पत्थर को पत्थर से मारे तो क्या मारे ए दीवाने । दिल को जरा शीशे बना कर वार करो तो जाने।।
पत्थर को पत्थर से मारे तो क्या मारे ए दीवाने । दिल को जरा शीशे बना कर वार करो तो जाने।।
कुछ तो बेबसी रही होगी, जो राहों पर निकल पड़ा मज़दूर। ना साधन है ना रोटी है,, निज घर जाने को मजबूर। कुछ सपने लेकर आया था शहर, वो सपने हो गए चकनाचूर । कड़ी […]
हां मान लेता हूं , अब नहीं होता ,पहले जैसा, बार-बार वो इजहार करना , मगर मैं उस कस्तूरी-सा जो कपड़ा फट जाए , मगर खुशबू नहीं छोड़े।
प्रकृति की सुन्दरता इसलिए है कायम इसे कभी किसी से इश्क नहीं होता न ही ये कभी किसी के लिए रोता इसलिए शायद सबका प्यारा होता चांद और सितारे सदा थे और रहेंगे पेड़ पौधे […]
तपती धरती पर पड़े, जब बरखा की फुहार, सोंधी सुगन्ध से महके धरती, ठंडी चले बयार। मयूर नाचे झूम – झूम कर, बुलबुल राग सुनाए, तितली प्यारी आए सैर को, कोयल कुहू – कुहू गाए। […]
बेवफाई के बाजार में ए दोस्त वफाई नहीं मिलती। सब है यहाँ धोखेबाज़ कोई प्रेम कली खिलती तो कैसे खिलती ।।
तिनके से सिया ने रावण को डराया, तिनके में राम का स्वरूप दिखाया। श्रद्धा हो तो तिनके में भगवान बसते , नहीं तो मूर्तियों में ही पाषाण दिखते। तिनको से पक्षियों का घर बन जाता, […]
यूँ ना बाँटो नफ़रतों की पर्चीयां, गीत मोहब्बतों के भी लिखे जायेंगे। सितम चाहे कितने, भी कर लो, फूलों की ज़िद है, खिल ही जायेंगे। इतिहास जब भी, पढ़ा जाएगा, दर्शन आपके हर बार, किये […]
कभी खामोशी के साथ , चार कदम चल कर तो देखो ! अपने वजूद का एहसास; पल भर में हो जाता है।
बदल कर रख दी मैंने अपनी सारी आदतें , मगर तुम पत्थर ही रहे..
हम काटते ही नहीं , बुराइयों की जड़ें, पालते हैं ,पोषते हैं , कभी इच्छाओं के लोभ से, कभी रूपयों की चाह से, जब लगता है , वह जड़े हमें बांधती है, हम उठ खड़े […]
आंखों को बंद करने से, दुखों का मंजर छुप नहीं जाता। तब और उभर कर नजर आती है, उनकी गहराईयां।
होश अब नहीं रहा इंसानियत का, बेसुध से सब हो गए हैं , जाने कैसा है यह नशा अपने भी गुम हो गए हैं।
एक दिन दिल ने जब कहा , वहाँ दग़ाबाज़ों का बसेरा है। नादान चाहत से तब मैं कहा , संभल वहाँ जरूर कोई सपेरा है।।
कोयले को हीरा बनाने वाले। टूटे हुए तारे को चमकाने वाले।। शिक्षक हो आप। अंधेरे को रोशनी दिखाने वाले।। कोरे कागज में रंग भरे। रंगो को आकार दिए।। आकारों से शब्द,शब्दों से धर्म बनाने वाले। […]
हर जख्म छिपा करके हंसने की कोशिश कर रहा हूं| काश समझ लिया होता उसे भी, जो अब समझने की कोशिश कर रहा हूं|
अपनों का साथ मिले तो, हार में भी जीत है। अपनों का साथ हो तो, हर दिवस ख़ुशी का गीत है। है निशा का अन्धकार तो, एक दीपक साथ निभाएगा । तिमिर से अब भय […]
न बैठो दिल में मेरे इस तरह से आशा बन, कहीं न पा सकूं तो, दुःखी रहेगा मन। तुम्हारे साथ बिना रह नहीं सकता, तुम्हीं हो सांस मेरी तुम ही दिल की धड़कन।
