हरसिंगार ———– रात भर महकता, संवरता करता इंतजार, तड़प कर बिखर जाता धरा पर …. होकर बेकरार। खिल जाती धरा, मुस्कुराकर कहती आओ केसरिया बालम हरसिंगार!
हरसिंगार ———– रात भर महकता, संवरता करता इंतजार, तड़प कर बिखर जाता धरा पर …. होकर बेकरार। खिल जाती धरा, मुस्कुराकर कहती आओ केसरिया बालम हरसिंगार!
जिंदगी ——— हर किसी को खुश रख सके… यह तो भगवान के भी बस की बात नहीं। किसी के लिए अच्छे हैं तो किसी के लिए बहुत बुरे भी। तो हार जीत से डरना कैसा! […]
तृप्ति —— वाग्देवी सरस्वती लड़खड़ाती जब निकलती हैं पहली बार बोलते किसी बालक के स्वर से… तो रसिक की तरह निहाल हो जाते हैं हम सब। वह पहला मधुर स्वर सुनने को लालायित, हमारे कान […]
अनर्गल पक्षियों की चहचहाहट हमें शोर महसूस होती है जिस ध्वनि को सुनना हमारा मन गंवाया न करें वे सभी शोर हैं
शरद ऋतु का आगाज़ —————————- लंबी हो चली रात , कोहरा और बरसात। ऐसे में तेरा साथ, रूमानी एहसास। गुलाबी होठों के खुलते ही गर्म सांसों की आवाज़। कोहरे की चादर ओढ़े सूरज की तबीयत […]
थोड़ा सा कुछ —————— घर एक कारखाना, काम करते-करते.. थोड़ा सा कुछ रह ही जाता है। तन- मन से बढ़िया से बढ़िया करने के बाद, मुस्कुराहट के साथ परिवारी जनों की प्रतिक्रिया जानने के लिए […]
वह गुनगुनी धूप सी तेरी हंसी, मानो गुलाब की पंखुड़ियां एक साथ झड़ी। मधुर अधर सकुचाये से शरमाये से बेकरार दिल ये उड़ा जाए रे। निमिषा
एक झलक और मुस्कुराहट तुम्हारी, देती रहें खुशियां.. न हो युद्ध की तैयारी। धड़कनें राग बजाती रहें, अभी जिंदा है हम… यह जताती रहे। रौंनके बरकरार रहे, क्या बात हो अगर .. ता उम्र .. […]
लम्हें —– कुछ गहरे घाव से दुखते होंगे, कुछ गहरे तंज जो आज भी चुभते होंगे। कुछ वक्त के मरहम से भर चुके होंगे, कुछ सुगंधित फूल से महकते होंगे। कुछ लम्हें तोहमतें, कुछ तोहफों […]
पुनर्स्थापना ————- गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिक और राजा राममोहन राय नहीं जानते होंगे की कुप्रथा पर रोक लगाने के बाद भी…. वे नहीं रोक पायेंगे उन्हे। बस चोला बदल पुनर्स्थापित कर दी जाएंगी अलग-अलग […]
सफलता ———– बुझ रहे हो दीयें सारे, ओट कर.. जलाए रखना। जल विहीन भूमि से भी, तुम…. निकाल लोगे जल.. विश्वास को बनाए रखना। अंधकार व्याप्त हो.. सूर्य की तलाश हो, मार्ग जुगनूओं की रोशनी […]
ऊर्जा स्रोत ————- प्रिय! विद्युत सी है वाणी.. चल पड़ती है तो कानों में घुल… रूपांतरित हो जाती है मेरी हंसी और क्रोध में अनायास। याद दिला ही देते हो तुम “जूलियस रॉबर्ट मेयर”की… ऊर्जा […]
दस्तावेज ———– दबे पांव तृष्णायें घेर लेती है एकांत पा, विचारों की बंदिनी बन असहाय हो जाती है चेतना। अवचेतन मन घुमड़ने लगता है बादल बन, लहलहाने लगती है विचारों की फसल। ऋतु परिवर्तित हो..बसंती […]
जिंदगी प्रतिक्षण अंतिम पड़ाव की ओर कदम बढ़ाती है इस सच को हम भूलना चाहते हैं पर किसी न किसी की मौत हमें यह सच बार-बार दिखाती हैं मृत्यु का डर बार-बार हमें अच्छे बुरे […]
ज़ुबान तेज हो तो शूल सी चुभती है बहुत चुभन के दर्द से लोगों को बचाए रखिये। जिंदगी ठहरी है न ठहरेगी कभी, प्यार के दीप, फिजाओं में जलाए रखिए। मौत आगोश में ले लेगी […]
ज्ञान का घेरा, मज़हब का अंधेरा। अतंर! शांति और युद्ध जितना। निमिषा
