बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

बधाई हो यशोदा मैया आयो कान्हा तेरे द्वार सुर नर मुनि करते स्वागत है बारम्बार । जन्म लियो मथुरा जेल गृह में पोषित भये देवकी के गर्भ में आये दुष्ट कंश के करन संघार बधाई […]

बहुत कष्ट सहे जिनका गोकुल में जन्म हुआ दुष्ट के साथ कूटनीति, गीता का ज्ञान दिया ना जाने कितने असुरों ने मारने का प्रयास किया फिर भी इतिहास रचा ,धर्म और प्रेम को मान दिया […]

मैने वो तस्वीर फाड़ दी जिस तस्वीर को देख कर, हम कभी बेहतरीन ग़ज़ल लिख लिया करते थे। हकिक़त जब सामने आई तस्वीर को जोडना चाहा , तस्वीर ने कहा मुहब्बत के मामले तुम बहुत […]

कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार ! जनमाष्टमी आए सबके जीवन में हर बार ! मोर मुकुट तेरो सिर पे सोहे तू जन -जन के मन मोहे तेरो महिमा अपरमपार कान्हा तेरो स्वागत है बारम्बार! देवकीसुत […]

मै और मेरी मां तेरा ये शहर जाना,मुझे बीमार कर गया, वेद ने लिखा औषधि में,तेरा दीदार चाहिए।। अधूरा सा ही हूं, मै भी तेरे बिन, पर इस जिंदगी को मां,थोड़ा मुकाम चाहिए।। मुकाम भी […]

कहीं खो गया है आभासी दुनिया में आदमी झुंठलाने लगा है अपनी वास्तविकता को आदमी परहित को भूलकर स्वहित में लगा है आदमी मीठा बोलकर ,पीठ पर वार करता है आदमी चलता जा रहा है […]

भोजपुरी गजल- जान जिआन हो जाई | दिल लगाके जनी ठुकरावा जान जिआन हो जाई | मनके बात भइबो ना कइल राती बिहान हो जाई | चार दिन के जिनगी के केवन जान बा ठिकाना […]

आज वे भी चले गए उस यात्रा में जहाँ से फिर कोई लौट कर नहीं आता है। अक्सर बीमार ही रहते थे जब से सेवानिवृत होकर घर लौटे थे, तब से बीमार ही तो देखे […]

राम हैं दयाल जग मैं, राम ही कृपाल हैं राम ही कवच हैं मेरे, राम मेरी ढाल हैं.. जिसका एक बाण सागरों को भी सुखा सके, कोई कण नही कि जिसमे राम ना समा सकें […]

फूलों ने जब साथ दिया, मैं भी महकना सीख गया चिड़ियों ने जब साथ दिया, मैं भी चहकना सीख गया चलना गिरना, गिरकर चलना, लगा रहा यह जख्मो भर पापा की जब उंगली थामी, तब […]

कभी माँ का प्यार तो कभी बहन का प्यार। यही प्यार के रिश्ते में बना है हमारा घर संसार।। काश!!! यह पवित्र रिश्ते हम में नहीं होते। जरा सोचो, कैसे चल पाता हमारा घर संसार […]

आज मेरी मां के चेहरे पर मायूसी छाई है फिर भी देख कर मुझे वह मुस्कुराई है मेरी रोटी के खातिर जल जाते थे जो हाथ पहली बार मां के उन हाथों मे कम्पन अाई […]

तीसरी मुलाक़ात दूजी मुलाक़ात जब से हुई जज्बातों में चिंगारी सुलग रही, बाट बेसब्री से जिसकी जोह रहे घड़ी आखिर वो आ ही गई।। वक़्त से पहले हम पहुंचे वो भी वक़्त पर आ गए, […]

एक खरोंच भी लगे तो दर्द होता है तो कैसे उसने ख़ुद अपनी जान ली होगी नक़ाब के पीछे छिपे है चेहरे कई मिलके उन काफ़िरों ने साज़िश की होगी उसकी मुस्कान बताती है कितना […]

रात थी गहरी, काली, अंधियारी जब जन्मे थे, गोपाल – गिरधारी। भाद्रपद का मास था, कृष्णा पक्ष की अष्टमी, दिन, उस दिन बुधवार था, नक्षत्र था रोहिणी। वसुदेव, देवकी के खुल गए ताले, सो गए […]

वो मुकाम पाऊँ! बस एक ही तमन्ना है जीतेजी ही नहीं मरके भी सबो के काम आऊं सारी खुबिया हो मुझमें पसंद बनू हर मन की वो मुकाम पाऊँ ! दिया तो बहुत कुछ है, […]

मेरे भारत की युवा शक्ति तू जाग नया, उत्साह जगा ले, मन में मत रख हीन भावना प्रगति पथ पर कदम बढ़ा ले। अपनी पुरातन संस्कृति का नवयुग से तालमेल करा ले, सच्ची में तू […]

वैसे नींंद नहीं आती , आजकल मुझे। जबसे देखा हैं , हमदम तुझे किस्मत में हैं, या नहीं तू पर कोशिशें  करता हूँ , अब सो जाने की काश इक पल सपनों में ही , मिल जाए […]

याद आते हैं वो पल जो बिताये साथ तेरे अब नहीं रौनक रही तेरे बिना कुछ पास मेरे। खोजता हूँ पल वही बीते दिनों को ढूंढता हूँ , अवसर गंवाकर खो दिया तू शून्य है […]