अंधेरी रात में आशा एक चिराग हो तुम, इस बियाबान में संगीत का एक राग हो तुम।
कभी कहते थे जरा धीरे चल कभी कहते थे जरा सम्भल कर चल जनाब अब मौका यह है कि सब कहते है जरा चल तो सही इतनी थमी भी तो ठीक नहीं थोड़ा संतुलन बना […]
Meri Choti si koshish! You make me laugh You make me happy Because of you I smile You ease all problems for a while When thick clouds cover me With all darkness and thunder You […]
वक्त थम सा गया, और ज़िन्दगी चलती रही। तेरी याद बहुत आई, तेरी कमी खलती रही। फ़िर ढूंढ़ने निकल पड़े तुझे, आंख के आंसू मेरे। खैर, तू मिला नहीं, पर मिलने की आस पलती रही।
अवसाद और निराशा को मत आने देना अपने पास, खुशी खोजकर जीवन जी ले मत होना तू कभी उदास। छोटा सा यह जीवन का पथ चलते रहना है बिंदास खुद की मेहनत पर विश्वास मत […]
जब से से देखा है उन्हें देखते रह गए हम, उनकी सूरत को नहीं उनके व्यवहार हो हम। वो सुलझी हुई बोली, हँसी का फुहार न्यारा सा शुद्धता आचरण की मिजाज प्यारा सा।
आज कैसे – कैसे हुए जज़्बात के रोना आया, बीती किसी बात पे रोना आया। एक दुखती रग है, गर दबा देता है कोई, नहीं मिलती उस दर्द से निजात पे रोना आया…
सब चाहते हैं, फिर से वो बचपन पाना, शरारत से भरी ऑंखें, और मुस्कुराना, पर मैं नही चाहती, वो बचपन पाना, डर लगता है, उस बचपन से, घूरती आँखों, और उन हैवानों से, अब है […]
कुछ पाया और कुछ खोया, क्यों मुझे इस बात पर रोना आया! क्यों बिछड़ते रहे अपने, क्यों अजनबियों के बीच मुझे रहना आया! सपनें टूटते बिखरते रहे, उसे समेटते दिल भर आया, कुछ खोया और […]
वो बेख़ौफ़ दिखाती है, अपनी पहचान, छिपती ही नहीं परदे के पीछे, रोका है उसे, टोका हैं उसे, छुपाया हैं, उसे, दबाया है उसे, फिर भी छिपती ही नहीं परदे के पीछे, और बेख़ौफ़ दिखाती […]
हम बंधते ही रहे, कभी विचारों तो कभी, दायरों के धागों से, सिमट कर रही जिंदगी, उसी चार कोनों के भीतर, जन्म से आजतक, बस दीवारों के रंग बदले, और लोगो के चेहरे, कभी इस […]
मैं चमकता-सा शहर हूँ, न रुकता हूँ, न थकता हूँ, मेरा कारवां न रुका है, वो फिर से दौड़ता है, एक रफ़्तार के बाद। हादसे तो मेरे भीतर की आम बातें हैं, मैं खीचता हूँ, […]
गंगा बहती है जहाँ *************** रीषिमुनियो की तपोभूमि बसती हैं वहाँ सबसे पावन भूमि है मेरी गंगा बहती है जहाँ ।। हरदिन से जुड़ी एक कथा, बयां होती है जहाँ हर कथा नैतिकता की पाठ […]
ये दृश्य मैंने ही इन आँखों में उतारा है, ये खुद नही मरी है मैंने इसे मारा है.. ये खुद नही मरी है मैंने इसे मारा है.. दो चार दिन से ही तबियत खराब थी […]
क्यों मैं बच गयी, उन कहरो से, भ्रूण हत्या, कुरीतियों, और अमावताओं से, मिट जाती मिट्टी में, न होती मेरी पहचान, न होती मैं बदनाम, न होती मैं हैवानों से दो चार, न होती यौन […]
कर ले ख्वाईश पुरी जो आज तुम्हारे दिल में है। क्या पता कल मैं रहूं या न रहूं ए किसने देखा है।।