कवि की अकुलाहट बोल रही, बिन लिखे कलम दम तोड़ रही। रचनाएं हैं अनमोल सभी, सिक्कों से इनकी तोल नहीं। निमिषा
मौन रही गर कलम कवि की, दम उसका घुट जाएगा। चेहरे से जिंदा दिखता हो, अंदर,भीतर मर जायेगा। निमिषा
क्रूर व्यवहार अच्छे खासे इंसान को भी कहलवा देता है “जानवर कहीं का”। इंसान का जन्म है इंसान ही रहिए जानवर बनने की कोशिश न करिए। निमिषा
मृगमरिचिका मृगतृष्णा यह जीवन सारा तृष्णा में डूबा जाता है, तृष्णाग्रस्त हो खोया रहता है, हाथ नहीं कुछ आता है। मरुभूमि में उज्जवल जल सा… बार-बार बहकाता है। कस्तूरी की तरह दिशाविहीन हो भटका- भटका […]
महफिल ———- महफिल में हंसते चेहरे भी. … अक्सर बेचैन से रहते हैं, वह हंसते-हंसते जीते हैं आंसुओं को भीतर पीते हैं। महफिल में रौनक छा जाती … जब प्रेम के नग्मे बजते हैं, कुछ […]
बाबुल —————- याद आए बाबुल जब-जब तेरी, आंख भर आए तब तब मेरी। मैं चिड़िया थी अंगना तेरे, चहका करती सांझ सवेरे। गोद में हंसती रोती गाती, थपकी तेरी मुझे सुलाती। थी बाबुल तेरी […]
मधुमक्खियां —————- कालबेलिया नृत्यांगना सी रंगत…. छरहरी… बिजली सी फुर्तीली, योद्धा ….. डंक हथियार लिए… घुमंतू… चकरी सा नृत्य कर जब तेज स्वर में बजाती है सारंगी सी धुन… तो मादकता बिखर जाती है हवाओं […]
जब वक्त मिले तो पढ़ लेना, पढ़ लेना रिश्तों की किताब कुछ रिश्ते मिलते हैं जन्म से, कुछ रिश्ते देता है यह समाज किन्तु निज चुनाव से जो रिश्ता, पुष्पित-पल्लवित होता है हृदय में, वो […]
दो किनारे इक नदिया के, चलें साथ-साथ पर कभी ना हो उनका मिलन एक दूजे को देखकर ही, रहते हैं दोनों प्रसन्न मिलने की भी ना सोचें कभी, दो किनारे इक नदिया के उन दोनों […]
घास पूस की झोपड़ी मैया है बीमार चौदह की गुड़िया ने थामी, है घर की पतवार। भूख बीमारी बेहाली के झंझावात घिरे हैं, गलत नजर से देख रहे श्वानों से सिरफिरे हैं। चूल्हा-चौका सब करना […]
जब रात को मैं सो जाती हूं, तो चाँद ज़मीं पर आता है मेरे आंगन में खूब सारी, वो चाँदनी छोड़ के जाता है सुबह को जब मैं उठती हूं, उस चाँदनी से मुंह धो […]
कल्पतरु सी बने कविता, सब के दुख हरे कविता बेरोज़गारों को रोज़गार मिले, बिछुड़ों को उनका प्यार मिले ऐसी सुंदर बने कविता, सुरतरू सी बने कविता शोहरत की चाह हो उसे शोहरत मिले, दौलत की […]
आओ बच्चों तुम्हें सिखाए कविता लिखने की कला। कुछ शब्दों को ध्यान में रखो मिल जायेगी काव्य कला।। कल खल गल घल -घल घल । चल छल जल झल -झल झल।। डल ढल डल टल […]
कविता- गालिब ——————- कवि जागो लेखक जागो, जागो जग के शायर सब , रोयेंगे कल यदि आज नहीं जागे हम| प्रकृति हमारा खंडहर हो रहा कल कहाँ से उपमा लायेंगे जब फूल नहीं बागों में, […]
गीत- क्या चाहते हो | दूर जो जाऊ पास बुलाते हो | पास जो आउ नजरे चुराते हो | सच बताओ तुम क्या चाहते हो | मालूम है तुमको तुमसे प्यार है कितना | सागर […]
खुद खुश रहना औऱ सभी को खुश रखना हो जीवन का पथ, याद रखो नश्वर है जीवन मिट जाना है बस इसका सच। तेरा-मेरा मेरा-तेरा कहते-कहते बीते पल-क्षण अंत समय तक समझ न पाया, जीवन […]
हर मन्दिर को पूजा हमने भगवान नहीँ मिल पाया है इस भूल भुलैया सी दुनिया में इन्सान नहीं मिल पाया है || हर व्यक्ति स्वार्थ में डूब रहा मन डूब गया भौतिकता में संवेदनाओं का […]