था आंखों मै तेरी जादू या नज़रों का मेरी कसूर था। हां मेरे दिल ने तुम्हें चाहा पर तुमको भी ये मंजूर था।। गुमशुदा गर मै हुआ कभी तो , वो तुम्हारा ख्याल था। तुम्हारे […]

कविता- दुआ बदुआ या समझ, या दुआ तु समझ| जैसा कहके है छोड़ी मुझे, वैसा पाके समझ| जो दिया है मुझे, वही देता तुझे| खुशियाँ है ना मिली, ना मिलेगी तुझे| रोता रहता था मै, […]

एक दिन, ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, अपने वजूद को ; गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं मैं? लिंग ,नाम, पहचान , गौत्र, जाति ,धर्म,देश, सब पर […]

एक दिन ऐसे ही मैंने कोशिश की , खुद को खुद में ढूंढने की, वजूद को गहराइयों में टटोलने की, अरे! कौन हूं मैं? लिंग ,नाम, पहचान ,गौत्र, जाति ,धर्म,देश सब पर विचार किया, फिर […]

इंसान एक कठपुतली है ,जो वक्त के हाथों चलती है आती जाती सांसों पर ,वक्त की गिनती रहती है वक्त जब अंगड़ाई लेता है ,सूर्य ग्रहण लग जाता है वक्त सौदागर होता है ,प्रतिपल जीवन […]

आये टोली ले मक्खन खिलाने को आये कान्हा ले अपने संग संगत को देखि मोहे कान्हा को छोड़ चलन छिप गये परदे के पीछे आज पकड़ में आया कान्हा मक्खन गिराये कान्हा भूमि पर

जीवन गढ़ने का अधिकार कहाँ *******************? इन्सान हैं कुछ भी मुश्किल नहीं चाह ले अगर क्या मुमकिन नहीं लव कुछ भी कहे चाहे जैसे भी रहे पर मन से वो हमेशा साथ रहे अपने हमेशा […]

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त […]

प्यारी सी एक परी, जिसका जादू हर ओर चला है। मेरे भईया-भाभी का घर, जिसने खुशियों से भरा है। मुस्कान जिसकी, दुनियां से न्यारी है। सुरत भी देखो, कितनी प्यारी है। दादी-बाबा, मम्मी-पापा और हम […]

🍀🌹🙏सादर प्रणाम आप सभी सम्मानित जनों को 🍀🌹🙏,,,,,,,,,,कर्ष्ण लीला,,,,,,,, 🍀🌹🙏 तेरी लीला है अपरंपार,, ओ जग के हे पालनहारा ,,,,,,🌻🌻 जनम लियों है मथुरा बीच मैं,,,, तेरे नैन (आखं) खुल्यों है गोकुल मां,, 🍀🌸 मुक्त […]

आज जितना भी बरसता है बरस जाने दो, फिर तो सावन भी चला जायेगा, सींच कर कोना-कोना धरती का फिर तो सावन भी चला जायेगा। आज जितना भी चाहो भीगो तुम प्यार ही प्यार भरा […]

दोष नहीं दर्पण का थोड़ा सदा सत्य दिखलाता है। कपटी क्रूर कपूत घमण्डी दर्पण को दोषी कहता है।। सत्य असत्य के चक्कर में पत्थर से पंगा मत लेना। देख ‘विनयचंद ‘सीसा हो तुम इसको मत […]

41: महत्वाकांक्षा की क्षुधा ******************* अपनी जिद की बलि वेदी पर, नौनिहालो को कुर्वान मत होने दो । अपनी महत्वाकांक्षा की क्षुधा को , बस शान्त रहने दो ।। अधूरे स्वप्न अपने वंश के , […]

एक तो तुम बड़ी मुश्किल से मुस्कुराती हो, दूसरा मन ही मन में सारे गम छुपाती हो। जब कभी चाँद को बादल चुरा सा लेता है, तब हमें रोशनी बन रास्ता दिखाती हो।

यशोदा प्यारे कृष्ण कहें यशोदा मैया कान पकड़ कान्हा से तंग हुई मैं लल्ला अब तेरे शरारत से सुनो लल्ला माखन चोरी की आदत छोड़ो मेरे प्यारे कृष्ण मुरारी मटकी ना फोड़ों छूप-छूप कर तुने […]

बचपन की एक प्यारी छवि, जो आज तुम्हें मैं बतलाता हूं। मन कल्पना के दर्पण में, उसे देख मैं सुख पाता हूं। गांव की वह प्यारी गलियां, जिसमें बचपन का नटखटपन है। खट्टे मीठे ताने […]

*कृष्ण लीला* तू दधि चोर तो; तोही न छोडूं, पकड़ बांह तोरे; कान मरोड़ूँ ! लल्ला मेरो मोही हिय ते प्यारा तोसे कुढ़त गोकुल ब्रिज सारा *खा सौं अब तू मोरी,* *न करिहउँ अब मै […]

ओ मैया! मोरी पीर बड़ी दुखदायी सब कहें मोहे नटवर-नागर माखनचोर कन्हाई। तेरो लाला बरबस नटखट कब लघि बात छपाई। ओ मैया! तेरो कान्हा माखन बिखराई। सो खावत सो माखन-मिसरी ग्वालन खूब खिलायी। फोड़ दई […]