस्त कितनी ताक़त है वक्त में । ठोकरें खा के भी वक्त को झुकने नहीं दिया इस ज़माने में।।

‘अब इतनी ऊँची अपनी हैसियत बना डाली, कभी न खत्म हो वो कैफियत बना डाली.. तेरी यादें, तेरी हसरत का वो एहसास जुदा, पुरानी चीज़ें थी बस मिलकियत बना डाली..’ – प्रयाग मायने : कैफियत […]

बेबसी का सैलाब कुछ ऐसा आया , सब रिश्तों को बहा ले गया, तंगी कुछ ऐसी हुई कि, हर कोई हमसे; तंग-सा हो गया, और जनाब!कोरोना तो वैसे ही; हैं बदनाम ;आजकल कोरोना से बुरा […]

हे प्रभु भक्त तेरा हूं, मत दे दुनिया की दौलत मुझको| दे जा मुझको अनमोल खजाना, ना इसके सिवा कुछ चाहत मुझको| कई पीढ़ियों से हाथ है सुना, दादा बाबा परदादा से | लाल दिए […]

तुम्हें नहीं मालूम , मगर मंसूबों को तेरे , मैं जान लेता हूं, रहता हूं परेशान, मगर; फिर भी खुद को हर हाल में , संभाल लेता हूं, और इत्तेफाक से तुम्हारी आंखों और लफ्जों […]

हर माँ शिशु के जीवन को संवारती खुद को खोकर, हर पहलू को निखारती । की कभी वह, स्वपहचान की भी अनदेखी कभी गहरी निद्रा पलकों पे इसकी नहीं देखी एक हल्की सी आहट, थोड़ी-सी […]

‘मैं खुद को ना पहचान सकी, ऐसी दुनियाँ में धकेल दिया.. उसमें नफरत भी बेहद थी, तेज़ाब जो तुमने उड़ेल दिया.. तुमने जो छीनी है मुझसे, मेरी पहचान वो थी लेकिन, मेरे भीतर जो सरलता […]

❤❤ अभिव्यक्ति दिल से ❤❤ _______________ बेइन्तहां मोहब्बत थी उनसे हमें एक छींक पर भी जान निकलती थी हमारी…. ना जाने क्यूँ उन्हें हमसे मोहब्बत ना हुई! इसमें भी शायद खता थी हमारी.. जब वो […]

नारी हूँ मैं मुझे इस बात का गर्व है… नारी का जीवन बसंत का पर्व है… अपने सुगंधित पुष्पों से नारी महकाती है घर-गगन हरियाली खुशियों की फैलाकर…. नित्य पल्लवित करती है सुमन… नहीं है […]

‘कुछ घुला था दर्द मुझमे, कुछ थे आँसू आ मिले, अब समझ आया कि क्यूँ मेरा लहू गाढ़ा हुआ.. वो पनप सकता था क्या अपनी ज़मीं को छोड़कर, जो दरख्तों की तरह था, जड़ से […]

मेरे प्रिय बापू रंग गोरा काला कहकर रंग भेद की आग जलती हैं,तबतब इस चिगांरी बुझाने को मसीहा तेरी कमी खलती हैं।तब तब आगे बढ़ने को प्रिय बापू आप मुझे प्रेरित करते हैं।। उँच नीच […]

तेरे प्यार का दर्पण हूं, मुझे पर रखना छोड़ दे| कब तक सताएगी तू मुझे, अब मुझे परखना छोड़ दे|(1) इश्क किया हूं कोई गुनाह नहीं तुझे चाहा हूं क्या विश्वास नहीं| आ गले लगा […]

जिन राहों पर चैन नहीं उन राहों पर चलना ही क्यों। जो बातें ठेस लगाती हों उन बातों को करना ही क्यों। अपने पथ पर चलते जाना सबसे स्नेह करते जाना, पल पल मुस्काना, खुश […]

बादशाह बनने के लिए, कितने झूठ बोलोगे| जमाना आपका भक्त होगा, पर मेरी कलम की धार से रोओगे| ✍✍✍✍✍✍✍✍✍ मेरी कमी बताने का कष्ट करें

फालतू की योजनाओं में पैसा मत बहाओ साहब, ये गूल चार वर्ष पहले बन चुकी थी कागजों में, अब असली में मत बनाओ साहब। पाइपलाइन नप चुकी है एक बार रास्ता बन चुका है चार […]

या दहेज की मांग रखो या मेरी चाह रखो, दोनों में से एक चुनो धर्मपत्नी या सामान चुनो। सामान दहेज का कब तक खाओगे या भोगोगे, मैं तो जीवन भर साथ रहूँगी मरते दम तक […]

जब जब मैं कलम उठाना चाहा हसीन शेर लिखने के लिए उसने कहा लगता है मैं हो जाउंगी बदनाम शायद तुम्हारे लिए मैं चाह के भी उसके लिए शेर नहीं लिख पाया अब कोई उनसे […]

दुनिया पर आ पड़ी है विपदा भारी, चारो ओर से घेरे हुए है भीषण महामारी। चारो और संकटकाल का दौर है, सुपरपावर भी बिल्कुल मजबूर है। अर्थव्यवस्था का हाल बिल्कुल नीचे है, जैसे कछुआ गाड़ी […]

तेज़ बारिश से पूरी तरह तर होने के बावजूद मैं अपनी बाईक लेकर अपने ऑफिस से घर जा रहा था । सड़क पर गहरे हो चुके गड्ढों से जैसे ही मुलाकात हुई तो ऐसा लगा […]

जब मैं कली बन मुस्कुराई अली तब ही प्रियतम बन आए अली… घेरा मुझको बाहुपाश में डूब गई मैं प्रेमपाश में… प्रिय चले गए वनवास अली जब बिछोह की हवा चली… नित क्रंदन, रुदन करूं […]

अलगाव, अवसाद से निकलने को , तैयार हो अपनी सोंच बदलने को । खुद को आकने, अंतर्मन में झांकने को , नये हुनर सीख तैयार, बेहतर करने को । भविष्य की अनिश्चितता हमेशा से कायम […]

‘अब फकत एक ही चारा है बस दवा के सिवा, कोई सुनता, न सुनेगा यहाँ खुदा के सिवा.. खुदा के मुल्क में इक बस इसी की कीमत है, कोई सिक्का नही चलता वहाँ दुआ के […]

आज फ़िर मेघा बरसे, रिमझिम – रिमझिम, मन – मयूर नृत्य कर उठा, छ्मछम – छमछम। ठंडी – ठंडी पवन चली है, खिल उठे सारे वन – उपवन। वृक्ष भी नाचें ,झूम – झूमकर, लिपटी […]