कविता- बादशाह ——————— सजग प्रहरी बनने के लिए, फिर से कलम उठाया हूं… अब हमें रोक लो, लोकतंत्र के बादशाहो तुम! ना धरना पर बैठूंगा ना संपत में आग लगाऊंगा| बस कलम उठाया हूं- कलम […]
कहीं खुशियों के दीप जले, कहीं अरमान भरे दिल। कहीं पे हो गईं, राहें लंबी, किसी को मिली मंज़िल।
जो सोया है अन्धकार में जागेगा नवल प्रभात उठ-उठकर देखेगा किरणें सूर्योदय सम होगा ललाट रजत-चाँदनी में स्वप्न को नित पुष्पित कर देखेगा नारी सम्मोहन छोंड़ कवि अब प्रगतिवाद में चमकेगा बहुत हुआ प्रज्ञा! अब […]
चलो हम फिर नारी पे, एक सुंदर कविता रचे। नारी जीवन से प्रेरित रचना ही कविता में सजे।।
मेरी मुहब्बत को उसने भरी महफिल में तमाशा बना दिया। मैने जब दी उसे तोहफ़ा, तब उसने ज़हरीली मुस्कान लेती हुई मेरे मुंह पे फेंक दिया।।
अरमान जो सो गए थे , वो फिर से जाग उठे हैं जैसे अमावस की रात तो है , पर तारे जगमगा उठे हैं… बहुत चाहा कि इनसे नज़रें फेर लूँ पर उनका क्या करूँ, […]
तीन साल का बिट्टू मेरा मुझसे था नाराज़, मैंने पूछा क्या हुआ है, गुमसुम क्यूं हो आज। बोला, मैं आपको अपनी शादी में नहीं बुलाऊंगा, हंसी रोक कर मैंने पूछा, क्या हुआ बताओ ना । […]
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हे अज्ञानी मानव, सुन ले मेरी पुकार, तेरी हूँ मैं पालनहार, फिर भी तू कड़े है वार l तुमको शुद्ध आहार दिया, मुझको प्लास्टिक की पहाड़ दिया, तुझको जीवनदायी पानी दिया, तुमने उसमें जहर मिलाया […]
जन्म भूमि की ओर चलें ******************* इस बेगाने शहर में मरने से अच्छा अपनी जन्म भूमि की ओर चलें । भूख की जंग में मरने से अच्छा मिट्टी की सोनी खुश्बू के बीच रहें। एक […]
पूर्णिमा जब चांदनी धरती पर आकर पसारती है लगे चांदी के आभूषण से धरती का रूप सवारती है मां के पास आंगन में सोए नन्हे शिशु पर छांव करें उसे हरी समझ कर पूज गईं […]
बेजान नजरे जा टिकी थी उसके चेहरे पर जब जिस्म से जान ये जुदा हो गई तड़प रहे थे हम मरने के बाद भी यह मासूम आंखें किस कदर रो गई दिल तो किया फिर […]
आरोपों के कठघरे में खड़े हो चाहे, या प्रशस्ति पाने उठे हो पैर हमारे। प्रशंसाओं में कभी हम फूले नहीं, इल्जामों से चिंताओं में डूबे नहीं। कभी कभी पीठ पर खंजर भी खाए, पर कभी […]
भोजपुरी बिरह गीत – करी केकेरा प सिंगार बलमु | कईला काहे हमसे अइसन तू प्यार बलमु | छोड़ी दिहला हमके तू मजधार बलमु | तोहरे बिना लउके हमके सगरो अनहरिया | अंसुवे मे डूबल […]
वो मेरा बहुत ख्याल रखता , मुझे भले-बुरे की पहचान कराता, जब भी संकट आता ,मुझे बचाता, मगर उससे ज्यादा , मैंने दूसरों से प्यार किया, पर,जब सबने ठुकराया, उसी ने मेरा हौसला बढ़ाया, बस […]
अब तक समझ नहीं पाया खुद को कि मैं प्यार का कवि हूँ या नफरत का। संयोग का कवि हूँ या वियोग का, उत्साह का हूँ या निरुत्साह का। लेकिन इतना समझ गया हूँ कि […]
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