ज्वाला मेरी क्षीण नहीं मैं खुद को मंद रखा करता हूँ धीमे-धीमे जलता हूँ, खुद में स्वच्छन्द जिया करता हूँ। सच्चे दिल के लोगों को दिल में बैठाया करता हूँ, सच्चे मित्रों की महफ़िल में […]
टिम टिम करते लाखों तारे *********************** टिम टिम करते लाखों तारे। देखो लगते कितने प्यारे।। सुन्दर आकास सजा है ऐसे। हीरे-मोती से थाल भरा है जैसे।। बैठ के अंगना सदा निहारूँ। एक भी मोती कभी […]
मन के भीतर तक पहुँच गई, ठंडक की ठंडी हवा अब क्या हो इस ठिठुरन का हल कुछ है क्या इसकी दवा। होती तो मैं खा लेता, सबको उसे खिला देता, जितने भी मौसम होते […]
मुख खोलो कुछ बचन कहो इसमें क्या कोई घाटा है। रौनक क्योंकर खोई -सी है आज पटल पर सन्नाटा है।।
वो छत क्या अचानक गिर गई गिरी नही ऐसा कहो गिराई गई नींव संवेदनहीनता की रेत लालच की ईंट भ्रष्टाचार की सीमेंट बेईमानी का माया का जाल बिछा मूल्यों को तिजोरी में बंद इंसानियत को […]
बादल घिरे हुये हैं नभ में, गरज रहे हैं आज, बूंदें बरस रही आंगन में, छम छम छम छम बाज। ऐसे में तन पुलकित होकर, भीतर करता नाच, बाहर जाने से डरता है, ठंडक की […]
बचपन में जब मैं रोती थी, तो हंसाते थे मुझे लोग चलते समय जब गिरती थी, तो उठाते थे मुझे लोग अब बड़ी हो गई हूं तो, हंसती हुई को रुलाते हैं चलती हुई को […]
*****हे मनुज***** अपनी मेहनत से जो मिले, उसमें ही तेरा दिल खिले बढ़ते-चढ़ते देख किसी को, कभी नहीं किसी का दिल जले दूजे का हिस्सा ना खाऊं मैं, निज मेहनत का ही पाऊं मैं रहे […]
कविता -पीपल का वृक्ष —————————- जीवन जीने का आधार क्या है, हर धर्मों का सार क्या है, मानव क्या पाता है, जीवन में क्या खोता है| वृक्ष लगाओ संदेश मिला है, रोग मिटेंगे, वैज्ञानिकों ने […]
ठंड की बरसात में घर के भीतर छाता ओढ़कर सोने की मत सोचो दिखावे का रोना रोने की मत सोचो। मुँह चुराकर निकल जाने की मत सोचो। केवल खुद ही खाने की मत सोचो। अपनी […]
दुनिया से कटा कश्मीर, बर्फ़ से अटा कश्मीर मौसम का हुआ पहाड़ों पर कहर कांपा श्रीनगर और कांपा, जम्मू-कश्मीर का हर शहर डल झील जम गई, उसकी रफ्तार थम गई। बद्रीनाथ के पथ पर , […]
सौ वर्ष पुराना मन्दिर टूटा चांदनी चौक में देखो लोगों का दिल टूटा चांदनी चौक में हनुमान जी की पूजा करने आते थे जो भक्तगण देखो उनका मन्दिर जाना छूटा चांदनी चौक में यदि सरकार […]
ठंडी-ठंडी पवन चल रही भीगा-भीगा सा मौसम है, सूर्य-देव ही कृपा करें अब निकला जाता दम है सर्दी है बर्फ़ सी ठंडी मौसम भी कितना नम है, सूर्य-देव से कहूं धूप भेज दें, यहां धूप […]
जय-जय शिव शंकर सर्दी हुई भयंकर जय-जय बम भोले, गिरने लगे हैं ओले आई तेजी से बरखा रानी, झमाझम बरसा पानी सर्दी से कांपे है तन, निकला सा जाता है दम ऐसे मौसम में हाए […]
बिरह भक्ति गीत- मेरे श्याम सावरिया | चुराकर दिल मेरा मुझे दीवाना बना दिया | सुनो मेरे श्याम सावरिया | सुनाकर मीठी बाते मुझे अपना बना दिया | सुनो मेरे श्याम सावरिया | नैनो मे […]
वो जगह छूटी वो लोग छूटे, वो मन की लगी कब के बुझ चुकी, वो चाहत बहुत दूर जा चुकी, वो गलियां अब बेगानी हो चुकी फिर भी नजरें उस ओर पडते ही, आँसू टपक […]
दूजे की भी मदद कर, अपना ही मत देख। ठिठुर रहे जो सड़क पर, उनको भी तो देख। उनको भी तो देख, खिला दे रोटी उनको, पहना दे रे वस्त्र, इतना सक्षम है तू तो। […]
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