अवसाद और निराशा को मत आने देना अपने पास, खुशी खोजकर जीवन जी ले मत होना तू कभी उदास। छोटा सा यह जीवन का पथ चलते रहना है बिंदास खुद की मेहनत पर विश्वास मत […]

जब से से देखा है उन्हें देखते रह गए हम, उनकी सूरत को नहीं उनके व्यवहार हो हम। वो सुलझी हुई बोली, हँसी का फुहार न्यारा सा शुद्धता आचरण की मिजाज प्यारा सा।

आज कैसे – कैसे हुए जज़्बात के रोना आया, बीती किसी बात पे रोना आया। एक दुखती रग है, गर दबा देता है कोई, नहीं मिलती उस दर्द से निजात पे रोना आया…

सब चाहते हैं, फिर से वो बचपन पाना, शरारत से भरी ऑंखें, और मुस्कुराना, पर मैं नही चाहती, वो बचपन पाना, डर लगता है, उस बचपन से, घूरती आँखों, और उन हैवानों से, अब है […]

कुछ पाया और कुछ खोया, क्यों मुझे इस बात पर रोना आया! क्यों बिछड़ते रहे अपने, क्यों अजनबियों के बीच मुझे रहना आया! सपनें टूटते बिखरते रहे, उसे समेटते दिल भर आया, कुछ खोया और […]

वो बेख़ौफ़ दिखाती है, अपनी पहचान, छिपती ही नहीं परदे के पीछे, रोका है उसे, टोका हैं उसे, छुपाया हैं, उसे, दबाया है उसे, फिर भी छिपती ही नहीं परदे के पीछे, और बेख़ौफ़ दिखाती […]

हम बंधते ही रहे, कभी विचारों तो कभी, दायरों के धागों से, सिमट कर रही जिंदगी, उसी चार कोनों के भीतर, जन्म से आजतक, बस दीवारों के रंग बदले, और लोगो के चेहरे, कभी इस […]

मैं चमकता-सा शहर हूँ, न रुकता हूँ, न थकता हूँ, मेरा कारवां न रुका है, वो फिर से दौड़ता है, एक रफ़्तार के बाद। हादसे तो मेरे भीतर की आम बातें हैं, मैं खीचता हूँ, […]

गंगा बहती है जहाँ *************** रीषिमुनियो की तपोभूमि बसती हैं वहाँ सबसे पावन भूमि है मेरी गंगा बहती है जहाँ ।। हरदिन से जुड़ी एक कथा, बयां होती है जहाँ हर कथा नैतिकता की पाठ […]

ये दृश्य मैंने ही इन आँखों में उतारा है, ये खुद नही मरी है मैंने इसे मारा है.. ये खुद नही मरी है मैंने इसे मारा है.. दो चार दिन से ही तबियत खराब थी […]

क्यों मैं बच गयी, उन कहरो से, भ्रूण हत्या, कुरीतियों, और अमावताओं से, मिट जाती मिट्टी में, न होती मेरी पहचान, न होती मैं बदनाम, न होती मैं हैवानों से दो चार, न होती यौन […]

कविता- बादशाह ——————— सजग प्रहरी बनने के लिए, फिर से कलम उठाया हूं… अब हमें रोक लो, लोकतंत्र के बादशाहो तुम! ना धरना पर बैठूंगा ना संपत में आग लगाऊंगा| बस कलम उठाया हूं- कलम […]

जो सोया है अन्धकार में जागेगा नवल प्रभात उठ-उठकर देखेगा किरणें सूर्योदय सम होगा ललाट रजत-चाँदनी में स्वप्न को नित पुष्पित कर देखेगा नारी सम्मोहन छोंड़ कवि अब प्रगतिवाद में चमकेगा बहुत हुआ प्रज्ञा! अब […]

मेरी मुहब्बत को उसने भरी महफिल में तमाशा बना दिया। मैने जब दी उसे तोहफ़ा, तब उसने ज़हरीली मुस्कान लेती हुई मेरे मुंह पे फेंक दिया।।

तीन साल का बिट्टू मेरा मुझसे था नाराज़, मैंने पूछा क्या हुआ है, गुमसुम क्यूं हो आज। बोला, मैं आपको अपनी शादी में नहीं बुलाऊंगा, हंसी रोक कर मैंने पूछा, क्या हुआ बताओ ना । […]

हे अज्ञानी मानव,  सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार,  फिर भी तू कड़े है वार l तुमको  शुद्ध आहार दिया,  मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया  […]

जन्म भूमि की ओर चलें ******************* इस बेगाने शहर में मरने से अच्छा अपनी जन्म भूमि की ओर चलें । भूख की जंग में मरने से अच्छा मिट्टी की सोनी खुश्बू के बीच रहें। एक […]

पूर्णिमा जब चांदनी धरती पर आकर पसारती है लगे चांदी के आभूषण से धरती का रूप सवारती है मां के पास आंगन में सोए नन्हे शिशु पर छांव करें उसे हरी समझ कर पूज गईं […]

आरोपों के कठघरे में खड़े हो चाहे, या प्रशस्ति पाने उठे हो पैर हमारे। प्रशंसाओं में कभी हम फूले नहीं, इल्जामों से चिंताओं में डूबे नहीं। कभी कभी पीठ पर खंजर भी खाए, पर कभी […]

भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु | कईला काहे हमसे अइसन तू प्यार बलमु | छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु | तोहरे बिना लउके हमके सगरो अनहरिया | अंसुवे मे डूबल […]

वो मेरा बहुत ख्याल रखता , मुझे भले-बुरे की पहचान कराता, जब भी संकट आता ,मुझे बचाता, मगर उससे ज्यादा , मैंने दूसरों से प्यार किया, पर,जब सबने ठुकराया, उसी ने मेरा हौसला बढ़ाया, बस […]

अब तक समझ नहीं पाया खुद को कि मैं प्यार का कवि हूँ या नफरत का। संयोग का कवि हूँ या वियोग का, उत्साह का हूँ या निरुत्साह का। लेकिन इतना समझ गया हूँ कि […]

तुम्हारी सादगी ही तुम्हारी खूबसूरती है, उस पर कुछ लिखना चाहता है मन लेकिन जब तुम सामने होते हो रुक जाती है कलम तुम पर ही टिक जाते हैं नयन।

क्या लिखूं कुछ भी समझ आता नहीं कोई भी अल्फाज दिल को अब भाता नहीं.. लिख तो चुकी हूँ हजार दफा खत तुमको आज क्या लिखूँ खत में तुमको कुछ भी समझ आता नहीं.. सवाल […]

उम्मीदों ने ही किया घायल और उम्मीदों पे ही जिंदा था, इस उम्मीद- ए- जहां का मै एक मासूम परिंदा था।। कूट के भरा था दिल में प्यार प्यार का मै बंदा था, सादगी की […]

‘आज रह-रह के वही शख्स याद आता है, मैं उसे जब भी मनाता था, मान जाता था.. मेरे ज़ाहिर से ग़म भी आज ना दिखे उसको, जो बारिशों में मेरे आँसू जान जाता था..’ – […]

सावन की कमी पूरी हो गई, भादों में वर्षा की झड़ी हो गई। बदरा गरज गरज कर बरस रहे , निर्मल झरने कल कल कर बह रहे। बिजली चम चम कर चमक रही, मयूरी छम […]

आज बहुत उदास है दिल ये मेरा जब से तुम मेरे सामने से आकर गए लगता है कुछ छिन-सा गया है मेरा भूला तो दिया था मैंने कब का तुझे पर आज लगा जैसे गलत […]

कोई जब जाता है, दूर कहीं, यादें छोड़ जाता है, पास यहीं। उससे कहो अपनी यादों से तो आ के मिल, एक बार ही सही, फिर पहले सा आ के खिल। यूं ही आजा एक […]

यूं ही नहीं चीर रहे हवाओं को जहाज हिंद के पाक की नापाक आंखों की तकरार जांचने बैठे हैं हम चीन की छोटी आंखों की गुस्ताखियां देखना चाहते हैं तभी आज घड़ी के कांटे की […]

#एक_लड़की_से_मैने_पुछा:- तुमने यह Artificial Ear #Rings_Locket_aur_Ring क्यों पहनी है। तुम्हारे Branded 👌🥼👕कपड़ो से तो तुम गरीब नहीं लग रही। #लड़की_बोली:- आज कल #असली गहने पहनने का जमाना नहीं, गली गली 🤺🤺चोर घुम रहे है। घरवाले […]

हमें औरों सा ना समझ, आंखों से और बातों से, इरादों को भांप लेते हैं। ये झाड़ पर चढ़ाना, मीठी-मीठी बातें बनाना, यहां नहीं चलेगा, हम स्वार्थ की चाह को, दिमाग़ से अपने; थोड़ा जांच […]

तुम जाओगे ,कल नहीं; आज चलें जाओ, छोड़ जाओ, रोकूंगा नहीं, मगर काम ज़रा-सा करके जाओ, फिर कभी टोकूंगा नहीं। ये यादें जो घर बनाएं बैंठी है दिल में, ज़रा मेहरबानी ! ले जाओ, फिर […]

जब तुम्हारे और मेरे रास्ते अलग हैं तो मेरे रास्तों में आकर कांटे क्यों बिछाते हो? कोई मोहब्बत नहीं है हमसे अगर तो एहसान जताते क्यों हो?